अंधेरी में ‘टिकटॉक’, टिकट के लिए यात्रियों को लगाने पड़ते हैं चक्कर

पश्चिम रेलवे पर इन दिनों रेल यात्री आपको ‘टिकटॉक’ करते नजर आ जाएंगे। यह टिकटॉकवाली स्थिति अंधेरी स्टेशन पर बनी हुई है। पश्चिम रेलवे के सबसे महत्वपूर्ण स्टेशन पर यात्रियों के साथ रोजाना ये टिकटॉक जैसा मजाक हो रहा है। ट्रेन का टिकट खरीदनेवाले यात्रियों को सौ मीटर की कसरत करनी पड़ती है। टिकट विंडो उनकी पीठ पीछे ही होती है, जिसका अंदाजा यात्री नहीं लगा पाते हैं और टिकट खिड़की की खोज में यहां-वहां ‘टिकटॉक’ करते रोजाना सैकड़ों यात्री नजर आ जाते हैं।
अंधेरी-पश्चिम से स्टेशन परिसर में आने के लिए यात्री डेक यानी पहली मंजिल से गुजरकर प्लेटफॉर्म पर जाते हैं। इस डेक पर यदि चर्चगेट छोर से कोई आता है, तो टिकट खिड़की ढूंढ़ता रहता है। ‘दोपहर का सामना’ ने तकरीबन २ घंटे तक इस स्पॉट का जायजा लिया। डेक पर चढ़नेवाले यात्रियों की आंखों के सामने टिकट खिड़की बंद पड़ी रहती है। जब यात्री इसे क्रॉस करते हैं तो तकरीबन सौ मीटर दूर टिकट खिड़की नजर आती है, जहां सैकड़ों यात्री कतार में होते हैं लेकिन जब बंद पड़ी खिड़कियों को क्रॉस करने के बाद भूल से यात्री पीछे देखता है तो उसे पीठ पीछे ही खिड़कियां खुली नजर आती हैं।
एक यात्री अनीता विश्वकर्मा ने टिकट खिड़की देखकर मजाकिया लहजे में कहा कि लगता है रेलवे अधिकारी भी ‘टिकटॉक’ गेम से प्रभावित हैं इसलिए यात्रियों को टिकट के लिए रेलवे ‘टिकटॉक’ करवा रही है। वहीं अन्य एक महिला यात्री संजना शर्मा ने बताया कि जो यात्री चर्चगेट दिशा की छोर से डेक पर टिकट निकलने के लिए आते हैं तो ठीक सामने बुकिंग खिड़की बंद पड़ी होती है। अधिकतर यात्री खिड़की बंद देख यहां-वहां टिकट के लिए पूछताछ करते दिखते हैं। रेलवे को अंधेरी स्टेशन से सफर करनेवाले यात्रियों की संख्या को देखते हुए बंद रखी गई टिकट खिड़कियों को शुरू करना चाहिए। टिकट के लिए कई मीटर की लंबी कतार लग जाती है।
जानकारी के मुताबिक स्टेशन परिसर में शौचालय, टिकट खिड़कियां और फूड स्टॉल जैसी सुविधाएं यात्रियों की आंखों के सामने होनी चाहिए लेकिन यहां उल्टा हो रहा है। एक अधिकारी ने बताया कि चर्चगेट छोर की दिशा में पहले टिकट खिड़कियां खुली रहती थीं लेकिन यहां स्थित फूड प्लाजावालों की शिकायत पर इन्हें बंद कर दिया गया। अधिकारी ने बताया कि फूड प्लाजा को इन टिकट खिड़कियों के कारण परेशानी हो रही थी क्योंकि यात्री कतार में खड़े रहते थे। इससे स्टॉल की विजिब्लिटी पर असर पड़ रहा था।