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आर्थिक महाबर्बादी की ओर…

हिंदुस्थान की अर्थव्यवस्था पहले से ही डगमगाई थी अब वो और गिरती जा रही है। कोरोना वायरस की विपदा के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था भी महाबर्बादी की ओर जाती दिखाई दे रही है। तिस पर हमारे देश का मामला ऐसा है कि चीन और अमेरिका के शेयर बाजार में अगर किसी ने छींक या खांस भर दिया तो यहां का शेयर बाजार गड़बड़ा जाता है। अब तो कोरोना के भयानक संक्रमण ने दुनियाभर में हाहाकार मचा दिया है। अर्थव्यवस्था को बल देनेवाला हर घटक या तो कोरोना के डर से दरवाजा बंद करके बैठा है या फिर अतिदक्षता विभाग में मूर्छित पड़ा है। विश्व की अर्थव्यवस्था ‘मास्क’ पहनकर चेहरा छिपाकर बैठी है। इसका प्रभाव सिर्फ अंबानी जैसों को ही नहीं, बल्कि आम लोगों पर पड़नेवाला है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा ‘कोरोना’ को वैश्विक प्रकोप घोषित किए जाने के बाद दुनियाभर के निवेशक हताश हो गए हैं। हिंदुस्थान का शेयर बाजार हमेशा की तरह गिर गया। गुरुवार के दिन एक ही दिन में हिंदुस्थान के निवेशकों ने ११.४२ लाख करोड़ रुपए गंवाए। शेयर बाजार के लुढ़कने के बाद पहले ये देखा जाता है कि अंबानी-अडानी को कितना नुकसान हुआ। इस बारे में जानकारी ये है कि बाजार लुढ़कते ही अंबानी १.१ लाख करोड़ रुपए से गरीब हो गए। उनका रिलायंस का शेयर गत ५२ दिनों के सबसे निचले सूचकांक पर पहुंचा। अंबानी जैसों को ऐसा फटका लगना मतलब हमारे उद्योग जगत को बड़ा फटका लगने जैसा है। अंबानी हिंदुस्थान के उद्योग जगत का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसका परिणाम निवेश और रोजगार आदि पर हो सकता है। रुपए की स्थिति गत ५-६ वर्षों में कभी नहीं सुधरी। ‘कोरोना’ के कारण डॉलर्स की तुलना में रुपया ७४ रुपए पहुंच गया। ये कुछ अच्छा होने का लक्षण नहीं है। गुरुवार को शेयर बाजार लुढ़का तो ११ लाख करोड़ रुपए लेकर डूबा। शेयर बाजार के इतिहास में ये सबसे भयानक पतझड़ है। हमने कई बार जो आम इंसान से संबंधित नहीं है, ऐसी क्लिष्ट भाषा यानी शेयर बाजार और जीडीपी आदि मुद्दों पर अपना विचार प्रकट किया है। जीडीपी बढ़ने या गिरने से आम इंसान के जीवन का क्या संबंध जोड़ते हो? लेकिन कोरोना के कारण अर्थव्यवस्था में जो पतझड़ शुरू हुई है उसमें ये सारे मुद्दे समाहित जरूर हो जाएंगे। उद्योगपतियों के जीवन में कुछ फर्क नहीं पड़ेगा। उनकी घोड़ागाड़ी और हवाई जहाज उड़ते रहेंगे लेकिन गरीबों के चूल्हे बुझ जाएंगे। पर्यटन, होटल उद्योग और हवाई यातायात जैसे उद्योगों की हालत पतली हो गई है। ५३ देशों ने एक-दूसरे के बीच हवाई यात्रा पर रोक लगा दी है। अमेरिका ने यूरोपबंदी घोषित कर दी है। हिंदुस्थान के राष्ट्रीय हवाई अड्डों पर सन्नाटा है। विमान कंपनियों को बड़ा नुकसान हुआ है। पहले से ही कमजोर इस उद्योग से बड़ी संख्या में नौकरियां कम