" /> अलग-अलग फल देते हैं शिव के विभिन्न स्वरूप

अलग-अलग फल देते हैं शिव के विभिन्न स्वरूप

सावन का महीना चल रहा है। सावन मास को भगवान शिव का अतिप्रिय महीना माना जाता है। ऐसे में जगह-जगह शिवपूजन के अलावा रुद्राभिषेक व अन्य आयोजन भी होते हैं। भगवान शिव की पूजा आमतौर पर शिवलिंग के रूप में की जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान शिव की मूर्ति के पूजन का भी अपना एक महत्व है। श्रीलिंग महापुराण में भगवान शिव की विभिन्न मूर्तियों के पूजन के बारे में बताया गया है। पंडित सुनील शर्मा के अनुसार मान्यता है कि अलग-अलग शिव प्रतिमा के स्वरूप के पूजन से अलग-अलग इच्छााओं की पूर्ति होती है।
प्रतिमाओं को लेकर है ये मान्यताएं …
१. कार्तिकेय के साथ भगवान शिव-पार्वती की मूर्ति की पूजा करने से मनुष्य की सभी कामनाएं पूरी हो जाती हैं। मनुष्य को सुख-सुविधा की सभी वस्तुएं प्राप्त होती हैं और सुख मिलता है।
२. जिस मूर्ति में भगवान शिव एक पैर, चार हाथ और तीन नेत्रों वाले और हाथ में त्रिशूल लिए हुए हों, जिनके उत्तर दिशा की ओर भगवान विष्णु और दक्षिण दिशा की ओर भगवान ब्रह्मा की मूर्ति हो। ऐसी मूर्ति की पूजा करने से मनुष्य सभी बीमारियों से मुक्त रहता है और उसे अच्छी सेहत मिलती है।
३. भगवान शिव की तीन पैरों, सात हाथों और दो सिरों वाली मूर्ति जिसमें भगवान शिव अग्निस्वरूप में हों, ऐसी मूर्ति की पूजा-अर्चना करने से मनुष्य को अन्न की प्राप्ति होती है।
४. जो मनुष्य माता पार्वती और भगवान शिव की बैल पर बैठी हुई मूर्ति की पूजा करता है, उसकी संतान पाने की इच्छा पूरी होती है।
५. भगवान शिव की अर्द्धनारीश्वर मूर्ति की पूजा करने से अच्छी पत्नी और सुखी वैवाहिक जीवन की प्राप्ति होती है।
६. जो मनुष्य भगवान शिव की उपदेश देनेवाली स्थिति में बैठे शिव मूर्ति की पूजा करता है, उसे विद्या और ज्ञान की प्राप्ति होती है।
७. नंदी और माता पार्वती के साथ सभी गणों से घिरे हुए भगवान शिव की ऐसी मूर्ति की पूजा करने से मनुष्य को मान-सम्मान की प्राप्ति होती है।
८. माता पार्वती सहित नृत्य करते हुए, हजारों भुजाओं वाली भगवान शिव की मूर्ति की पूजा करने से मनुष्य जीवन के सभी सुखों का लाभ लेता है।
९. चार हाथों और तीन नेत्रों वाली, गले में सांप और हाथ में कपाल धारण किए हुए, भगवान शिव की सफेद रंग की मूर्ति की पूजा करने से धन-संपत्ति की प्राप्ति होती है।
१०. काले रंग की, लाल रंग के तीन नेत्रों वाली, चंद्रमा को गले में आभूषण की तरह धारण किए हुए, हाथ में गदा और कपाल लिए हुए शिव मूर्ति की पूजा करने से मनुष्य की सभी परेशानियां खत्म हो जाती हैं। रुके हुए काम पूरे हो जाते हैं।
११. ध्यान की स्थिति में बैठे हुए, शरीर पर भस्म लगाए हुए भगवान शिव की मूर्ति की पूजा करने से मनुष्य के सभी दोषों का नाश होता है।
१२. दैत्य जलंधर का विनाश करते हुए, सुदर्शन चक्र धारण किए भगवान शिव की मूर्ति की पूजा करने से शत्रुओं का भय खत्म होता है।
१३. जटा में गंगा और सिर पर चंद्रमा को धारण किए हुए, बार्इं ओर गोद में माता पार्वती को बैठाए हुए और पुत्र कार्तिकेय और गणेश के साथ स्थित भगवान शिव की ऐसी मूर्ति की पूजा करने से घर-परिवार के झगड़े खत्म होते हैं और घर में सुख-शांति का वातावरण बनता है।
१४. हाथ में धनुष-बाण लिए हुए, रथ पर बैठे हुए भगवान शिव की पूजा करने से मनुष्य को जाने-अनजाने किए गए पापों से मुक्ति मिलती है।
१५. जिस मूर्ति में भगवान शिव दैत्य निकुंभ की पीठ पर बैठे हुए, दाएं पैर को उसकी पीठ पर रखे और जिनके बार्इं ओर पार्वती हों, ऐसी मूर्ति की पूजा करने से शत्रुओं पर विजय मिलती है।