" /> आइसोलेशन कोच बनेगी श्रमिक स्पेशल : 60 प्रतिशत डिब्बों में होगा बदलाव

आइसोलेशन कोच बनेगी श्रमिक स्पेशल : 60 प्रतिशत डिब्बों में होगा बदलाव

कोरोना संक्रमितों के बढ़ते मामलों को देखते हुए रेलवे ने ट्रेन के कोच को आइसोलेशन कोच में तब्दील किया था लेकिन रेलवे बोर्ड ने 5,000 से अधिक आइसोलेशन कोच में से 60% कोच को दोबारा सामान्य यात्री कोच में बदलने का निर्णय लिया है। इन रेल कोचों को बदलकर इसे श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के रूप में चलाया जाएगा।
जानकारी के मुताबिक सामान्य रेल कोच को क्वारन्टीन सेंटर में बदलने के लिए हर कोच के टॉयलेट को हटाकर वहां बाथरूम बनाया गया है। बीच की सीटें निकाल दी गई हैं। हर कंपार्टमेंट में पारदर्शी पर्दे लगाए गए हैं। इन सब बदलावों को अब फिर से पहले जैसा करना होगा। रेलवे बोर्ड के आदेश के अनुसार उपलब्ध आइसोलेशन कोच का 60% कोच लेने पर करीब 3,000 कोच श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के लिए उपलब्ध होंगे। एक पूरी क्षमतावाली श्रमिक स्पेशल में 24 कोच लगते हैं। इस लिहाज से कुल 125 नई श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई जा सकेंगी। इस तरह ट्रेन स्टाफ के अलावा इन कोचों की मदद से 2,12,500 अतिरिक्त मजदूरों को उनके गृह राज्य पहुंचाया जा सकेगा।

एक भी आइसोलेशन कोच का इस्तेमाल नहीं हुआ है

रेलवे ने फरवरी-मार्च में नॉन एसी रेल कोच को आइसोलेशन वॉर्ड में बदलने का काम तेजी से किया था। लक्ष्य था कोविड-19 के मरीजों के लिए 20,000 रेल कोच को आइसोलेशन वॉर्ड में बदलना ताकि हॉस्पिटल ऑन व्हील्स तैयार हो सकें, लेकिन जल्द ही ये अनुभव हुआ कि स्वास्थ्य विभाग इन आइसोलेशन वॉर्ड में मरीजों को नहीं रखना चाहता क्योंकि रेल कोच में बने ये वॉर्ड बेहद गर्म हैं और सिर्फ गर्मी का मौसम खत्म होने व अत्यधिक आवश्यकता होने पर ही मरीजों को इसमें रखा जा सकता है। इसीलिए रेलवे ने 25% लक्ष्य पूरा करने के बाद ही इस काम को ये कहते हुए बंद कर दिया था कि मांग होने पर और आइसोलेशन बनाने का काम किया जाएगा, पर अब तक एक भी रेल कोच आइसोलेशन की मांग नहीं आई। लिहाजा अब रेलवे बोर्ड चाहता है कि खाली पड़े ये कोच फिर से पटरी पर लाए जाएं।

₹10 करोड़ हुए खर्च

3,000 सामान्य कोचों को आइसोलेशन वॉर्ड में बदलने के लिए करीब 10 करोड़ रुपए का खर्च आया था। अब इसे वापस सामान्य कोच में बदलने में भी रेलवे को लगभग इतना ही खर्च करना होगा। रेलवे का कहना है कि आइसोलेशन बनाने में कोई जल्दबाजी नहीं की गई बल्कि कोरोना से निपटने में हमारा रेस्पांस टाइम अच्छा था। सरकार और जनता के सामूहिक प्रयास से अच्छा हुआ कि इन आइसोलेशन कोचों के इस्तेमाल की नौबत अब तक नहीं आई है।