" /> आसमानी आफत!, मौत बनकर गिरी बिजली

आसमानी आफत!, मौत बनकर गिरी बिजली

प्रकृति के सामने हमेशा से मानव बेवश रहा है। उसका जब कहर बरपता है तो उससे बचने की कोई गुंजाइश नहीं होती है। कुछ दिन पहले ही आसमान से बिजली के रूप में आफत आई और कई जिंदगियां खाक हो गर्इं। कोरोना के कारण जीवन-मृत्यु से जूझ रहे बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ के ११२ लोगों को आसमानी बिजली के कारण जीवन से हाथ धोना पड़ा है। इस जानलेवा आसमानी बिजली ने सैकड़ों मवेशियों की भी जान ले ली है। दरअसल हम आसमानी बिजली क्या है, वह कैसे जन्म लेती है, कब, किसको अपनी चपेट में लेती है और इससे बचने के क्या उपाय हैं, के बारे में बहुत कम जानते हैं।
मध्यप्रदेश, बिहार, झारखंड और उत्तरप्रदेश में आकाशीय बिजली गिरने से ११२ लोगों की मौत हो गई। बिहार में बिजली गिरने से सबसे ज्यादा मौतें हुई जबकि यूपी में दर्जनभर लोग, झारखंड में ७ और एमपी के श्योपुर और बुरहानपुर जिले में ५ लोगों की मौत की खबर है।
बिहार में आई आंधी और बारिश के साथ कड़की आसमानी बिजली ने कम से कम २३ जिलों में कहर बरपाया है। इस दौरान बिजली गिरने से कम से कम ८३ लोगों की मौत अकेले बिहार में हो गई जबकि दर्जनों लोग बुरी तरह झुलस गए हैं। गोपालगंज जिले में बारिश के दौरान आकाशीय बिजली गिरने से कम से कम १३ लोगों की मृत्यु हो गई जबकि १५ अन्य व्यक्ति झुलस गए। जिलाधिकारी अरशद अजीज ने बताया कि मृतकों और झुलसे लोगों में अधिकांश किसान हैं, जो धान की रोपाई के लिए अपने खेतों में जाने के लिए निकले थे। मृतकों में चार महिला और ११ किसान शामिल हैं। दरभंगा जिले में अलग-अलग स्थानों पर बिजली गिरने से दो महिलाओं समेत पांच लोगों की मौत हो गई जबकि दो महिलाएं झुलस गई हैं।
उचठी गांव में खेत में काम करने के दौरान वज्रपात की चपेट में आकर चित्रलेखा देवी की घटनास्थल पर ही मौत हो गई जबकि दो अन्य महिलाएं झुलस गयीं, जिन्हें इलाज के लिए स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया है। वहीं हनुमान नगर प्रखंड के अशोक पेपर मिल थाना क्षेत्र अंतर्गत सिनुआरा गांव में वज्रपात की चपेट में आकर १३ वर्षीय मिथुन कुमार पासवान एवं १४ वर्षीय रामप्रवेश पासवान की मौत हो गई है। वज्रपात की चपेट में आकर बहादुरपुर अंचल के सोनकी थाना अंतर्गत बिरनिया गांव में १५ वर्षीय अमृता कुमारी एवं बहेरी थाना अंतर्गत सुसारी गांव में ५० वर्षीय रशीद सदा की मौत हो गई है।
इसी तरह नवादा में आठ, सिवान में चार, पूर्वी चंपारण, भागलपुर और बांका में पांच-पांच, औरंगाबाद, खगड॰िया में तीन-तीन, किशनगंज, जहांनाबाद, सीतामढ़ी, जमुई, पूणिर्‍या, सुपौल, वैâमूर, बक्सर, मधुबनी एवं पश्चिमी चंपारण में दो-दो लोगों की मौत हुई। समस्तीपुर, शिवहर, सारण और मधेपुरा में एक-एक की मौत हुई।
बरसात के दिनों में आसमान में अपोजिट एनर्जी के बादल हवा से उमड़ते रहते हैं, ये बादल विपरीत दिशा में जाते हुए दूसरे बादलों से कई बार टकरा जाते हैं। इस टकराहट से होनेवाले घर्षण से जो बिजली पैदा होती है, वह धरती पर काल बनकर गिरती है। आसमान में किसी तरह का कंडक्टर (संचालक) न होने से बिजली पृथ्वी पर कंडक्टर (संचालक) की तलाश में पहुंच जाती है, जिससे जान-माल को नुकसान पहुंचता है।
धरती पर पहुंचने के बाद बिजली को कंडक्टर (संचालक) की जरूरत पड़ती है। आकाशीय बिजली जब लोहे के खंभों के अगल-बगल से गुजरती है तो वह खंभा या अन्य कोई धातु कंडक्टर (संचालक) का काम करता है। उस समय कोई व्यक्ति यदि उसके संपर्क में आता है तो उसकी जान तक जा सकती है या फिर वह झुलस सकता है।
आसमानी बिजली का प्रभाव मानव शरीर पर कई गुना होता है। आसमानी बिजली से गहराई तक जलने के कारण मानव शरीर के टिशूज डैमेज हो जाते हैं, उनको आसानी से ठीक नहीं किया जा सकता है। बिजली का असर नर्वस सिस्टम पर भी पड़ता है। आसमानी बिजली के शॉक से हार्ट अटैक तक हो जाता है और उससे मौत हो जाती है। आसमानी बिजली से शारीरिक अपंगता का खतरा भी अधिक होता है।
