अपने देश में बेगाना ‘रॉ’ का पूर्व जासूस

यूपी में ‘राष्‍ट्रभक्‍त’ सरकार है लेकिन राष्‍ट्रभक्‍तों के लिए इस सरकार के खजाने की लिमिट खत्‍म हो जाती है। वोट की राजनीति पर सारे नियम-कानून ताक पर रख देनेवाली यूपी सरकार के अधिकारी राष्‍ट्र के लिए अपनी जिंदगी कुर्बान कर देनेवाले देशभक्‍त के लिए सहायता देने में लक्ष्‍मण रेखा खींच देते हैं। हिंदुस्थान की खुफिया एजेंसी ‘रॉ’ के वर्ष १९८४ के टैलेंट हंट के जरिए चुने गए मनोज रंजन दीक्षित ने अपनी जिंदगी के कीमती २१ साल देश के लिए कुर्बान किए लेकिन बदले में उन्‍हें मिली जलालत भरी जिंदगी। पत्‍नी कैंसर से जूझ रही है और मनोज पाई-पाई को मोहताज हैं। पत्‍नी की कीमोथेरेपी करा पाने में असफल मनोज की आंखों से निकलते आंसू अपने ही देश में बेगाने हो जाने का दर्द बयां करते हैं। उनको तड़प है कि क्‍या देशभक्ति में अपने जान को दांव पर लगा देना इतना बड़ा गुनाह है?
मनोज रंजन दीक्षित को ‘रॉ’ के टैलेंट फाइंडर जीतेंद्रनाथ सिंह परिहार ने चुना था। एक साल की कठोर ट्रेनिंग के बाद दीक्षित को जनवरी १९८५ में एक गाइड के साथ पाकिस्‍तान भेजा गया जो उन्हें पल्लो गांव होते हुए बंबावली-रावी-बेदियान नहर पार कराकर लाहौर ले गया। इसके बाद शुरू हो गई मनोज रंजन की जासूसी। २३ जनवरी १९९२ को दीक्षित को सिंध प्रांत के हैदराबाद से गिरफ्तार कर लिया गया। करीब एक साल तक उन्हें इसी तरह अलग-अलग फौजी ठिकानों पर टॉर्चर किया जाता रहा और पूछताछ होती रही। सबूत और गवाह न होने के कारण पाकिस्तान सेना ने उन्हें सिंध सरकार के सिविल प्रशासन के हवाले कर दिया। मार्च २००५ में उन्‍हें बाघा बॉर्डर पर हिंदुस्थानी सुरक्षा एजेंसियों के हवाले कर दिया गया। १३ साल जेल में बितानेवाले मनोज रंजन को हिंदुस्थान आने पर सरकार के नुमाइंदे ने उन्‍हें दो किस्‍तों में १ लाख ३६ हजार रुपए दिए और सब कुछ भूल जाने को कह दिया। मनोज के सामने आगे की जिंदगी जीने की मुश्किलें आ खड़ी हुर्इं। उनकी पत्नी शोभा दीक्षित को कैंसर हो गया। कीमोथेरेपी और दुष्कर इलाज के क्रम में शोभा मां नहीं बन सकीं और मानसिक तौर पर भी बुरी तरह टूटकर विक्षिप्‍त हो गर्इं। मनोज कहते हैं कि अखिलेश यादव से लेकर योगी आदित्‍यनाथ सरकार द्वारा उन्‍होंने अपनी पत्‍नी के इलाज के लिए मदद मांगी। काफी लिखा-पढ़ी करने के बाद सरकार ने उन्‍हें इलाज के लिए रकम दी गई लेकिन अब अधिकारी कहते हैं कि पांच लाख से ज्‍यादा की मदद नहीं दी जा सकती।