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अब गर्मी का ‘रेड एलर्ट’

महाराष्ट्र सहित कई राज्य इस समय कोरोना के कहर और ग्रीष्म ‘लहर से जूझ रहे हैं। मौसम विभाग ने कहा है कि आगामी तीन से चार दिनों तक हालात ऐसे ही रहेंगे। महाराष्ट्र सहित मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, हरियाणा और अन्य राज्यों में गर्मी की तीव्रता में जबरदस्त वृद्धि हुई है। पहले से ही कोरोना संकट और उसपर भीषण गर्मी सभी को झेलनी पड़ रही है। मई महीना होने के कारण गर्मी की तीव्रता बढ़ेगी, उष्माघात बढ़ेगा, मुंबई जैसे महानगर में गर्मी और उमस भी बढ़ेगी, जिससे लोगों को ‘घुटन’ होती है। वही बात अब हो रही है, फर्क सिर्फ इतना है कि फिलहाल हर जगह कोरोना पसरा है, ग्रीष्म लहर और उष्माघात से ग्रामीण इलाकों पर इसके असर की ‘खबरों’ को मीडिया में उतना महत्व नहीं मिल रहा। महाराष्ट्र में अब तक उष्माघात के कारण दो या तीन लोगों की मौत हो चुकी है। चंद्रपुर में शफीक शेख इमाम नामक युवक की बुधवार को उष्माघात के कारण मौत हो गई। शफीक एक गरीब परिवार से था। वह एक दुकान में काम कर रहा था। दोपहर में उसे हीटस्ट्रोक हुआ और अस्पताल ले जाने से पहले ही उसकी मृत्यु हो गई। चंद्रपुर ग्रीष्म लहरों का एक नियमित हॉटस्पॉट है। यूं तो हर साल पूरा विदर्भ ग्रीष्म लहरों की चपेट में रहता ही है। अकोला जिले में भी एक व्यक्ति की मौत उष्माघात से हुई, ऐसा बताया जा रहा है। लगातार तीसरे दिन चंद्रपुर का तापमान ४५ डिग्री सेल्सियस से ऊपर था। सोमवार को यह ४६.६ डिग्री सेल्सियस था। पूरे विदर्भ की स्थिति गंभीर है इसीलिए विदर्भ में गर्मी को लेकर तीन दिनों का ‘रेड अलर्ट’ जारी किया गया है। मराठवाड़ा और खानदेश में भी पारा ४५-४६ डिग्री सेल्सियस के आसपास है। हालांकि यह हर साल की तस्वीर है। इस साल अधिकतम तापमान ४६ से ४८ डिग्री सेल्सियस है तथा न्यूनतम तापमान ३२ से ३६ डिग्री सेल्सियस है और यह खतरे की घंटी है। अधिकतम तापमान के साथ न्यूनतम तापमान में वृद्धि एक परिवर्तित प्रकृति चक्र का सूचक है। राजस्थान के चूरू में इस साल भी तापमान ५० डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला गया है। पिछले कुछ वर्षों में चुरू दुनिया में सबसे गर्म स्थान साबित हो रहा है। देश के अन्य नियमित ‘हॉट स्पॉट्स’ का तापमान भी बढ़ता ही जा रहा है। उत्तर प्रदेश के बांदा और प्रयागराज में पारा ४८ डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। हरियाणा के हिसार में भी यही स्थिति है। राजधानी दिल्ली में गर्मी ने गत १७ सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में कुछ अलग तस्वीर नहीं है। ये अच्छी बात है कि चार-पांच सालों से गर्मी ने जो कहर बरपाया था, उतना कहर इस बार नहीं है। उस समय गर्मी के कारण ५०० से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। इस बार ऐसा नहीं हुआ और मौसम विभाग का अनुमान है कि फिलहाल चल रही ग्रीष्म लहर का असर चार-पांच दिनों में कम हो जाएगा। हालांकि, मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक दोपहर के समय घर से बाहर न निकलने की चेतावनी जारी की है। पिछले दो महीनों से कोरोना से बचने के लिए ‘घर पर ही रहने’ की अपील की जा रही थी। अब मौसम विभाग ग्रीष्म लहरों वाले क्षेत्रों में उष्माघात से बचने के लिए ‘घर से बाहर न जाने’ की बात कह रहा है। इसमें गलत कुछ भी नहीं है। आखिरकार सवाल जान बचाने का है। कोरोना लॉकडाउन के कारण, देश की जनता घर पर ही बैठी हुई है, ऐसे में ग्रीष्म लहरों से बचने के लिए दोपहर के समय घर पर ही रहने को कहा जाए तो गलत क्या है? गर्मी के रेड एलर्ट की सूचना देनेवाले मौसम विभाग ने कहा है कि महीने के आखिर में पारा लुढ़केगा। इसके अलावा लगभग ५ जून को केरल में और १५ से २० जून के बीच मुंबई में मानसून पहुंचने का अनुमान है। मानसून के शुरुआत की यह ‘भविष्यवाणी’ निश्चित रूप से सुखद है, लेकिन फिलहाल ग्रीष्म लहर का विचार महत्वपूर्ण है। कोरोना संकट के कारण वर्तमान में देश ‘रेड जोन’, ‘ऑरेंज जोन’ और ‘ग्रीन जोन’ में विभाजित किया गया है। अब ग्रीष्म लहर के कारण देश के कुछ हिस्सों में ‘रेड अलर्ट’ और ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किए गए हैं। आखिर कोरोना का ‘रेड जोन’ हो या गर्मी का ‘रेड अलर्ट’ हो, संदेश ‘घर पर रहें, सुरक्षित रहें’ का है और इसका पालन किया जाना चाहिए।