आसमानी बिजली से बचाव के लिए घर में तड॰ित आघात (यह एक प्रकार का एंटीना होता है, जो बिजली के दौरान अर्थिंग का काम करता है।) लगवाना चाहिए। जब भी आसमानी बिजली की संभावना हो तो टीवी, रेडियो, कंप्यूटर सभी का मोडेम और पॉवर प्लग निकाल कर उसे बंद कर दें।
इलेक्ट्रिक अप्लाएंसेस को भी बंद कर देना चाहिए।
इस दौरान मोबाइल का भी प्रयोग न करें।
नंगे पैर फर्श या जमीन पर कभी खड़े न रहें, साथ ही बिजली उपकरणों से भी दूर रहें।
बिजली पैदा करनेवाली चीजों से दूरी बनाकर रखें, जैसे रेडिएटर, फोन, धातु के पाइप, स्टोव इत्यादि बिजली संचालन के केंद्र हैं, इनसे बचकर रहें। पेड़ के नीचे या खुले मैदान में जाने से भी बचें।
आसमानी बिजली से बचने के लिए किसी भवन में छिपने की कोशिश करें। गीले कपड़ों की वजह से वज्रपात का असर कम हो जाता है।
आकाशीय बिजली का तापमान सूर्य की ऊपरी सतह से भी अधिक होता है। यह बिजली मिली सेकंड से भी कम समय के लिए ठहरती है। यदि बिजली किसी व्यक्ति पर गिरती है तो सबसे ज्यादा असर उसके सिर, कंधे और गले पर होता है। बिजली गिरने की सबसे अधिक संभावना दोपहर के वक्त होती है। बिजली का असर महिलाओं से ज्यादा पुरुषों पर होता है। अगर आप खुले आसमान के नीचे हैं तो अपने हाथों को कानों पर रख लें, ताकि बिजली की तेज आवाज से कान के पर्दे न फट जाएं। अपनी दोनों एड़ियों को जोड़कर जमीन पर उकड़ू बैठ जाएं। अगर इस दौरान आप एक से ज्यादा लोग हैं तो एक दूसरे का हाथ पकड़कर बिल्कुल न रहें, बल्कि एक दूसरे से दूरी बनाकर रखें। छतरी या सरिया जैसी कोई चीज है तो अपने से दूर रखें, ऐसी चीजों पर बिजली गिरने की आशंका सबसे ज्यादा होती है। पुआल आदि के ढेर से दूर रहें, उसमें आग लग सकती है।
आकाशीय बिजली की प्रक्रिया कुछ सेकंड के लिए होती है, लेकिन इसमें इतने ज्यादा बोल्ट का करंट होता है कि आदमी की जान लेने के लिए काफी होता है। क्योंकि इसमें बिजली वाले गुण होते हैं, जहां करंट का प्रवाह होना संभव होता है। आकाश से गिरी बिजली किसी न किसी माध्यम से जमीन में जाती है और उस माध्यम में जो जीवित चीजें आती हैं, उनको नुकसान पहुंचता है। बिजली का चमकना, बिजली का गिरना नहीं होता। बिजली अगर आकाश में ही रहे तो वो केवल ‘बिजली का चमकना या गरजना’ कहलाया जाएगा, लेकिन बिजली अगर धरती या धरती में पड़ी किसी चीज से टकराए तो वो ‘बिजली का चमकना-गरजना’ तो होगा ही साथ ही यह ‘बिजली का गिरना’ भी माना जाएगा।
दुनिया की हर चीज का सबसे बेसिक बिल्डिंग ब्लॉक एटम यानी अणु है। मतलब यह कि अगर किसी पदार्थ को ‘अणु’ के लेवल तक तोड़ा जाए तो उस पदार्थ के अणु के भी वही गुण होंगे, जो उस मूल पदार्थ के थे। लोहे को छोटा करते-करते अगर हम उसके एक अणु तक पहुंच जाएं तो वह अकेला अणु भी लोहा ही कहलाएगा। अब अगर अणु से भी ज्यादा छोटे टुकड़े कर दिए जाएं तो फिर वो टुकड़े लोहा नहीं कहलाएंगे।
तो इस बिल्डिंग ब्लॉक, यानी अणु में तीन चीजे होती हैं – प्रोटॉन, न्यूट्रॉन और इलेक्ट्रॉन। न्यूट्रॉन में कोई चार्ज नहीं होता लेकिन प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन में बराबर चार्ज होता है। प्रोटॉन के पास धनात्मक (+) और इलेक्ट्रॉन के पास ऋणात्मक (-) इसलिए ही अणु का कुल चार्ज जीरो रहता है और इसलिए ही सामान्य परिस्थितयों में हर चीज का चार्ज शून्य रहता है। बिजली गिरने के बाद तुरंत बाहर न निकलें। अधिकांश मौतें तूफान गुजर जाने के ३० मिनट बाद तक बिजली गिरने से होती हैं। अगर किसी व्यक्ति पर बिजली गिर जाए तो तत्काल डॉक्टर की मदद लें। बिजली गिरने से अकसर शरीर में दो स्थानों पर जलने की आशंका रहती है। वह स्थान जहां से बिजली ने शरीर में प्रवेश किया और जिस जगह से उसका निकास हुआ जैसे पैर के तलवे सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। अगर बादल गरज रहे हों और आपके रोंगटे खड़े हो रहे हैं तो यह इस बात का संकेत है कि बिजली गिर सकती है। ऐसे में नीचे दुबक कर पैरों के बल उकड़ू बैठ जाएं। इससे बिजली से बचा जा सकता है और जान-माल की हानि कम हो सकती है।