होने का डर है। पर्यटकों का आना बंद है। उद्योग-व्यवसाय के लिए आनेवाले विदेशी भी नहीं आ रहे। पांच सितारा होटल, रोज होनेवाले सरकारी, प्रशासनिक, कार्पोरेट और पारिवारिक ‘इवेंट’ बंद हो गए हैं। इसलिए मुंबई, दिल्ली और बंगलुरु जैसे शहरों के कई पांच सितारा होटलों की कई मंजिलें खाली पड़ी हैं। इस क्षेत्र को भी बड़ा नुकसान हुआ है। ‘फिल्म इंडस्ट्री’ बड़ा उद्योग है। कई बड़ी फिल्मों की शूटिंग रोक दी गई है। स्टूडियो सुनसान हैं और थिएटर अनिश्चितकालीन समय के लिए बंद हैं। इसलिए इस क्षेत्र पर भी आर्थिक संकट छाया है। संक्रमण के डर से लोग बाजार नहीं जा रहे। इससे रीटेल बाजार और मॉल्स की अर्थव्यवस्था डगमगाने लगी है। आम और अन्य फलों के निर्यात पर भी बड़ा विपरीत परिणाम पड़ा है। सरकार ने खाड़ी देशों की हवाई यात्रा पर रोक लगा दी है, जिसके कारण हवाई यात्रा से होनेवाला ८० प्रतिशत आम का निर्यात रुक गया है। सिर्फ कोकण ही नहीं बल्कि देशभर के आम उत्पादक निराश हैं। ऐसा ही कुछ अंगूर, स्ट्रॉबेरी और सेब के बारे में भी होगा। पर्यटन उद्योग को अरबों रुपयों का नुकसान होने की बात सामने आई है। राजस्थान के राजमहल में शुरू होटल उद्योग बेजान पड़े हैं। यह तस्वीर चौंकानेवाली है। हिंदुस्थान की अर्थव्यवस्था नोटबंदी और जीएसटी जैसे हल्के प्रयोगों के कारण कमजोर हो चुकी है। संकट के समय समांतर अर्थव्यवस्था लोगों को जिंदा रखती है। लेकिन मोदी सरकार ने रोग की अपेक्षा इलाज को ही भयंकर बनाकर आम लोगों की अर्थव्यवस्था ही खत्म कर डाली। प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रियों को विदेशी दौरे पर नहीं जाने का निर्देश दिया है। लेकिन प्रधानमंत्री के अब तक के विदेशी दौरे पर खर्च ४५० करोड़ रुपए का बकाया एयर इंडिया को नहीं मिल पाया है। अब इस पर कोरोना का भी फटका बैठा है। कई राज्यों में स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए हैं। इस विपदा का असर शिक्षा के क्षेत्र पर भी पड़ रहा है। कोरोना वायरस की विपदा से कम-से-कम हमारा देश तो अवश्य आर्थिक महाबर्बादी की ओर जाता दिख रहा है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत लुढ़की लेकिन उसका आनंद नहीं लिया जा सकेगा क्योंकि कोरोना के संक्रमण से घर का बाजार ही गिर चुका है। इसका परिणाम ये होगा कि महंगाई बढ़ेगी, नौकरियां खत्म होंगी, उत्पादन घटेगा और क्षेत्रीय बाजार में बिक्री कम होगी। खेतों, सड़कों और बांधों पर मेहनत करनेवाले लोग नहीं मिलेंगे। इस पर क्या और वैâसे उपाय किया जाए इसकी अपेक्षा दिल्ली के दंगे, सीएए, एनपीआर, मध्य प्रदेश की राजनीति और महाराष्ट्र में नए कारनामों का कोयला जलाकर बैठे हैं। कोरोना की विपदा बड़ी है ही लेकिन उसकी अपेक्षा उसके कारण हमारा देश जिस प्रकार से महाबर्बादी की ओर बढ़ रहा है ये ज्यादा खतरनाक है। इसके लिए सबको एक साथ आने की आवश्यकता है। लेकिन हर कोई सिर्फ अपना-अपना ही देख रहा है।