" /> अद्भुत हैं नीलकंठ महादेव, शिव के विष प्राशन का दिखता है प्रभाव

अद्भुत हैं नीलकंठ महादेव, शिव के विष प्राशन का दिखता है प्रभाव

सावन माह के उपलक्ष्य में बांदा स्थित कालिंजर दुर्ग में भगवान नीलकंठ महादेव का दर्शन करने के लिए भारी भीड़ उमड़ रही है। ८०० फीट ऊपर पहाड़ी पर मौजूद किले कालिंजर को कालजयी कहा जाता है। इस किले का १८ पुराणों और चारों वेदों में जिक्र है। इस किले में नीलकंठ महादेव मंदिर है। जहां समुद्र मंथन से निकले विष के रहस्य छिपे हुए हैं। कहा जाता है कि महादेव ने विषपान के बाद यहीं तपस्या कर विष के प्रभाव को खत्म कर काल की गति को मात दी थी। पांच फीट ऊंचा शिवलिंग विश्व का अनूठा और इकलौता शिवलिंग है, जिसमें विष पसीना बनकर रिसता रहता है।
भक्त शरीर में लगाते हैं पसीना

कालिंजर में अद्भुत शिवलिंग और इससे निकलनेवाले पसीने का राज बेहद गहरा है। मान्यता है कि शिव ने समुद्र मंथन में जो विष पिया था उसका प्रभाव यहां दिखाई देता है और उसी प्रभाव की आस्था में सभी नतमस्तक हैं। भगवान शिव के दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में लोग मंदिर में आते हैं और शिवलिंग से निकलनेवाले पसीने को हाथों में लेकर अपने माथे और शरीर पर लगाते हैं। कहा जाता है कि इससे शरीर की तपिश कम होती है। साथ ही बुरे विचार और बुरी बलाओं का असर नहीं होता है।