" /> अब विधायकों को छिपाने का खेल शुरू! मैदान में उतरे संकटमोचक

अब विधायकों को छिपाने का खेल शुरू! मैदान में उतरे संकटमोचक

 कांग्रेस को सता रहा डर
 संकट में कमलनाथ सरकार
 बागी विधायकों से संपर्क जारी

मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस्‍तीफे के बाद अब भाजपा और कांग्रेस में शह-मात का खेल शुरू हो गया है। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया है कि बागी विधायक सीएम कमलनाथ के संपर्क में हैं और वापस लौटने को तैयार हैं। उधर भाजपा ने भी बागी विधायकों को अपने साथ बनाए रखने और अपने विधायकों को तोड़ने से रोकने के लिए पूरी ताकत लगा दी है। इसी को देखते हुए अब विधायकों को छिपाने का खेल शुरू हो गया है।
कांग्रेस प्रवक्ता शोभा ओझा ने दावा किया है कि १९ बागी विधायक हमारे संपर्क में हैं और वे वापस लौटने को तैयार हैं। इस बीच पूरे मामले में उस समय नया मोड़ आ गया जब सिंधिया के समर्थक एक विधायक ने कहा कि हम ‘महाराज’ के साथ हैं लेकिन भाजपा के नहीं। उन्होंने ज्योतिरादित्य से अलग दल बनाए जाने की मांग की है। बताया जा रहा है कि यह विधायक लगातार भाजपा के खिलाफ सियासत करके आगे बढ़े हैं। कांग्रेस को डर सता रहा है कि कहीं उसके और ज्यादा विधायक न टूट जाएं। इससे पहले मंगलवार को सीएम कमलनाथ की बैठक में मात्र ८८ कांग्रेस विधायक और ४ निर्दलीय ही पहुंचे थे। वहीं २२ बागी विधायक अभी भी बंगलुरु के एक होटल में रुके हुए हैं। कमलनाथ सरकार को बचाने के लिए कांग्रेस के संकटमोचक कहे जानेवाले कर्नाटक के नेता डीके शिवकुमार मैदान में उतर आए हैं। उन्‍होंने कहा है कि बागी विधायक उनके साथ संपर्क में हैं और इनमें से ज्‍यादातर लोग वापस लौटना चाहते हैं। उन्‍होंने आरोप लगाया कि कर्नाटक में १९ विधायक पुलिस हिरासत में हैं। उधर इस संकट से उबारने के लिए सोनिया गांधी ने हरीश रावत और मुकुल वासनिक को भेजा है। साथ ही बागियों को मनाने के लिए एमपी के मंत्री गोविंद सिंह और सज्‍जन वर्मा बंगलुरु पहुंच गए हैं। कमलनाथ सरकार पर संकट गहराता जा रहा है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के बागी होने के साथ ही २२ विधायक इस्तीफा दे चुके हैं। भाजपा का तो दावा है कि यह संख्या ३० तक पहुंच सकती है। इस बीच मध्‍य प्रदेश कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कहा है कि कमलनाथ की सरकार को कोई खतरा नहीं है। उन्‍होंने यह भी कहा है कि आनेवाले दिनों में होनेवाला फ्लोर टेस्ट सबको चौंका देगा।
भाजपा के विधायक हरियाणा और कांग्रेस के जयपुर में
इस बीच भाजपा ने अपने विधायकों को किसी टूट-फूट से बचाने के लिए हरियाणा के मानेसर में शिफ्ट कर दिया है। उधर कांग्रेस पार्टी ने भी अपने विधायकों को जयपुर भेज दिया है। जयपुर के एक रिजॉर्ट में कांग्रेस के विधायकों के रुकने के कमरे बुक किए गए हैं। मध्य प्रदेश में जारी राजनीतिक उठा-पटक के बीच वहां के कांग्रेस विधायक बुधवार को दोपहर जयपुर पहुंच गए। सूत्रों के अनुसार पार्टी के ८० से अधिक विधायक यहां पहुंचे हैं।
भाजपा की तरफ से लिंबावली सक्रिय
बंगलुरु। राजनीति में आमतौर पर नेता होते हैं लेकिन संकट की घड़ी में जो काम आता है, उसे संकटमोचक कहते हैं। कांग्रेस की ओर से डीके शिवकुमार ऐसे ही संकटमोचक हैं। भाजपा के अरविंद लिंबावली अब खुद को संकटमोचक साबित करने में लगे हुए हैं। दरअसल लिंबावली कांग्रेस के १९ बागी विधायकों की निगरानी कर रहे हैं। इन सभी विधायकों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। ऐसे में मध्य प्रदेश में सत्ता की लड़ाई अब संकटमोचकों के ही भरोसे है। भाजपा और कांग्रेस की ओर से जोर-आजमाइश जारी है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आखिर में बाजी किसके हाथ लगती है और कौन असली संकटमोचक साबित होता है? अरविंद लिंबावली कर्नाटक की महादेवपुरा से विधायक हैं और मंत्री भी रहे हैं।
भाजपा में आते ही सिंधिया को राज्यसभा का टिकट
भोपाल। कांग्रेस को भोपाल से लेकर दिल्ली तक हिलाकर रख देनेवाले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भाजपा से नाता जोड़ लिया है। बुधवार दोपहर उन्होंने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की मौजूदगी में भगवा पार्टी का दामन था। नड्डा ने सिंधिया का पार्टी में स्वागत करते हुए उनकी दादी राजमाता विजयाराजे सिंधिया का भी जिक्र किया। भाजपा में शामिल होने के बाद उन्हें राज्यसभा का टिकट दे दिया गया। इसी दौरान नड्डा ने कहा कि सिंधिया का आना भाजपा के लिए एक परिवार के सदस्य की तरह है क्योंकि उनकी दादी ने जनसंघ से भाजपा तक को अपना काफी योगदान दिया है। ज्योतिरादित्य के आने से अब एक तरह से पूरा सिंधिया परिवार ही भाजपा के खेमे में है। उनकी दादी दिवंगत विजय राजे सिंधिया इसी पार्टी में थीं। सिंधिया की बुआ यशोधरा राजे मध्य प्रदेश से भाजपा विधायक हैं। सिंधिया की एक अन्य बुआ वसुंधरा राजे भाजपा नेता हैं और वह राजस्थान की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। सिंधिया के पिता माधव राव सिंधिया ने भी अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत १९७१ में जनसंघ के सांसद के रूप में की थी और बाद में वह कांग्रेस में शामिल हो गए थे।

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