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आरटीओ से लाइसेंस के लिए फिलहाल करना होगा इंतजार!

परिवहन कार्यालयों से ड्राइविंग लाइसेंस या लर्निंग लाइसेंस लेने के लिए अभी लोगों को कुछ समय तक इंतजार करना पड़ेगा। राज्य के परिवहन विभाग ने फिलहाल इन दोनों श्रेणी की कार्रवाई को रोक दिया है, जबकि क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय के दफ्तरों में 33 प्रतिशत स्टाफ ड्यूटी पर मौजूद है। आरटीओ के दफ्तरों में सरकार की गाइडलाइन के अनुसार सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए काम किया जा रहा है। आरटीओ द्वारा भी रेड जोन और ग्रीन रेड जोन के लिए अलग-अलग गाइडलाइन जारी की गई है।

क्यों नहीं मिलेगा लाइसेन्स?
लर्नर लाइसेंस लेने की प्रक्रिया में संगणीकृत टेस्ट लिए जाते हैं। ये टेस्ट अलग-अलग बैच में होते हैं। लॉकडाउन के चलते ऐसा संभव नहीं है। सूत्रों के अनुसार लॉकडाउन के बाद भी संक्रमण को कुछ समय तक टालने के लिए कुछ गाइडलाइन तय की गई है। इसके अनुसार कुछ समय तक लर्नर लाइसेंस देने की प्रक्रिया बंद रहेगी। पक्का ड्राइविंग लाइसेंस लेने के लिए भी ऐसी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है इसलिए पक्का लाइसेंस भी नहीं दिया जाएगा।

जारी है कामकाज
लॉकडाउन 4.0 में 33 प्रतिशत स्टाफ की उपस्थिति के साथ आरटीओ कार्यालय खोल दिए गए थे। राज्य के कई शहरों में 33 प्रतिशत स्टाफ काम पर हैं लेकिन मुंबई और कुछ शहरों में कंटेन्मेंट और रेड जोन होने के कारण यहां अभी भी आरटीओ कार्यालय सीमित शर्तों में भी काम नहीं कर पा रहे हैं। आरटीओ के एक अधिकारी के अनुसार ड्राइविंग लाइसेंस लेना कोई अतिआवश्यक काम की श्रेणी में नहीं आता है, इसलिए इंतजार किया जा सकता है। इसी कारण फिलहाल नया लर्नर लाइसेंस और ड्राइविंग लाइसेंस मिलना संभव नहीं है। लाइसेंस के अलावा वाहनों का पंजीकरण, वाहनों का फिटनेस टेस्ट और ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण जैसे काम होते हैं। सरकार द्वारा इन सभी कागजों की वैधता जून तक बढ़ा दी गई है।

संक्रमण का खतरा
लर्नर लाइसेंस लेने के लिए आवेदनकर्ता को एक टेस्ट से गुजरना पड़ता है। अलग-अलग बैच में होनेवाले इस टेस्ट में आवेदक को कम्प्यूटर पर टेस्ट देना होता है और सही विकल्प चुनने के लिए कंसोल पर अलग-अलग बटन दबाने पड़ते हैं। दिनभर में सैकड़ों आवेदक मशीन का इस्तेमाल करते हैं। एक अधिकारी ने बताया कि भविष्य में किसी तरह की समस्या न आए इसके लिए कम्प्यूटर को बिना छुए कोई टेस्ट हो सके, ऐसा किया जाना चाहिए। वैसे टेस्ट 15-20 मिनट का ही होता है लेकिन इसके बाद कागजात की प्रक्रिया में 2 घंटे लग जाते हैं। मुंबई के चार आरटीओ में दिनभर में 1000-1200 आवेदनकर्ताओं का टेस्ट होता है। इसके लिए सुबह 6 बजे से ही लाइन लगानी पड़ती है।