" /> अब होगा कोरोना का कत्ल! विश्व की 76 कंपनियां बना रही हैं काट

अब होगा कोरोना का कत्ल! विश्व की 76 कंपनियां बना रही हैं काट

-30 देसी कंपनियों ने भी तानी आस्तीनें

*अमेरिका और चीन की 4 कंपनियां सबसे आगे
*हावर्ड यूनिवर्सिटी भी बना रही है वैक्सीन
*WHO ने भारतीय कम्पनियों को सराहा

वुहान से निकले खतरनाक कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में कोहराम मचा रखा है। अमेरिका के जॉन हॉपकिंस इंस्टिट्यूट के अनुसार अभी तक दुनिया में 37 लाख लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। इनमें से 12 लाख लोग ठीक भी हो चुके हैं, जबकि 2 लाख 63 हजार लोगों की मौत हो चुकी है। लेकिन अब जल्द ही कोरोना की खैर नहीं। दुनिया की 76 प्रमुख फार्मा कंपनियां कोरोना की दवाएं और वैक्सीन तैयार कर रही हैं। इन कंपनियों द्वारा तैयार की गई दवाएं और वैक्सीन कोरोना का कत्ल कर डालेंगी। इनमें भारत की दवा कंपनियां भी शामिल हैं। ये कंपनियां भी कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने के क्षेत्र में रिसर्च कर रही हैं। खबर है कि इनमें से कुछ कंपनी ट्रायल फेज के नजदीक पहुंच चुकी हैं।
कोरोना की वैक्सीन बनाने में जुटी कंपनियों में 5 कंपनी ऐसी हैं, जो ट्रायल के पहले फेज में हैं या पहला पेज पूरा कर दूसरे फेज के ट्रायल की तैयारी कर रही हैं। इनमें दो कंपनी अमेरिका की, दो चीन और एक कंपनी ब्रिटेन की है। इसके अलावा 2 दिन पहले इसराइल ने भी दावा किया है कि उसने कोरोना के एंटीबॉडीज को बनाने में सफलता प्राप्त कर ली है और जल्द ही वह यह दवा बाजार में लाने जा रहा है। बहरहाल, चीन की ‘कैनसिनो बायोलॉजिक्स’ ने वायरल वेक्टर Ad5_nCov वैक्सीन बनाया है। यह कोरोना वायरस के स्पाइक प्रोटीन सरीखे सामान्य एडिनोवायरस के मोडिफाइड वर्जन के साथ प्रयोग कर रहा है। यह बॉडी को ऐसे स्पाइक खोजने और उन्हें कोरोना वायरस से सेल को इनफेक्ट करने से रोकेगा। यह वैक्सीन रिसर्च में सबसे आगे है और और फेज टू का ट्रायल चल रहा है। हालांकि इसके साइड इफेक्ट के बारे में अभी पता नहीं है। दूसरे नंबर पर है अमेरिका की मॉडेरना थेराप्यूटिक्स। इस कंपनी ने mRNA वैक्सीन डिवेलप किया है। यह कोरोना वायरस के जेनेटिक मैटेरियल से डिवेलप किया गया है जो बॉडी में इम्यून सिस्टम डिवेलप करेगा। इसके पहले फेज का ट्रायल हो चुका है और दूसरे व तीसरे का ट्रायल बाकी है। मॉडेरना ने स्विस कंपनी लॉन्जा ग्रुप के साथ 100 करोड़ वैक्सीन बनाने का करार किया है। तीसरे नंबर पर पेंसिलवेनिया (अमेरिका) की इनोवियो फार्मास्युटिकल्स है। इसने डीएनए बेस्ड वैक्सीन का निर्माण किया है जो वायरस के जेनेटिक मैटेरियल को सेल में डालता है और इससे लड़ने के लिए शरीर में एंटीबॉडी के प्रोडक्शन को बढ़ाता है। अप्रैल में इसके फेज वन का ट्रायल शुरू हुआ है। अगले महीने फेज टू शुरू होगा और 7 साल के आखिर तक लाखों डोज बनाने की योजना है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी अपने chAdOx1 वैक्सीन का फेज वन में 500 लोगों पर ट्रायल कर चुकी है। यह मोडिफाइड एंडेनोवायरस को कोरोना के जेनेटिक मैटेरियल के साथ बॉडी में भेजती है ताकि इम्युन तैयार हो सके। पांचवे नंबर पर चाइना के सीनोवैक बायोटेक का पिकोवैक वैक्सीन है। फेज वन में 144 लोगों पर इसका ट्रायल हो चुका है। फेज टू में 744 लोगों पर इसका ट्रायल किया जाना है। जानवरों पर इसका प्रयोग 100 फीसदी सफल रहा है लेकिन इंसानों पर इसका रिजल्ट आना अभी बाकी है। मेडिकल क्षेत्र के जानकारों के अनुसार इन सभी वैक्सीन के प्रोडक्शन को बाजार में आने में अभी 12 से 18 महीने का वक्त लग सकता है।

भारत की अग्रणी भूमिका
मेडिकल क्षेत्र में भारत इस समय दुनिया को लीड कर रहा है। यहां इस समय चीन के बाद सबसे ज्यादा दवाएं बनती हैं। जेनेरिक दवाओं के निर्माण में भारत 50% से ज्यादा दवा बना रहा है। भारत में इस समय 30 कंपनियां वैक्सीन के रिसर्च और निर्माण में लगी हुई हैं। ये वैक्सीन विकास के विभिन्न चरणों में हैं। कुछ वैक्सीन ट्रायल स्टेज में भी पहुंच गई हैं। इनमें मुंबई, पुणे, हैदराबाद, अमदाबाद और दिल्ली की कई कंपनियां शामिल हैं। डब्ल्यूएचओ ने भी कहा है कि दक्षिण एशिया क्षेत्र में भारत दुनिया के बड़े वैक्सीन निर्माता में एक है और कोविड-19 की महामारी से लड़ने में उसकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण होगी।