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आयोडीन की पूर्ति के लिए आयोडीनयुक्त नमक खाएं

मेरी चाची को गोइटर की तकलीफ ६ वर्षों से है। अंग्रेजी दवाइयां चल रही हैं लेकिन चाची अब देशी दवाई करना चाहती हैं? -देवनारायण, कालाचौकी, मुंबई
आपकी चाची को गोइटर की कौन-सी दवा शुरू है व उनके प्रयोगशालीय रक्त परीक्षण की रिपोर्ट क्या है। यदि इन सब बातों का उल्लेख पत्र में होता तो ज्यादा बेहतर होगा। अंग्रेजी के साथ आयुर्वेद की दवाओं का इस्तेमाल गोइटर में करने से कोई हर्ज नहीं है। गोइटर रोग की उत्पत्ति का प्रमुख कारण है आयोडीन का कम होना। इस रोग के अन्य कारणों में मेह तथा वैâल्शियम की अधिकता, विटामिन ए, बी व फास्फेट की कमतरता है। इनके लक्षणों में स्वरभेद, भ्रम, कंप आदि लक्षण पाए जाते हैं। आयोडीन की पूर्ति करने के लिए आयोडीनयुक्त नमक खाना चाहिए व उपरोक्त कारणों का निराकरण जरूरी है। आजकल बाजार में मिलनेवाला पैकबंद नमक लगभग आयोडीनयुक्त ही रहता है। सेंधव नमक का उपयोग खाने में अब कम हो गया है। लोग केवल उपवास के समय खाते हैं। इस व्याधि में भोजन, खान-पान में परिवर्तन अर्थात संतुलित आहार आवश्यक है। सहिजन व उसके पत्तों की सब्जी काफी उपयोगी है। औषधियों में कांचनार गुगुलु की दो-दो गोलियां तीन बार लें। अरोग्यवर्धनी वटी दो-दो गोली दो बार, उसके साथ पुर्ननवाष्टक क्वाथ ६-६ चम्मच दो बार लें। अनुलोम-विलोम तथा अन्य व्यायाम करें। अनुलोम-विलोम काफी उपयोगी है।

मैं ३१ वर्षीय युवक हूं। मेहनत का काम करता हूं। अभी तक मेरी जानकारी में मुझे कोई बीमारी नहीं हुई है। मैं पूरी तरह से निरोगी हूं। मेरे एक दोस्त ने मुझे स्वस्थ रहने के लिए स्वमूत्रपान करने की सलाह दी। क्या मैं इसका सेवन कर सकता हूं? -भूरेलाल, दिंडोशी, गोरेगांव
स्वमूत्रपान चिकित्सा को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर लोगों के बीच में पेश किया जाता है परंतु स्वमूत्र चिकित्सा को वैद्यकीय जगत में मान्यता नहीं है। फिर भी इस चिकित्सा की चर्चा लोगों के बीच में होती रहती है। आयुर्वेद में मूत्र का उपयोग औषधि के रूप में वर्णित किया है। गाय, बकरी, भेंड़, हाथी, घोड़ा, ऊंट, गदहे आदि जानवरों के मूत्र का उपयोग विविध रोगों की चिकित्सा में वर्णित किया है। इन ८ प्रकार के मूत्रों में गोमूत्र का उपयोग अब भी प्रचलित है। मैं स्वत: चिकित्सा के लिए गोमूत्र का उपदेश देता हूं। बहुत सारी आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण में भी इसका उपयोग किया जाता है। आयुर्वेदानुसार मूत्र शरीर का त्याज्य पदार्थ माना जाता है। अत: जो पदार्थ शरीर त्याज्य करता है उसका सेवन उचित वैâसे हो सकता है। मैं स्वत: इसका समर्थक नहीं हूं। आप स्वत: तय करें कि क्या उचित है और क्या अनुचित।

पिछले ३ वर्षों से मुझे ब्लडप्रेशर की तकलीफ है और मैं दवाइयां नियमित रूप से ले रहा हूं। डॉक्टर ने मुझे सप्ताह में दो बार बीपी व नाड़ी चेक करने को कहा है। क्या मैं ब्लड प्रेशर यंत्र खरीदकर खुद चेक कर सकता हूं। इसके लिए मैं कौन-सा बीपी यंत्र खरीदूं और हां मुझे मलबद्धता रहती है? -गिरीश प्रजापति, नालासोपारा
ब्लड प्रेशर नापने के लिए आजकल बाजार में तीन-चार तरह के ब्लडप्रेशर मापक यंत्र मिलते हैं। सामान्यत: एनिराइड मरक्यूरी (पारे) वाला व डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक यंत्र मिलता है। डायलवाला या मरक्यूरीवाला यंत्र उपयोग करने के लिए आपको ट्रेनिंग की आवश्यकता पड़ेगी। यही यंत्र प्राय: सभी डॉक्टर प्रयोग करते हैं। मरक्यूरीवाले बीपी यंत्र की रीडिंग सही रहती है। परंतु डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक यंत्र का उपयोग कोई भी कर सकता है। इस यंत्र में ब्लडप्रेशर के साथ ही नाड़ी की गति का भी ज्ञान होता है व उसकी रीडिंग भी आती है। अत: आप अपने डॉक्टर की नियमित सलाह व औषधि लेते रहें और मलबद्धता के लिए आप स्वादिष्ट विरेचन चूर्ण एक चम्मच रात में सोते समय लें। पानी ज्यादा पीएं। हरे पत्ते की सब्जियां खाएं। आप रोजाना २० से २५ मिनट पैदल चलें। पैदल चलना अपने आप में एक अच्छा व्यायाम है।

मैं मूत्रदाह से पीड़ित हूं। जांच करवाने पर मेरा शुगर खाली पेट १०२ तथा भोजन के बाद २०० आया है। इसी कारण मैंने च्यवनप्राश खाना बंद कर दिया है। आंवले का मुरब्बा लेनेवाला था उसे भी रोक दिया। मेरी उम्र ७९ वर्ष है और मैं शुद्ध शाकाहारी हूं। कृपया उपचार बताएं?
-सभाजीत मौर्या, कल्याण
आपके लक्षणों और उम्र को देखते हुए आप अपना एचबीएवनसी तथा पीएसए ब्लड टेस्ट कराएं। पेट की सोनोग्राफी कराएं। यदि कोई शुगर की दवा चालू है तो उसे पूर्ववत चालू ही रखें। च्यवनप्राश या आंवले का मुरब्बा न लें। परंतु आंवले का ज्यूस या आंवले का चूर्ण नियमित लें। आंवला वय स्थापक, शरीर की व्याधि प्रतिकार शक्ति बढ़ानेवाला तथा मधुमेह का नाश करनेवाला है। सभी ड्राइप्रâूट आप खा सकते हैं। ताजे फल बिना किसी शंका के निडर होकर खाएं। दूध, घी, दही, छाछ सभी का सेवन करें। बढ़ती उम्र में सप्तधातु का पोषण व शरीर की रुक्षता कम करने के लिए ये सभी आवश्यक खाद्य घटक हैं। आप मधुमेह की चिंता न करें। रोज ५ से ६ किलोमीटर टहलें। प्राथमिक चिकित्सा व औषधि के रूप में आप दो-दो गोली चंद्रप्रभावटी लें।