" /> अंतिम वर्ष की परीक्षा होगी या नहीं! राज्यपाल के हस्तक्षेप से छात्र हैं परेशान

अंतिम वर्ष की परीक्षा होगी या नहीं! राज्यपाल के हस्तक्षेप से छात्र हैं परेशान

महाराष्ट्र सरकार की तरफ से अंतिम वर्ष में पढ़ रहे छात्रों के लिए राहतभरी खबर आई है। सरकार के फैसले में कहा गया कि अंतिम वर्ष में पढ़ रहे छात्रों को परीक्षा देने की जरूरत नहीं होगी। उन सभी विद्यार्थियों को पिछले सेमेस्टर के आधार पर अंक देकर पास कर दिया जाएगा लेकिन राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने सरकार के इस फैसले में हस्तक्षेप करते हुए इसका विरोध किया है। इसी वजह से छात्र असमंजस में पड़ गए हैं। एग्जाम आयोजित किए जाएंगे या नहीं यह अभी तक साफ नहीं हो पाया है।
गोरेगांव में रहनेवाले सिविल इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष में पढ़ रहे छात्र इंद्रजीत वर्मा ने बताया कि सरकार द्वारा एग्जाम आयोजित न कराने का फैसला बिल्कुल सही है। कोरोना का प्रकोप तेजी से फैल रहा है, ऐसे में छात्रों का परीक्षा लेना बिल्कुल अच्छा नहीं होगा। राज्य सरकार और गवर्नर को आपस में समझौता कर तुरंत इस मुद्दे को साफ करना चाहिए। इंजीनियरिंग छात्र अभिषेक सिंह के मुताबिक जब राज्य सरकार ने परीक्षा न लेने का फैसला किया था, तब मैं अपने परिवार के साथ गांव पहुंच गया। गांव पहुंचने के बाद जब मैंने देखा कि गवर्नर ने इस मामले में अपनी टांग अड़ाई है तो बेहद दुख हुआ। भगतसिंह कोश्यारी अगर एग्जाम कराने की मांग करते हैं तो यह छात्रों एवं उनके परिजनों से जान का खिलवाड़ करना साबित होगा। बी.कॉम की पढ़ाई करनेवाले गौरव सिंह ने बताया कि राज्यपाल के विरोध के बाद वे उलझन में फंस गए हैं, उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि वे पढ़ाई करें या न करें। गवर्नर का विरोध जायज नहीं है। राज्य में प्रतिदिन 2 हजार से अधिक मामले सामने आ रहे हैं, ऐसे में एग्जाम लेना घातक साबित हो सकता है। अंतिम वर्ष में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही छात्रा प्राजक्ता सोलंकी ने बताया कि अगर ऑनलाइन एग्जाम भी कराया जाता है तो ये अच्छा नहीं होगा। बहुत से छात्र रूरल इलाके में रहते हैं, जहां नेटवर्क की गति बहुत कम रहती है और छात्रों को बुलाकर एग्जाम लेना बहुत बुरा आइडिया होगा, ऐसे में एग्जाम न लेना ही एकमात्र सुरक्षित विकल्प है। कुछ छात्रों के माता-पिता का भी यही विचार है। उनका कहना है कि सेहत से बढ़कर कुछ भी नहीं है, इन कठिन परिस्थियों में परीक्षा का आयोजन नहीं होना चाहिए। इन सब वजहों से छात्रों में अभी भी एग्जाम को लेकर उलझन की स्थिति बनी हुई है।
बता दें कि राज्य में बढ़ते कोरोना मरीजों को देखते हुए राज्य सरकार की तरफ से अंतिम वर्षीय छात्रों की परीक्षा न लेने के लिए कहा गया लेकिन राज्यपाल ने इसे अच्छा कदम नहीं माना और इसका विरोध किया। राज्यपाल का कहना है कि इससे बच्चों का भविष्य खराब हो सकता है, वहीं राज्य सरकार का कहना है कि परीक्षा से ज्यादा जरूरी बच्चों और उनके परिजन के सेहत का है। अगर परीक्षा का आयोजन होता है तो बहुत सारे छात्र कंटेंनमेंट जोन में रहते हैं, अगर वो कॉलेज जाते हैं तो संक्रमण का खतरा अधिक बढ़ सकता है।