" /> इंदौर पुलिस की एक नई पहल, पुलिस की आंख बनेंगे शहर के लाखों कैमरे

इंदौर पुलिस की एक नई पहल, पुलिस की आंख बनेंगे शहर के लाखों कैमरे

इंदाैर ट्रैफिक पुलिस द्वारा पुलिस उप महानिरीक्षक इन्दौर शहर श्रीमती रूचि वर्धन मिश्र के निर्देशन एवं पुलिस अधीक्षक मुख्यालय  सूरज वर्मा के नेतृत्व में नित नए प्रयास कर ट्रैफिक को सुगम बनाने की कोशिश की जा रही है।  इन्दौर ट्रैफिक पुलिस द्वारा आमजन के सहयोग और भागीदारी के साथ ही ट्रैफिक के जवानों की जिम्मेदारी तय करने और उनके नियत ड्युटी स्थान पर मौजूद रहने को सुनिश्चित करने की दिशा में एक नया प्रयास किया जा रहा है। तकनीक के उपयोग से अब कोई भी विभाग अछूता नहीं रह गया है, और इसी कड़ी में जवानों के लिए अब उनके नियत स्थान पर पहुँचने और वापस जाने के समय उन्हें एक QR कोड स्कैन करना होगा।

सिटीजन कॉप एप फाउंडेशन के श्री राकेश जैन द्वारा इस सोच को अंजाम दिया गया है और इसी के साथ ही सिटीजन कॉप ऐप के माध्यम से आम आदमी के लिए कुछ नए फीचर्स जोड़े गए। कोई आम नागरिक भी अब सिटीजन कॉप ऐप से QR कोड स्कैन कर देख सकेगा कि उस स्थान या चैराहे पर किस पुलिसकर्मी की ड्यूटी लगी है, और जरुरत के समय उनसे संपर्क कर सकेगा। किसी दुर्घटना या जाम की स्थिति में आम जन के लिए अपने आस पास के ट्रैफिक स्टाफ का पता लगाना अब बहुत आसान हो जायेगा।
इस तरह का संभवतः यह देश ही नहीं दुनिया में प्रथम प्रयास हैं, समय-समय पर माननीय उच्च न्यायालय द्वारा भी ट्रैफिक की सुगमता और जवानों की तैनाती के लिए निर्देश दिए जाते रहे हैं। इस तकनीक से अब जवानो का उनकी तय ड्यूटी स्थान पर उपलब्ध होना सुनिश्चित हो पायेगा। जिसकी शुरूआत आदर्श मार्ग के चार चौराहो रीगल, हाई कोर्ट, इंद्रप्रस्थ और पलासिया से की जा रही हैं और इसे शहर के सभी 56 चैराहो पर विस्तारित किया जायेगा।
इसी के साथ ही एक और नया फीचर भी सिटीजन कॉप एप में आज से चालू किया जा रहा हैं जिसके माध्यम से शहर के सभी इलाको में आम जनता द्वारा उनके आवास या व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर लगाए सीसीटीवी कैमरा की जानकारी जुटाई जा रही हैं। इसके लिए भी सिटीजन कॉप एप पर आमजन कैमरों की संख्या और उनकी लोकेशन डाल सकेंगें। किसी घटना के बाद घटना स्थल के आसपास के पब्लिक और प्राइवेट कैमरों की जानकारी देखी जा सकेगी और बगैर किसी शासकीय व्यय के कई सौ करोड़ की लागत के लाखों कैमरों का उपयोग किया जा सकेगा। इस तरह अब जन सहयोग और जन भागीदारी से पुलिस की आँख बनेंगे शहर के लाखो कैमरे और इस तरह कई सौ करोड़ के शासकीय व्यय की बचत हो सकेगी।