अंग्रेज शेर तो कीवी सवा शेर

ऐसा कोई अवसर तो होता जो बांग्लादेश को जीतने का अवसर देता या दूसरे वाले मैच में अफगानिस्तान को न्यूजीलैंड के खिलाफ। ऐसा कोई टर्निंग पॉइंट जिसके सहारे बांग्लादेश या अफगानिस्तान विजय रथ पर चढ़ सकता। ऐसा कोई मौका ही नहीं दिया अंग्रेजों ने और कीवियों ने। कीवियों ने अफगानिस्तान को सस्ते में आउट कर दिया। १७२ रन ही बना सका अफगानिस्तान जिसे ३ विकेट खोकर न्यूजीलैंड ने जल्द पार कर लिया। बड़ी जीत उसकी भी थी।
इधर, शुरू से आखिर तक इंग्लैंड बांग्लादेश पर हावी रहा। इतना हावी कि १०६ रनों की एक बड़ी जीत अपने झोले में डाली। हां, ये जीत और अधिक बड़ी हो जाती, यदि बांग्लादेश के बल्लेबाज शाकिब अल हसन के बल्ले से शतकीय पारी न निकलती। शाकिब का साथ देनेवाला एकमात्र बल्लेबाज था विकेटकीपर मुशफिकर रहीम, मगर ४४ रनों पर वो आउट हुआ तो इंग्लैंड के लिए एक बड़ी जीत तय हो गई।
इंग्लैंड जीत तो तभी गया था, जब ३८६ रनों का लक्ष्य बांग्लादेश को दिया था। ५० ओवरों में इतना विशाल लक्ष्य कूदने का अर्थ था दो बड़ी पार्टनरशिप। बांग्लादेश के पास इतनी लंबी साझेदारी के लिए सिर्फ दो बल्लेबाज थे और उन दोनों ने कोशिश भी की किंतु मुशफिकर का आउट हो जाने के बाद अकेले शाकिब को पहाड़ से स्कोर तक पहुंचना लगभग असंभव था। उनका साथ देनेवाला ऐसा कोई बल्लेबाज नहीं था।
बांग्लादेश को चाहिए था कि वो सलामी बल्लेबाज जेसन रॉय और बेयरस्टोव को जल्दी पवैलियन लौटाता। उसने बेयरस्तोव को तो ५१ रनों पर भेज दिया मगर रॉय को रोक नहीं सका। रॉय ने रुट और बटलर के साथ मिलकर बांग्लादेश के गेंदबाजों की धज्जियां बिखेर दी। अपनी १५३ रनों की शानदार पारी के बाद गेंदबाजों के जबरदस्त प्रदर्शन से इंग्लैंड ने मैच में बांग्लादेश को १०६ रनों से हराकर अपनी दूसरी जीत हासिल की। खास बात यह है कि इंग्लैंड ने विश्वकप में १२ साल बाद बांग्लादेश को शिकस्त दी है। रॉय ने १२१ गेंद की पारी के दौरान पांच छक्के जड़े और १४ चौके लगाए। उनकी और बाद में जोस बटलर की शानदार स्ट्रोक से भरी ६४ रनों की अर्धशतकीय पारी की बदौलत इंग्लैंड ने छह विकेट पर ३८६ रन बना डाले। जवाब में बांग्लादेश की टीम शाकिब अल हसन की १२१ रनों की पारी के बावजूद इस लक्ष्य का पीछा करते हुए ४८.५ ओवर में २८० रन ही बना सकी।
कुल मिलाकर कहा जाए कि इंग्लैंड ने बांग्लादेश को सांस लेने का भी मौका नहीं दिया तो उचित ही होगा। इन सबके बीच मगर शाकिब की बल्लेबाजी ने अपना जलवा बिखेरा, इसमें कोई दो राय नहीं। शाकिब जैसा एक और बल्लेबाज यदि क्रीज पर टिक जाता तो अंग्रेजों के लिए मुसीबत का सबब बन जाता। मुशफिकर आउट जब हुआ तब अंग्रेजों की जीत लिखा गई। शाकिब के आउट होते ये सुनिश्चित हो गई। इसके बावजूद इस मैच में जीत-हार के मध्य किसी प्रकार का कोई टर्निंग पॉइंट जैसा पहलू देखने में नहीं आया सिवाय इसके कि जेसन रॉय को स्पिनर मेंहदी हसन ने अपने ओवर के ६ गेंदों पर ६ छक्के नहीं मारने दिए और वो तीन लगातार छक्के लगाकर चौथे में वैâच आउट हो गया। शायद रॉय को बहुत अफसोस भी हुआ होगा क्योंकि ये एक अच्छा मौका भी था जब वो इस विश्वकप में एक नया रिकॉर्ड जोड़ता।
बहरहाल, इंग्लैंड तीन मैच खेला है, दो जीता है और एक हारा है। उधर, न्यूजीलैंड भी जीतकर अंक तालिका में शोभायमान है। कुल मिलाकर इन दोनों मैच में एकतरफा जीत मिली इंग्लैंड और न्यूजीलैंड को। निषम और फर्ग्युसन ने अफगानिस्तान की पारी पर ऐसी आरी चलाई कि वो टुकड़े-टुकड़े हो गई। फर्ग्युसन ने ५ और निषम ने ४ विकेट लिए। अफगानिस्तान के शहीदी ने कीवियों का सामना किया मगर वो ५९ रनों पर आउट हो गया। हजरुतल्ला और अली दो बल्लेबाज ऐसे और रहे, जिन्होंने ३० से ऊपर रन बनाए बाकी सब आए और चलते बने। फिर भी अफगानिस्तान ने कीवियों के तीन विकेट जरूर उखाड़े, यही उनके लिए बड़ी बात रही। न्यूजीलैंड ७ विकेट से जीत गया और महज ३२.१ओवरों में। कहा जा सकता है कि अंग्रेज यदि शेर रहे तो कीवी सवा शेर बनकर अफगानिस्तान पर टूटे।