अन्नदाता सुखी भव!

कड़ी मेहनत से खेत में अन्न उपजाकर लोगों का पेट भरनेवाले किसान खुद कर्ज में डूब चुके हैं और यह कर्ज उनके लिए जानलेवा साबित हो रहा है। राज्य सरकार ने उन्हें कर्जमुक्त करने का आश्वासन तो दिया लेकिन कर्जमुक्ति किसानों के लिए दूर की कौड़ी साबित हुई है। ऐसे में अपने अधिकार के लिए लगभग १८० किमी नासिक से मुंबई पैदल चलकर आए किसान भाई-बहनों का मुंबईकरों ने दिल खोलकर स्वागत किया। भाजपा को छोड़ अन्य राजनीतिक पार्टियों ने किसानों की मांगों को जायज ठहराते हुए उनका समर्थन किया तो दूसरी ओर मुंबई के डिब्बेवालों से लेकर अन्य समाजसेवी संस्थाओं व शिवसैनिकोेंं ने ‘अन्नदाता सुखी भव!’ कहते हुए उन्हें भरपेट भोजन कराया। ये अन्नदाता किसान ही हैं जो कड़ी धूप में पसीना बहाकर खेतों में अन्न उपजाते हैं। राजा हो या रंक, इसी अन्न से अपना पेट भरते हैं। आज जब ये अन्नदाता संकट से जूझ रहे हैं तो मुंबईकरों ने उनका मनोबल बढ़ाकर बता दिया कि हम तुम्हारे साथ खड़े हैं!