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इसका कोई गलत इस्तेमाल न हो!-राजीव खंडेलवाल

हैंडसम राजीव खंडेलवाल की गिनती टीवी के टॉप स्टार्स में होती है। अच्छी पर्सनालिटी, मधुर मुस्कान और बैलेंस्ड परफॉर्मेंस देनेवाले राजीव खंडेलवाल ने फिल्में भी की हैं लेकिन उनकी पहचान टीवी से बनी है। ‘क्या हादसा क्या हकीकत’, ‘कहीं तो होगा’, ‘लेफ्ट राइट लेफ्ट’, ‘रिपोर्टर’ जैसे शो से राजीव खंडेलवाल की इमेज पारिवारिक हीरो के रूप में उभरी। इस समय राजीव ‘वूट सिलेक्ट’ के वेब शो ‘मर्जी’ के लिए चर्चा में हैं। पेश है राजीव खंडेलवाल से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

सफल टीवी स्टार होने के बावजूद वेब शो करने की कोई खास वजह?
मेरे खयाल से हर दूसरा कलाकार एक्सपेरिमेंटल होता ही है। मैं भी वैसा ही हूं। ‘वूट सिलेक्ट’ की मेकिंग अव्वल होती है। इस वेब शो ‘मर्जी’ की कहानी और अपना किरदार मुझे पसंद आ गया। वरना सभी लोग जानते हैं कि मैं खुद मेरी मर्जी के बिना कुछ नहीं करता
इस वेब शो में आपका किरदार ग्रे है, जबकि आपकी इमेज पॉजिटिव है?
दुनिया में ऐसा कौन सा इंसान है जिसमें बुराई नहीं है। हर बुरे इंसान में कोई-न-कोई अच्छाई जरूर होती है।
अपने किरदार के बारे में कुछ बताएंगे?
मैं इस शो में डॉक्टर अनुराग बना हूं। मेरा परिचय समीरा से (आहना कुमरा) हो जाता है। नजदीकियां बढ़ने पर समीरा मुझ पर शोषण का आरोप लगाती है। बहुत दिलचस्प मोड़ आता है कहानी में। सस्पेंस, थ्रिलर, ड्रामा, रिवेंज सब कुछ है इस कहानी में।
सुना है इसकी कहानी ‘मी टू’ अभियान की प्रेरणा है?
इसकी प्रेरणा विदेश की कहानी से प्रेरित है। जब इसकी कहानी लिखी गई तब ‘मी टू’ ने हिंदुस्थान खासकर मुंबई में तूल नहीं पकड़ा था और न ही किसी विवाद का जन्म हुआ था।
क्या ‘मी टू’ अभियान सही है?
बिल्कुल सही है। जब किसी बात की ज्यादती होती है तो वो अतिरेक कहलाता है और उसे रोकना पड़ता है। लेकिन अफसोस होता है जब समाज गलत चीज को शह देता है। ‘मी टू’ जैसे अभियान को कभी-न-कभी तो जन्म लेना ही था। मेरी बस इतनी ही इच्छा है कि इसका कोई गलत इस्तेमाल न हो।
आपने इस वेब शो में काफी इंटेंस सीन किए हैं?
एक्टिंग में मुझे १५ वर्ष हो चुके हैं। कहानी में अगर डिमांड है इंटेंस सीन की तो भी मैं नोटिस करता हूं। आज की तारीख में स्क्रीन पर किसिंग सीन नॉर्मल हो गए हैं। मैं भी खुद को एक इमेज में बांधकर नहीं रखना चाहता।
आपको फिल्मों में उतनी सफलता नहीं मिली जितना की टीवी में?
मैंने फिल्मों की कोशिश नहीं की और न ही इंतजार किया। मुझे जो भी प्रोजेक्ट अच्छा लगा उसे मैंने किया। अगर कोई निर्माता मुझसे आकर कहे कि राजीव ये सेटअप है। आप करोगे क्या? तो मैं मना कर देता हूं। मैंने आपको पहले ही बता दिया न कि मैं अपनी मर्जी का मालिक हूं। कहानी और किरदार पसंद आने पर ही मैं उसे करता हूं। एक प्रोजेक्ट खत्म होने के बाद मैं छुट्टियों पर निकल जाता हूं और पैसा खत्म होने के बाद अगली शूटिंग पर मुंबई आ जाता हूं।
आप फॉर्मिंग के लिए वैâसे वक्त निकाल लेते हैं?
दरअसल, मेरी पत्नी मंजरी के पिता का अलीबाग में फार्म हाउस है। उनके फार्महाउस से मुझे प्रेरणा मिली और मैंने गोवा में जमीन लेकर अपना घर बनाया और वहां पर मैं आर्गेनिक पद्धति से फल व सब्जियां उगाता हूं। उन फलों और सब्जियों को परिवार और दोस्तों के साथ बांटकर खाने का मजा ही कुछ और है।