" /> आपदकाल के दाग!

आपदकाल के दाग!

जांच के दायरे में उन बड़े अफसरों को भी आना चाहिए जो लगातार कोरोना किटों की खरीद को लेकर जिलों में व संबंधित विभागों को आदेश निर्देश भेज रहे थे। सरकार की ओर से बीती २४ जुलाई को भेजे गए गए एक पत्र का हवाला देकर कहा जा रहा है कि उसने सभी नगर निकायों को २८०० रुपए में कोरोना किट खरीदने की सलाह दी थी। हालांकि उक्त पत्र में ग्राम पंचायतों के लिए इस तरह का कोई निर्देश नहीं है। न ही उन्हें इस आशय का कोई पत्र भेजा गया है। इतना ही नहीं, जून में भी जब प्रदेश सरकार ने कोरोना किट के तहत पल्स ऑक्सीमीटर, थर्मल स्कैनर आदि खरीद कर गांवों में काम करने वाली आशा बहुओं को देने का आदेश जारी किया, तब भी इसकी कोई तय कीमत नहीं बतायी गई। नतीजन हर जिले में अपनी सुविधानुसार मनमाने दामों पर खरीद कर ली गई।

क्या अफसरशाही पर अत्यधिक भरोसा और निर्भरता उत्तर प्रदेश के कड़क, ईमानदार और परिश्रमी मुख्यमंत्री के रूप में स्थापित योगी आदित्यनाथ की छवि के लिए प्रतिकूल प्रभाव पैदा कर रहा है? फिलहाल सूबे के ताजा हालात पर यह सवाल आम चर्चा में है। कोरोना का अब तक के आपदाकाल से मोर्चा लेने में मुख्यमंत्री योगी ने अफसरों के साथ ही मुख्यरूप से समस्त रणनीति तैयार की और उसका क्रियान्वयन किया। सब जानते हैं कि चुनिंदा आईएएस अफसरों की टीम-११ के हवाले ही इस आपदा से लड़ने के काम को अंजाम दिया गया ।
सवाल यही उठ रहे हैं कि जब मुख्यमंत्री अफसरों पर इतना भरोसा जता रहे हैं तो यह अफसरशाही जवाब में उन्हें क्या दे रही है? पिछले दिनों कोरोना से लड़ाई के लिए पीपीई किट सहित अन्य खरीदों में जिस तरह जिले-जिले से घोटाले सामने आ रहे हैं तो यह चर्चा आम होना स्वाभाविक है कि अफसरशाही आखिर इस तरह की बेईमानी को रोकने में नाकाम क्यों रही?
सरकार लाख सफाई दे और एसआईटी कुछ भी जांच करे लेकिन अब यह धारणा आम हो गई है कि उत्तर प्रदेश में कोविड संकट के इस दौर में आपदा को ही अवसर बना बैठे अधिकारियों ने जम कर लूट की। खुद सत्तापक्ष के विधायकों व नेताओं की ओर से हर जिले में यह मामला उठाने के बाद योगी सरकार ने अब महज दो कनिष्ठ अफसरों को निलंबित कर एसआईटी की जांच के आदेश दिए हैं और सवालों के घेरे में आए जिलाधिकारियों को केवल ट्रांसफर किया है। अब इसे सरकार का भ्रष्टाचार पर प्रहार कह कर प्रचारित किया जा रहा जबकि जांच के दायरे में उन बड़े अफसरों को भी आना चाहिए जो लगातार कोरोना किटों की खरीद को लेकर जिलों में व संबंधित विभागों को आदेश निर्देश भेज रहे थे। सरकार की ओर से बीती २४ जुलाई को भेजे गए गए एक पत्र का हवाला देकर कहा जा रहा है कि उसने सभी नगर निकायों को २८०० रुपए में कोरोना किट खरीदने की सलाह दी थी। हालांकि उक्त पत्र में ग्राम पंचायतों के लिए इस तरह का कोई निर्देश नहीं है। न ही उन्हें इस आशय का कोई पत्र भेजा गया है। इतना ही नहीं, जून में भी जब प्रदेश सरकार ने कोरोना किट के तहत पल्स ऑक्सीमीटर, थर्मल स्कैनर आदि खरीद कर गांवों में काम करने वाली आशा बहुओं को देने का आदेश जारी किया, तब भी इसकी कोई तय कीमत नहीं बतायी गई। नतीजन हर जिले में अपनी सुविधानुसार मनमाने दामों पर खरीद कर ली गई।
यह सब भी तब हुआ है जब प्रदेश के मुख्य सचिव आरके तिवारी ने इसी १९ जून को सभी अधिकारियों को एक पत्र भेज कर समस्त शासकीय खरीद जेम पोर्टल के जरिए करने के आदेश दिए थे। संबंधित सामाग्री के जेम पोर्टल पर उपलब्ध न होने की दशा में ई-टेंडर से खरीदने को कहा गया था। उत्तर प्रदेश सरकार के पंचायती राज विभाग के मुखिया ने २३ जून को एक पत्र भेज कर ग्राम पंचायत स्तर पर कोरोना किट (पल्स ऑक्सीमीटर और थर्मल स्कैनर) खरीद कर आशा कार्यकर्ताओं को देने के निर्देश भेजे गए थे। इस आदेश में कहीं इस बात का जिक्र नहीं था कि खरीद किस दर पर की जाएगी। यह पत्र सभी जिलाधिकारियों व जिला पंचायती राज अधिकारियों को भेजा गया था। हालांकि इसके बाद बीती २४ जुलाई को पंचायती राज विभाग के प्रमुख मनोज कुमार ने नगर विकास विभाग को पत्र लिखकर शहरी निकायों में पल्स ऑक्सीमीटर व थर्मल स्कैनर की खरीद २८०० रुपए में करने को कहा गया और