इज्जत के  चीथड़े

सुन बे क्रिकेटिया कपटी! भिखारी देश के भिखमंगे वजीर। हो गई सारी हेकड़ी गुम? निकल गए कसबल? हजार बार समझाया कि मूर्खता मत करो। जैशे मुहम्मद और लश्करे तैयबा के अन्धों की लाठी पकड़नेवाले सूरमा मत बनो लेकिन तुम्हारे कूढ़ मगज में कोई बात घुसे तब तो! घर में खाने का ठिकाना नहीं, बीस करोड़ भूखे नंगों के देश में अब पीने के पानी के भी लाले पड़नेवाले हैं। ये सब करके आखिर क्या मिलता है तुमको? दूसरों के मामलों में टांग अड़ाने का शौक है तो पहले अपनी औकात तो बनाते? एक बार घोड़े को नाल ठुकवाते देखकर एक मेंढक को भी नाल ठुकवाने का शौक हुआ तो लुहार के लाख मना करने के बाद भी वह नहीं माना और टांगे उठाकर लेट गया फिर क्या था? लुहार के एक ही जोरदार वार से उसका प्राणांत हो गया। अब देख लो, एक हजार किलो के बम का वार वैâसे जैश का प्राणांत कर गय? अब भी वक्त है! दांतों में तिनका दबाकर हाफिज सईद और मसूद अजहर को तश्तरी में परोस दे वरना पूरे देश को कब्रिस्तान बनने में वक्त नहीं लगेगा। तूने हमारी क्षमा भावना को कायरता समझने की भारी भूल की लेकिन हम कृष्ण की तरह तेरे पाप गिनते रहे। अब जब तेरे पापों का घड़ा फूटा है तो उसमें तू बह ही जाएगा। सुन क्रिकेट के कबूतर! तू जिस भूखे नंगे देश का हुक्काम बन कर इतरा रहा है, उसकी औकात पूरी दुनिया में भिखारी से ज्यादा नहीं है। हिंदुस्थान से पंगा लेना ३ शादी करके तलाक लेने जितना आसान थोड़ी है। अब पता चल गई न अपनी औकात? अब होश में आ जा वरना ऐसा पाजामा फाड़ेंगे कि इज्जत के चीथड़े उड़ जाएंगे।