" /> ‘अंतिम इच्छा’ दो दिन पहले ही पूछ ली

‘अंतिम इच्छा’ दो दिन पहले ही पूछ ली

निर्भया बलात्कार और हत्याकांड के चारों दोषियों की अंतिम ‘अंतिम इच्छा’ दो दिन पहले ही पूछ ली गई थी। 18 मार्च की सुबह तिहाड़ जेल के जेलर ने चारों दोषियों के बैरक में जाकर उनसे अंतिम इच्छा पूछी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के मुताबिक पूरी प्रक्रिया का पालन किया। तिहाड़ जेल सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक अंतिम इच्छा में चारों दुष्कर्मियों से उनके हिस्से की विरासत व जायदाद आदि को उनके बाद किसे देना है। जिसे देना है उनका नाम-पता आदि पूछा गया। उस दौरान स्थानीय एसडीएम और बाकी अधिकारी भी मौजूद थे, उनके पास विरासत के कागजात भी थे। ताकि नाम बताए जाने पर उनसे हस्ताक्षर और अंगूठे का निशान लिया जा सके। सूत्रों से यह भी पता चला कि किसी भी दोषी के नाम कोई संपत्ति नहीं थी। अंतिम इच्छा जानने के वक़्त सभी दोषी रो रहे थे। अपने गुनाहों का प्राश्चित कर रहे थे। जेलर से आजादी की माफी मांग रहे थे। गौरतलब है, दोषियों के फांसी से बचने के क़ानूनी पैंतरे तो तकरीबन पूरे हो चुके थे। बस वक़्त की घड़ी धीरे-धीरे फांसी के मुकर्रर समय तक पहुंच रही थी। इन्तज़ार बीस तारीख की सुबह साढ़े पांच बजे का हो रहा था। इस घड़ी को याद करके दोषी सहम रहे थे। दो दिन पहले जब उनके कपड़ों का नाप लिया गया, तब भी चारों रो रहे थे। नियम के मुताबिक फांसी नए कपड़ों के साथ दोषियों को फांसी दी जाती है। फांसी से बचने की अंतिम उम्मीद राष्ट्रपति ही थे। अगर वह स्टे लगाते हैं तो शायद फांसी की तारीख एक बार फिर आगे बढ़ सकती थी। पिछले तीन दफे ऐसा ही हुआ। लेकिन, इस बार ऐसा नहीं हुआ। दोषियों के परिवारों में पिछले कई दिनों मातम छाया हुआ था, किसी के घर के चूल्हे नहीं जल रहे थे। दोषी तो एक फांसी पर लटके, लेकिन, जो दर्द अपने परिवार को विरासत में देकर गए, शायद वह फांसी की सजा से कहीं बढ़कर है।