इस संदर्भ में अलीगढ़ में हुई खरीद का उदाहरण देते हुए वहां के मुख्य विकास अधिकारी से संपर्क करने को कहा गया। जब तक यह पत्र जिलों में पहुंचता कोरोना किट की आधे से ज्यादा खरीद हो चुकी थी और ग्राम पंचायतों को लिए तो इस तरह का कोई स्पष्ट निर्देश तक नहीं दिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदर्श वाक्य आपदा में अवसर को सबसे सही तरीके से उत्तर प्रदेश के अफसरों नें अपनी कार्यशैली में उतारा है। जेम पोर्टल या ई टेंडर के निर्देशों को दरकिनार कर गांवों में मनमर्जी की एजेंसी से खरीद कर ली गई। प्रदेश के दर्जनों जिलों से कोरोना किट की गांव गांव में की गयी खरीद में धांधली की खबरें सत्तापक्ष के विधायक और विपक्ष भी उठा रहा है।
जनता की राय से बनेगा
कांग्रेसी घोषणापत्र
उत्तर प्रदेश के सियासी समर में सड़कों पर सबसे ज्यादा दिख रही कंग्रेस इस बार विधानसभा चुनावों के लिए घोषणा पत्र तैयार करने से पहले दस लाख लोगों से राय मशविरा करेगी। इतना ही नहीं पार्टी विधानसभा चुनावों के छह महीने पहले ही अपना घोषणा पत्र पेश कर देगी। घोषणा पत्र तैयार करने के लिए कवायद इस साल जनवरी से ही शुरु कर दी गई थी। इसके तहत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कानपुर में चार दर्जन से ज्यादा जन संगठनों के लोगों से मुलाकात व चर्चा कर उनकी अपेक्षाएं जानी थी। यूपी कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि इस बार चुनाव घोषणा पत्र पार्टी के वादे, दावे का दस्तावेज न बनाकर जनता की राय व मांग के मुताबिक तैयार किया जाएगा। कांग्रेस के चुनाव घोषणा पत्र को तैयार करने से पहले दस लाख लोगों से उनकी राय, मांग व अपेक्षाएं जानी जाएंगी। जिनमें अलग-अलग आयु वर्ग के, विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि, कामगार, किसान, महिलाएं, वरिष्ठ नागरिक, छात्र एवं युवा, महिलाएं, दिव्यांग, खिलाड़ी, व्यापारी, दिहाड़ी मजदूर, पटरी दुकानदार, पेंशनर, खेत मजदूर और अन्य वर्गों के लोग शामिल होंगे।
पार्टी की तैयारी घोषणा पत्र तैयार करने की पूरी प्रक्रिया के विकेंद्रीकरण की है। इसके तहत किसी कमरे में बैठकर नहीं बल्कि जनता के बीच जमीन पर जाकर स्टेकहोल्डर से बात करने के बाद घोषणा पत्र तैयार किया जाएगा। छह महीने पहले जारी होने वाले घोषणा पत्र में हालांकि इस बात की भी गुंजाइश रखी जाएगी कि एन चुनाव के समय सामने आने वाले किसी महत्वपूर्ण विषय का समस्या को उसमें शामिल किया जा सके। घोषणा पत्र तैयार करने से पहले विचार विमर्श की प्रक्रिया में प्रदेश के सभी जिलों के लोगों को शामिल किया जाएगा और हर जिले में भी हर वग्र के लोगों से संपर्क साधा जाएगा।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस की प्रभारी महासचिव प्रियंका गांधी ने चुनाव घोषणा पत्र को महज वादों का रस्मी दस्तावेज बनाने के बजाय के इसे जन भागीदारी के साथ तैयार किए जाने को कहा है। टीम प्रियंका के एक अहम सदस्य के मुताबिक कांग्रेस का यूपी विधानसभा चुनाव के लिए जारी होने वाला घोषणापत्र महज वादों का पुलिंदा न होकर वचनबद्धता के साथ पेश किया जाने वाला दस्तावेज होगा। सोमवार को ही कांग्रेस ने यूपी के लिए मेनिफेस्टो कमेटी के गठन का एलान किया है। इस चुनाव घोषणा पत्र समिति में पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद, पीएल पुनिया, कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा मोना, पूर्व विधायक विवेक बंसल, सुप्रिया श्रीनेत व अमिताभ दुबे को शामिल किया गया है। जहां यह समिति घोषणा पत्र का प्रारुप तैयार करेगी और उसे अंतिम रुप देगी वहीं बड़ी तादाद में कांग्रेस के कार्यकर्त्ताओं व नेताओं को जनता से विचार विमर्थ करने व उनका अपेक्षाएं जानने के काम में लगाया जाएगा। कांग्रेस का कहना है कि जनवरी से शुरु हुई इस प्रक्रिया में कोरोना संकट व लॉकडाउन के चलते बाधा आई थी पर अब इसे स्वास्थ्य संबंधी प्रतिबंधों व सावधानियों का पालन करते हुए फिर से शुरू किया जा रहा है। पार्टी का मानना है कि यूपी विधानसभा चुनावों के काफी पहले अगले साल अगस्त सितंबर तक घोषणा पत्र तैयार कर जारी कर दिया जाएगा।