अवॉर्ड पे अवॉर्ड!

बॉलीवुड में दो तरह की फिल्में बनती हैं। एक होती हैं मसाला फिल्में और दूसरी हैं अवॉर्ड श्रेणी की फिल्में। अवॉर्ड श्रेणी फिल्मों में गंभीर या कुछ हटकर विषयों को उठाया जाता है। ऐसी ही एक फिल्म है ‘अंतर्व्यथा’। यह फिल्म रिलीज के पूर्व अभी तक १४ फिल्म महोत्सवों में जा चुकी है और कुल मिलाकर ८ अवार्ड्स बटोर चुकी है, जिसमें बेस्ट डेब्यू फिल्म मेकर, बेस्ट डायरेक्टर, बेस्ट एक्टर जैसे अवार्ड शामिल हैं। फिल्म में हेमंत पांडेय, कुलदीप सरीन, गुलशन पांडेय, अनुराधा खैरा, वीना चौधरी जैसे कलाकार हैं और केशव आर्य ने भी इसमें अदाकारी की है। हर आदमी की एक अंतर्व्यथा होती है, और फिल्म इसी वन लाइनर पर आधारित है। हम बचपन में अक्सर झूठ बोल देते हैं लेकिन मन में यह लगा रहता है कि हमने झूठ बोला है और सारी उम्र इंसान उस झूठ बोलने की गलती को महसूस करता रहता है। अपनी गलतियों को तो इंसान दूसरे लोगों से छुपा सकता है लेकिन वह उसे अपने आप से नहीं छुपा पाता। दूसरे शब्दों में कहें तो जब आप कोई गलती करते हैं तो आपका जमीर उसे झिंझोड़ता रहता है। अब मन के भीतर जो ये सही-गलत का मंथन चलता रहता है, यही अंतर्व्यथा है। अब ऐसे गंभीर विषय पर बनी फिल्म से आम दर्शक कितना जुड़ाव महसूस करेगा, यह तो इसी महीने फिल्म रिलीज होने के बाद पता चलेगा!