इतना आसान नहीं था!

चॉकलेटी बॉय के तौर पर बॉलीवुड में मशहूर रणबीर कपूर अब तमाम फिल्मों में अलग-अलग किरदार निभाकर अपनी पहचान बदलते रहे हैं। राजकुमार हिरानी के निर्देशन और विधु विनोद चोपड़ा द्वारा बनाई गई फिल्म `संजू’ जो कि फिल्म स्टार संजय दत्त की निजी जिंदगी पर आधारित है, में अभिनेता रणबीर कपूर पहली बार किसी बायोपिक फिल्म का हिस्सा बने हैं। देखना होगा कि बायोपिक फिल्म के माध्यम से रणबीर दर्शकों पर कितना असर छोड़ पाते हैं? प्रस्तुत है रणबीर कपूर से सोमप्रकाश शिवम की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-
कितना मुश्किल होता है किसी की जिंदगी को अपने अंदर उतारना और फिर उसे अभिनय करना?
वाकई यह मेरे लिए बहुत ही दिलचस्प रहा। इसके लिए मुझे बहुत सारी मेहनत करनी पड़ी। मैंने इस फिल्म को करने से पहले संजू बाबा की बहुत सारी फिल्मों को देखा और जब भी मौका मिला उनके साथ बिताए पलों में भी उनको अपने अंदर उतारने की भरसक कोशिश की है।
आप खुद को संजय दत्त के कितने करीब मानते हैं?
यह फिल्म संजय दत्त के निजी जीवन पर आधारित है, जिसमें संजय की बहुत सारी अच्छाई-बुराई को दर्शक पहली बार ठीक से जानेंगे। मैंने बहुत मेहनत की है संजय बाबा को जानने की और उनकी गतिविधियों को अपने अंदर उतारने की। मुझे लगता है कोई भी इंसान अपनी जिंदगी का अच्छा या बुरा पल यूं ही सभी के सामने उजागर नहीं कर देता है, जैसा कि संजय दत्त ने किया है।
इस फिल्म को करने में आपका क्या अनुभव रहा?
मुझे पहली बार कई दिग्गज कलाकारों के साथ काम करने का मौका मिला। यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है और मैंने बहुत कुछ उनके साथ रहकर सीखा। इस अनुभव को शब्दों में बयां नहीं कर सकता।
आपको इस फिल्म से कितनी उम्मीदें हैं?
मैं एक कलाकार हूं, अपने काम पर फोकस करता हूं। मैंने इस फिल्म में भी जीतोड़ मेहनत की है। मैं ज्यादा उम्मीदें नहीं पालता। फैसला दर्शकों पर निर्भर करेगा अगर मेरा काम अच्छा है तो मैं बधाई का पात्र अवश्य बनूंगा।
भविष्य में किस तरह के सिनेमा को प्राथमिकता रहेगी?
मैं कमर्शियल सिनेमा के साथ-साथ रियलिस्टिक सिनेमा को भी प्राथमिकता देना चाहूंगा। मेरी कोशिश रहेगी कि मैं रीयलिस्टिक सिनेमा का अधिक से अधिक हिस्सा बनूं।