अब स्टार्टअप को  बढ़ावा देगा नाबार्ड

स्थानीय एवं कृषि उद्यमिता की बहुत चर्चा हो चुकी है लेकिन इनके लिए स्टार्टअप स्कीम वैसी नहीं प्रभावी हो पाई है, जैसे अन्य उद्यमों में उपलब्ध है। नाबार्ड अपने कई उपायों के माध्यम से अभी स्टार्टअप पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। कृषि और ग्रामीण वित्तीय क्षेत्र में कई दशकों से काम कर रहा नाबार्ड अबकी बार एक बड़े फंड प्रस्ताव ७०० करोड़ रुपए का लेकर सामने आया है। नाबार्ड ने सोमवार को कृषि और ग्रामीण केंद्रित स्टार्टअप्स में इक्विटी निवेश के लिए ७०० करोड़ रुपए के एक वेंचर वैâपिटल फंड की घोषणा की। बता दूं कि यह पहली बार है कि इस ग्रामीण विकास बैंक ने खुद का एक वेंचर फंड कोष शुरू किया है, जो कृषि के स्टार्टअप में निवेश करेगा।
नाबार्ड की तरफ से एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि यह फंड नाबार्ड की ही एक सहायक कंपनी नैबवेंचर द्वारा लॉन्च किया गया है और अभी इसके पास ५०० करोड़ रुपए का प्रस्तावित कोष है, जिसे आगे अतिरिक्त पूंजी प्रवाह द्वारा २०० करोड़ रुपए से और बढ़ाकर ७०० करोड़ रुपए किया जा सकता है। नाबार्ड ने इस फंड के लिए अपनी एंकर फंड प्रतिबद्धता दी है, जो कृषि, खाद्य और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में लगे स्टार्टअप्स में निवेश करेगी।
नाबार्ड के अध्यक्ष हर्ष कुमार भनवाला ने अपने एक बयान में कहा है कि इस फंड का देश में व्यापक प्रभाव होगा क्योंकि यह कृषि, खाद्य और ग्रामीण आजीविका के मुख्य क्षेत्रों में निवेश पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देगा। बयान में कहा गया है कि इस फंड के लिए नैबवेंचर अब अपने फोकस क्षेत्रों में एसेट-लाइट, नूतन विचार और तकनीक की अगुवाई वाले स्टार्टअप्स में इक्विटी निवेश के लिए स्काउटिंग कर रहा है।
बयान के अनुसार उनका मिशन है ‘ग्रामीण जनता के लिए आजीविका और रोजगार के अवसर निर्माण करने के लिए कृषितर क्षेत्र हेतु उत्पाद, प्रणालियां और नीतियां तैयार करना।
अब तक नाबार्ड ने १६ वैकल्पिक निवेश कोष में २७३ करोड़ रुपए का योगदान दिया है। ग्रामीण युवाओं के बीच उद्यमशीलता की संस्कृति को बढ़ावा देना और उन्हें ग्रामीण क्षेत्र के अलावा कृषि क्षेत्र में उद्यम शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करना, तीन दशकों से अधिक की अवधि में नाबार्ड की प्रचार पहल में प्राथमिकता से शामिल था। ग्रामीण युवाओं को आवश्यक उद्यमशीलता कौशल प्रदान करने की आवश्यकता को स्वीकार करते हुए ही नाबार्ड ने १९९० में ग्रामीण उद्यमिता विकास कार्यक्रम और कौशल विकास कार्यक्रम की शुरुआत के माध्यम से क्षमता निर्माण के उपायों की शुरुआत की थी।
उद्यमशीलता कौशल के अपनी इस योजना के तहत नाबार्ड ने उद्यम संबंधी आवश्यक कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने की जरूरत को ध्यान में रखते हुए ३१ मार्च २०१८ की स्थिति के अनुसार रु.१२१.४२ करोड़ की अनुदान सहायता के साथ नाबार्ड ने ३२,५२० ग्रामीण उद्यमिता विकास कार्यक्रमों – कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से ८.३७ लाख से अधिक बेरोजगार ग्रामीण युवकों को प्रशिक्षण सहायता प्रदान की।
नाबार्ड ने RUDSETI और RSETI को अनुदान सहायता प्रदान करके ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार के कौशल पहल कार्यक्रमों का भी लगातार समर्थन करता रहा है। कुल मिलाकर नाबार्ड ने १११.७२ करोड़ रुपए की अनुदान सहायता के साथ ३१,०२२ ग्रामीण उद्यमिता विकास कार्यक्रमों – कौशल विकास कार्यक्रमों का समर्थन किया है और ३१ मार्च २०१७ तक लगभग ८.०२ लाख बेरोजगार ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया है।
