अब रेल का साइबर सेल रुकेगा अपराधियों का खेल

रेलवे में होनेवाले अपराध की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए रेलवे खुद अपना साइबर सेल सेट-अप करने जा रही है। यह साइबर सेल पश्चिम रेलवे के मुंबई सेंट्रल में रेलवे सेट-अप करेगी ताकि मोबाइल चोर, अवैध टिकट दलाल सहित हिस्ट्रीशीटरों पर नजर रखी जा सके।
क्यों जरूरत है?
किसी भी साइबर क्राइम को डिटेक्ट करने के लिए आरपीएफ को रेलवे पुलिस जीआरपी की मदद लेनी पड़ती है। दोनों सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल बैठाने और इनपुट इकट्ठा करने में काफी समय लगता है। रेलवे के पास खुद का साइबर सेल सेट-अप होने से स्वतंत्र रूप से रेलवे अपराधियों को पकड़ पाएगी।
रेलवे में अपराध
रेलवे में सबसे अधिक अपराध मोबाइल चोरी के सामने आते हैं। २०१८ के पहली छमाही में १५,००० मोबाइल चोरी के मामले सामने आए थे। इसके अलावा ट्रेनों में यात्रियों का कीमती सामान, बैग आदि चोरी होते हैं।
दलालों की नहीं गलेगी दाल
रेलवे में साइबर सेल सेट-अप होने से ऑनलाइन टिकट बुकिंग करनेवाले दलालों की दाल नहीं गल पाएगी। साइबर सेल दलालों के आईपी एड्रेस, टिकट बुकिंग डेटा का विश्लेषण, टिकट बुकिंग का तरीका सहित बैंक इंफॉर्मेशन का विश्लेषण कर दलालों का पता लगा पाएंगे।
ऐसे करेगा काम
१) कार्यप्रणाली- वायलेस वैâरियर्स से सीडीआर का विश्लेषण करने में आसानी होगी।
२) सीडीआर और मोबाइल की मदद से उपभोक्ता की लोकेशन और वह कहां है? इसका पता लगाने में मदद होगी।
३) रेलवे पुलिस संदिग्धों की पहचान रेलवे स्टेशनों पर लगे सीसीटीवी वैâमरों से कर पाएगी।
४) सीसीटीवी फुटेज जैसे अन्य उपकरणों की मदद से संदिग्ध की वर्तमान लोकेशन की पुष्टि संभव होगी।