इन्हें उखाड़ फेंको

बड़ा कठिन समय आ गया है। रानी पद्मिनी ने खुद के चरित्र, प्रतिष्ठा और धर्मरक्षा के लिए हजारों राजपूत महिलाओं के साथ जौहर किया था। अलाउद्दीन खिलजी तथा उनके मुगल अत्याचार के खिलाफ हुआ जौहर आज भी हिंदुस्थान की नारी शक्ति को प्रेरणा दे रहा है लेकिन आज के युग में भी भाजपा के ‘खिलजी’ के खिलाफ जौहर करने की नौबत महाराष्ट्र की तमाम माताओं-बहनों पर आई है क्या? भाजपा के एक विधायक तथा मुख्यमंत्री के प्रिय ‘हराम’ कदम ने स्त्रियों के बारे में अपमानास्पद, मानहानि कारक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए उन्मादकारी प्रदर्शन किया है। दही-हंडी कार्यक्रम में उन्होंने अत्यंत रुआब के साथ माइक पर घोषणा की कि ‘कोई लड़की पसंद होगी तो सिर्फ मुझे आकर बताओ। उस लड़की को उठाकर तुम्हारे हवाले करता हूं।’ यह किस तरह की भोगशाही हमारे महाराष्ट्र में अवतरित हुई है? माताएं-बहनें, किसान, सीमा पर तैनात जवानों की पत्नियों के बारे में गंदे शब्दों का प्रयोग करनेवाली जमात भारतीय जनता पार्टी में पनप रही है। रावसाहेब दानवे ने किसानों को मतवाले तथा धूर्त साले कहा था। पंढरपुर के भाजपा विधायक प्रशांत परिचारक ने सीमा पर लड़नेवाले सैनिकों की पत्नियों के बारे में अपमानजनक बयानबाजी की थी। उन सबसे दो कदम आगे बढ़ते हुए विधायक कदम ने हरामखोरी की हद पार कर दी। दूसरों की पत्नियों, बेटियों और बहुओं को भगाकर लाएंगे, ऐसा कहनेवाला विधायक इस दल में आज भी है। उन्हें शिवराय का नाम लेकर राज करने का अधिकार नहीं। सरकार शिवराय का विशाल स्मारक समुद्र में बना रही है। मगर भाजपा विधायक के कल की विकृति से शिवराय का ही अपमान हुआ है। कल्याण के सूबेदार की बहू की गोदभराई करते हुए सम्मान के साथ वापस भेजनेवाले एक शिवाजी महाराज कहां और कहां राज्य की विधानसभा में घुसे ये हरामखोर? इन अपराधियों को कठोर दंड मिलना चाहिए, ऐसी समस्त महाराष्ट्र की मांग है। महाराष्ट्र की युवा पीढ़ी को किस तरह का विकृत संदेश भाजपा दे रही है? यही उनका हिंदुत्व और यही उनकी संस्कृति है क्या? चुनाव जीतने के लोभ में कचरा बदन पर मलोगे तो दूसरा क्या होगा? पिछले ५ वर्षों में जो बोया वही उग रहा है। महाराष्ट्र की स्त्री शक्ति का संताप चरम पर है। दुनिया का सदाचार भी महिलाओं ने ही जीवित रखा है। कौशल्या की गोद में भगवान रामचंद्र जन्मे और देवकी की गोद में भगवान श्रीकृष्ण जन्मे लेकिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिवस पर ही स्त्रियों का वस्त्रहरण करने की बात भाजपा के विधायक ने की। भगवान श्रीकृष्ण स्त्रियों के रक्षक थे। जब द्रौपदी पर राजसभा में वस्त्रहरण की मुश्किल घड़ी आई थी तब उसने श्रीकृष्ण का स्मरण किया। श्रीकृष्ण का स्मरण करते हुए द्रौपदी ने प्रार्थना की कि, ‘आज मेरे पति हार गए हैं और भीष्म, द्रोण आदि वृद्ध तथा अन्य भाई सिर्फ हताश होकर देख रहे हैं, अब आपके अलावा मेरी रक्षा दूसरा कौन करेगा?’ इस श्लोक में श्रीकृष्ण को इंगित कर जो संबोधन किया गया है वो ‘गोपीजन प्रिय कृष्ण’ है। ‘गोपीजन प्रिय कृष्ण, आप पर जिस गोपी की प्रीति थी और आपकी भी गोपी पर थी, इसीलिए आप आज मेरी रक्षा के लिए दौड़कर आओ!’ ऐसी प्रार्थना द्रौपदी ने की। इस एक कथा पर संपूर्ण महाभारत है। श्रीकृष्ण स्त्रियों के बंधु थे। उसी रिश्ते से वे रक्षा करते थे लेकिन श्रीकृष्ण जन्मदिवस पर भाजपा विधायक ने नया महाभारत लिखा और उस पर भाजपा का एक भी वाचाल नेता बोलने को तैयार नहीं। अन्य मौकों पर विरोधियों द्वारा जनता तथा देश के सवाल पर आवाज उठाने पर उन्हें देशद्रोही ठहराने के लिए अपनी जीभ का पट्टा चलानेवाले स्त्रियों को भगाकर ले जाने की बात करनेवाले विधायक पर मुंह सिलकर बैठे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ट्रिपल तलाक मामले में मुस्लिम महिलाओं को न्याय देने के लिए निकले हैं और यहां महाराष्ट्र में स्त्रियों के बीच भाजपा के विधायक के कारण डर पैâल गया है। मंत्रिमंडल की एकमेव महिला मंत्री पंकजा मुंडे को इस पर बोलना चाहिए। स्त्रियों के अधिकार के लिए टीवी के पर्दे पर तड़ातड़ बोलनेवाली केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी कहां हैं? राम कदम ने जो किया वही यदि कांग्रेस के विधायक ने किया होता तो अब तक इन लोगों ने कोहराम मचा दिया होता। राहुल गांधी को तो फांसी के फंदे पर चढ़ाने के लिए निकल पड़ते। लेकिन जिस महाराष्ट्र ने जिजाऊ, सावित्री बाई, अहिल्या बाई को जन्म दिया उसी महाराष्ट्र में ‘नारी’ मतलब भोग और कचरा। कहीं से भी उठाओ और कहीं भी फेंको, ऐसा कहा गया। ऊपर से इस पर सत्ताधारी दल मौनव्रत धारण किए बैठा है। यह मौन भी संतापजनक है। स्त्री किसी की माता, किसी की बहन और किसी की पत्नी है। कोई भी उनकी ओर तिरछी नजर से देखे और राम कदम जैसे लोग स्त्रियों को भगाने की बात करें! ये सारा मामला घृणास्पद और लज्जास्पद है। इस ‘हराम’ कदम ने अब ट्वीटर पर माफीनामा पोस्ट किया है। वो भी तीन दिनों बाद। माफी मांगने के लिए इन महाशय ने इतना वक्त लिया। इसी से यह विकृति कितनी भयावह है। इसका एहसास हो जाता है। महाराष्ट्र धर्म डूबा है तो पापी औरंग्या के कारण नहीं बल्कि भाजपा की विकृति के कारण। उसके खिलाफ राज्य की महिलाएं सड़क पर उतरी हैं। हालांकि उस पर राजनीति मत करो बल्कि इस विकृति को ही जड़ से उखाड़ फेंको। कामांधों की राजनीति खत्म करनी होगी। महिला एकता का इतिहास बनाएं। वे एकत्र हों और सबसे बड़ा झटका दें।