आरे के जंगल को हाथ लगाया तो सहन नहीं करेंगे-आदित्य ठाकरे की सख्त चेतावनी

मेट्रो को हमारा बिल्कुल विरोध नहीं है। आरे के कारशेड के लिए बेस्ट के बैकबे या ओशिवरा डिपो अथवा कांजुरमार्ग में जगह का विकल्प है। फिर भी २ हजार ७०० पेड़ काटकर कारशेड के लिए आरे के जंगल की ही जिद किसलिए? आरे में कारशेड का मुंबईकरों का क्यों विरोध है? यह सुनना सरकार का कर्तव्य ही है। आरे का जंगल बचाकर कारशेड का निर्माण कार्य हो नहीं पा रहा है तो मुंबई मेट्रो रेलवे महामंडल की अश्विनी भिडे का तबादला कर उनकी जगह मुंबई से प्रेम करनेवाले अधिकारी को नियुक्ति करो। लेकिन आरे के जंगल को हाथ लगाया तो हम सहन नहीं करेंगे, ऐसी सख्त चेतावनी शिवसेना नेता व युवासेनाप्रमुख आदित्य ठाकरे ने कल पत्रकार परिषद में दी।
मेट्रो-तीन परियोजना के लिए आरे में कारशेड बनाना सुविधाजनक है। कारशेड अन्यत्र हटाया गया तो यह परियोजना पूरी हो नहीं सकती है, ऐसा युक्तिवाद मुंबई मेट्रो रेलवे महामंडल की व्यवस्थापकीय संचालक अश्विनी भिडे ने किया है। २ हजार ७०० पेड़ों को काटकर कारशेड बनाने का लोगों का विरोध था। चार वर्ष तक तुम उस पर कुछ न बोलते हुए २४ हजार करोड़ रुपए की परियोजना के आखिरी क्षण में आरे के सिवाय अन्यत्र कारशेड संभव नहीं, ऐसा कह रही हो? ऐसा सवाल आदित्य ठाकरे ने किया।
पर्यावरण प्रेमी के रूप में पत्रकार परिषद
इस पत्रकार परिषद की शुरुआत में अपनी भूमिका स्पष्ट करते हुए आदित्य ठाकरे ने कहा कि शिवसेना भवन में हुई इस पत्रकार परिषद को राजनीतिक नहीं, एक मुंबईकर व पर्यावरण प्रेमी के रूप में संबोधित कर रहा हूं। आरे के अलावा कारशेड हो नहीं सकता है, ऐसी चर्चा पिछले कई दिनों से शुरू है इसलिए यह पत्रकार परिषद आयोजित की है। इस पत्रकार परिषद में वन्यजीव विशेषज्ञ नयन खनोलकर, राजेश सानप व पर्यावरण प्रेमी झोरु भातेना उपस्थित थे।
मेट्रो का बिल्कुल विरोध नहीं
किसी भी राजनीतिक हेतु के लिए मेट्रो का विरोध नहीं है। मेट्रो हम सभी की है। मेट्रो से मैं स्वयं यात्रा करता हूं। मेट्रो का काम शुरू है। उस जगह पर हमने विरोध नहीं किया। मेट्रो का काम करते समय पानी की पाइपलाइन, बिजली के वायर आदि टूटे परंतु हमने मेट्रो को संभाल कर लिया। परंतु आरे में जंगल नहीं, ऐसी तस्वीर मुंबई मेट्रो रेलवे कॉर्पोरेशन (एमएमआरसीएल) की ओर से दिखाई जा रही है। आरे कॉलोनी में जैव विविधता होने के बावजूद आरे को निशाना क्यों बनाया जा रहा है? ऐसा सवाल भी आदित्य ठाकरे ने किया।