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अविरत मदद का हाथ बढ़ा रही है लालपरी : 5 लाख यात्रियों ने की यात्रा

152 लाख किमी दौड़ी
104 करोड़ रुपए खर्च

कोरोना वायरस के प्रकोप के बाद लॉकडाउन के दौरान, उत्तर भारतीय नागरिक अपने गृह राज्य में वापस जाना चाहते थे। उन्हें सुविधा देने के लिए, राज्य सड़क परिवहन निगम की बसें, रेलवे की तरह, राज्य के आसपास की सीमाओं पर भी चलती थीं। कुल 44 हजार 106 बस फेरियों के माध्यम से 5 लाख 33 हजार 593 प्रवासियों को रेलवे स्टेशन के साथ-साथ राज्य की सीमा तक ले जाया गया। 31 मई तक चले इस अभियान में एसटी बसों ने करीब 152.42 लाख किमी की यात्रा की। इसके लिए एसटी मंडल ने बसें उपलब्ध कराकर दीं। ताकि उत्तर भारतीय नागरिक अपने राज्य में सुरक्षित रूप से लौट सकें। एसटी मंडल के कर्मचारियों ने नागरिकों को सुरक्षित रूप से उनके राज्य की सीमाओं तक पहुंचाया और इसके लिए राज्य सरकार ने 104.89 करोड़ रुपए खर्च किए। संभाजीनगर, मुंबई, नागपुर, पुणे, नासिक, अमरावती ऐसे छह शहरों के उत्तर भारतीय नागरिकों को उनके राज्य की सीमा तक जाने के लिए रेलवे स्टेशन तक पहुंचाने के लिए एसटी मंडल ने बस की सुविधा उपलब्ध कराकर दी।

दो लाख से अधिक लोगों को रेलवे स्टेशन पर पहुंचाया
उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओड़िसा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और आसाम, राजस्थान, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, हिमाचलप्रदेश, पंजाब, तमिलनाडू ऐसे विभिन्न राज्यों के रेलवे से जानेवाले मजदूरों को रेलवे स्टेशन तक छोड़ने का काम एसटी महामंडल की बसों ने किया। 2 लाख 28 हजार 100 नागरिकों ने बस की सुविधा का लाभ उठाया। इसी प्रकार 3 लाख से अधिक मजदूरों को गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, कर्नाटक राज्य की सीमा तक एसटी बसों ने मजदूरों को छोड़ा। इस सुविधा का 3 लाख 9 हजार 493 नागरिकों ने लाभ उठाया।
संभाजीनगर विभाग के संभाजीनगर, बीड, जालना, लातूर, नांदेड, धाराशिव, परभणी को बस उपलब्ध करवाकर दिया गया। इसी प्रकार मुंबई विभाग के मुंबई, पालघर, रायगड, रत्नागिरी, सिंधुदूर्ग, ठाणे, नागपुर विभाग में भंडारा, चंद्रपुर, गडचिरोली, नागपुर, वर्धा, पुणे विभाग में कोल्हापुर, पुणे, सांगली, सातारा, सोलापुर, नाशिक विभाग में नगर, धुले, जलगांव, नासिक, अमरावती विभाग में अमरावती, अकोला, बुलढाणा और यवतमाल में बसें उपलब्ध करवाकर दी गईं