इसके अलावा माइक्रो एंटरप्राइज डेवलपमेंट प्रोग्राम (एमईडीपी) के माध्यम से एसएचजी सदस्यों के कौशल को उन्नत करने के लिए नाबार्ड ने ३१ मार्च २०१७ तक १५५५२ माइक्रो एंटरप्राइज डेवलपमेंट प्रोग्राम के माध्यम से ४.४० लाख एसएचजी सदस्यों को तब तक प्रशिक्षित किया है। भारत सरकार, राष्ट्रीय और राज्य कौशल विकास मिशनों के साथ अपनी वर्तमान कौशल पहलों को व्यापक आधार देने के लिए, नाबार्ड ने गैर सरकारी संगठनों, राष्ट्रीय कौशल विकास योजना के तहत प्रशिक्षण साझेदारों, सेक्टर स्किल काउंसिल, सरकारी एजेंसियों और कॉरपोरेट्स को भी शामिल किया है, जो नाबार्ड के चैनल पार्टनर के रूप में ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण देने में शामिल हैं। नैबस्कील पोर्टल, नाबार्ड द्वारा प्रशिक्षण से संबंधित आंकड़े अर्थात प्रशिक्षुओं की प्रोफाइल, प्रशिक्षण कार्यक्रम विवरण, पोस्ट प्रशिक्षण निपटान दर आदि के विवरणों को रखने के लिए एक नई पहल है। इस पोर्टल के माध्यम से, प्रशिक्षण संस्थान नाबार्ड से वित्तीय सहायता के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। डेटाबेस बनाने और विभिन्न कार्यक्रमों की बारीकी से निगरानी करने में मदद करने के अलावा, यह पोर्टल नाबार्ड को ग्रामीण युवाओं को दिए जानेवाले प्रशिक्षण के जमीनी स्तर के प्रभाव का आकलन करने और उसी के आधार पर उसकी नीतियों को ठीक करने में सक्षम बनाती है।
पिछले तीन दशकों में नाबार्ड ने ग्रामीण ऑफ-फार्म सेक्टर के विकास के लिए कई पुनर्वित्त और प्रचार योजनाएं तैयार की हैं और क्षेत्र स्तर की जरूरतों के जवाब में उन्हें व्यापक आधार देने और उन्हें परिष्कृत करने के लिए निरंतर प्रयास किया है। इस क्षेत्र पर अधिक से अधिक ऋणप्रवाह पर ध्यान केंद्रित किया गया है, ग्रामीण क्षेत्रों में लघु, कुटीर और ग्रामीण उद्योगों, हथकरघा, हस्तशिल्प और अन्य शिल्प के लिए अप्रकाशित और सुनिश्चित लिंकेज के लिए ऋण का प्रावधान किया गया है।
ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के बीच उद्यमशीलता की संस्कृति और आवश्यक कौशल का निर्माण करना ग्रामीण क्षेत्र के कृषि क्षेत्र के लिए विकासशील बाजारों के साथ-साथ नाबार्ड के लिए एक प्राथमिकता वाला क्षेत्र रहा है। १२ जुलाई १९८२ को आरबीआई के कृषि ऋण कार्यों और तत्कालीन कृषि पुनर्वित्त और विकास निगम के पुनर्वित्त कार्यों को हस्तांतरित कर नाबार्ड अस्तित्व में आया। इसकी स्थापना १०० करोड़ रुपए की प्रारंभिक पूंजी के साथ हुई और आज इसकी पूंजी ३१ मार्च २०१८ तक १०,५८० करोड़ रुपए है। यह आज ग्रामीण समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए देश के विकास बैंक के रूप में है। यह समृद्धि हासिल करने के लिए सहभागी वित्तीय और गैर-वित्तीय हस्तक्षेप, नवाचारों, प्रौद्योगिकी और संस्थागत विकास के माध्यम से स्थायी और समान कृषि और ग्रामीण विकास को बढ़ावा दे रहा है और वहां पहुंच रहा है, जहां अन्य बैंक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
नाबार्ड की पहल विशिष्ट लक्ष्य एक सशक्त और वित्तीय रूप से समावेशी ग्रामीण भारत के निर्माण के उद्देश्य से है, जिसे मोटे तौर पर तीन प्रमुखों में वर्गीकृत किया जा सकता है। वित्तीय, विकास और पर्यवेक्षण। इन पहलों के माध्यम से यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लगभग हर पहलू को छूता है। ग्रामीण बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए पुनर्वित्त सहायता प्रदान करने से इन लक्ष्यों को प्राप्त करने में बैंकिंग उद्योग को मार्गदर्शन और प्रेरित करने के लिए जिला स्तरीय क्रेडिट योजना तैयार करने से लेकर सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) की निगरानी करने, उन्हें सीबीएस प्लेटफॉर्म तक मजबूत बैंकिंग व्यवहार को विकसित करने और उनकी मदद करने के लिए नई विकास योजनाओं के डिजाइन से लेकर भारत सरकार की विकास योजनाओं के कार्यान्वयन तक बेचने के लिए, हस्तकला कारीगरों को प्रशिक्षण देने से लेकर उन्हें विपणन मंच प्रदान करने तक। इन वर्षों में नाबार्ड ने देशभर में लाखों ग्रामीण जीवन को छुआ है। नाबार्ड द्वारा १९९२ में शुरू की गई एसएचजी बैंक लिंकेज परियोजना दुनिया की सबसे बड़ी माइक्रो फाइनेंस परियोजना के रूप में विकसित हुई है। नाबार्ड द्वारा डिजाइन किया गया किसान क्रेडिट कार्ड करोड़ों किसानों के लिए आज आसान वित्तीय स्रोत है। इसने भारत के कुल ग्रामीण बुनियादी ढांचे के पांचवें हिस्से को वित्तपोषित किया है।