" /> अयोध्या पुरी भगवान का मस्तक है!, भक्ति की ईंट भी स्वीकार हो!

अयोध्या पुरी भगवान का मस्तक है!, भक्ति की ईंट भी स्वीकार हो!

भगवान श्रीराम की जन्मभूमि, पतित पावनी अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण का कार्य प्रारंभ हो रहा है, जिसका स्वागत देश का बच्चा-बच्चा कर रहा है और क्यों न करे, भगवान राम आर्यावर्त के कण-कण में विराजमान हैं। मैं भी तन-मन से, रोम-रोम से नतमस्तक हूं। हार्दिक अभिनंदन करता हूं उन सभी का जो इस कार्यक्रम को संपादित कर रहे हैं और जिनके कारण ये संभव हो पाया है। वहां के शासन-प्रशासन सभी के प्रति मैं आभार प्रकट करता हूं। मंदिर निर्माण के लिए पत्थरों पर कारीगरी करनेवाले कलाकारों का, वास्तुशास्त्र के विशेषज्ञों, सभी सुरक्षाकर्मियों का हृदय से वंदन करता हूं, जो अयोध्या की सुरक्षा में दिन-रात जुटे हुए हैं। मेरी भी `श्रद्धा-भक्ति की र्इंट’ भगवान राम के मंदिर निर्माण के लिए भक्तिभाव से समर्पित है और क्यों न हो, मेरा वंश सात पीढ़ियों से भी ज्यादा अयोध्यावासी रहा है। भगवान रामलला के पुरातन मंदिर के टूटने, मस्जिद बनने, फिर मस्जिद टूटने का भी साक्षी रहा है और अब मंदिर के पुनर्निर्माण के दृश्यों का साक्षी होगा।
पिताजी व पितामह के मुख से मुगल साम्राज्य के किस्से व यातनाएं, जन्मभूमि के बारे में हिंदू-मुस्लिम संघर्ष, बचपन में बहुत सुनने को मिलते थे। अंग्रेजों के दमनचक्र की त्रासदी का शिकार अयोध्या के कितने परिवार हुए थे, जिनको सोच कर ही रूह कांप जाती है। खैर, आज जब मंदिर को साकार रूप लेते देखा जा रहा है तो हिंदूहृदयसम्राट शिवसेनाप्रमुख श्री बालासाहेब ठाकरे का वह संबोधन आज भी हमें याद है, जब साहेब इंडिया टीवी के जनता की अदालत कार्यक्रम में रजत शर्मा के प्रश्नों के उत्तर दे रहे थे। शर्मा ने जब उनसे पूछा था कि आप पर आरोप है कि आपके शिवसैनिकों ने बाबरी ढांचे का विध्वंस किया है। इस पर बालासाहेब ठाकरे ने प्रत्युत्तर में कहा था कि यदि मेरे शिवसैनिकों ने यह कार्य किया है तो मुझे अपने शिवसैनिकों पर गर्व है। मुझे याद है मैं बालासाहेब ठाकरे के साथ बैठकर उनका एक चुनावी गीत लिख रहा था। उस गीत में साहेब के निर्देशानुसार मैंने लिखा था-

शेर थे शिवाजी, शेर थे शिवाजी
शिवाजी की शिवसेना
शिवसेना, ये है शिवसेना
सबका दुख लेना और सबको सुख देना
शिवसेना, ये है शिवसेना
एकता और प्रेम का मंदिर है बनाना
राष्ट्र का सभी कलंक है मिटाना! शिवसेना…

एक कथा के अनुसार वैâलाश पर्वत पर भगवान शंकर और देवी पार्वती बैठे थे। प्रभु को प्रसन्न देख जगतजननी माता पार्वती ने पूछा था कि प्रभु भोलेनाथ जी जिन प्रभु राम की माला आप जपते हैं, मैं उनके धाम के बारे में जानना चाहती हूं। कृपा कर बताइए। इस पर महादेव जी ने बताया कि धरती पर संसार की सभी नदियों में श्रेष्ठ नदी सरयू के दक्षिण दिशा का भाग अयोध्या है।

अष्टचक्र नवद्वारा, देवानाम पू अयोध्या।
तस्या हिरण्यमया:कोष, स्वर्गो ज्योतिषावृता:।।

अर्थात आठ चक्र व नव द्वारों से सुशोभित अयोध्या पुरी है। जहां हिरण्यमय कोष है, जो दिव्य ज्योति से प्रकाशित रहता है।
रूद्रायमल ग्रंथ के अनुसार श्रीहरि नारायण के समस्त अंगों का वर्णन करते हुए `सप्तपुरियों’ को ही भगवान का अंग बताया है। अवंतिकापुरी (उज्जैन) भगवान का चरण है। कांचीपुरी भगवान का कोटि भाग है। द्वारिका पुरी नारायण का नाभि भाग है। माया पुरी (हरिद्वार) श्री हरि का हृदय भाग है। मथुरा पुरी नारायण का ग्रीवा भाग है। काशी पुरी भगवान की नासिका है। अयोध्या पुरी भगवान का मस्तक कहलाती है। गोस्वामी तुलसीदास रचित श्रीरामचरित मानस के अनुसार भगवान राम ने भी इसका गुणगान किया है-

यद्यपि सब बैकुंठ बखाना। वेद पुराण विदित जनु जाना।।
अवध सरिसप्रिय मोहिं नसोउ। यह प्रसंग जानै कोऊ कोऊ।।
जन्म भूमि मम पुरी सुहावनि। उत्तर दिसि बह सरजू पावनि।।
अति प्रिय मोहि इहा के बासी। मम धामदा पुरी सुख रासी ।।
उत्तर में लहराती हुई सरयू मइया और उनके घाट, नागेश्वरनाथ जी, तुलसी स्मारक भवन, अयोध्या राज सदन, श्री हनुमान गढ़ी, श्री कनक भवन आदि के साथ पुन: भक्तजन श्री रामलला का दर्शन भव्य मंदिर में करेंगे।
आशा है कि अब अवध क्षेत्र का और वहां के लोगों के विकास पर ध्यान दिया जाएगा। अयोध्या को विश्व पर्यटन से जोड़ना भी एक अच्छा कदम साबित हो सकता है। आसपास कुछ बड़े उद्योगों को भी स्थापित किया जाना चाहिए, जिससे वहां के लोग बड़े शहरों का रुख न करें। प्रेम-एकता का श्रीराम मंदिर का शिलान्यास होने जा रहा है। सभी देशवासी हृदय से स्वागत कर रहे हैं। हम सभी रामभक्तों की `श्रद्धा-भक्ति की र्इंटें’ श्री राम जन्मभूमि के शिलान्यास में समर्पित हैं।
जय श्री राम!
(लेखक वरिष्ठ गीतकार,
कवि व अयोध्या के निवासी हैं!)