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‘इस शो के जरिए मैंने बहुत कुछ सीखा!’-स्नेहा वाघ

आज टीवी की दुनिया और दर्शकों के लिए अभिनेत्री स्नेहा वाघ का नाम जाना-पहचाना है। इस समय स्नेहा का शो ‘ज्योति’, ‘मेरे साई’ और ‘चन्द्रगुप्त मौर्य’ और ‘कहत हनुमान जय श्रीराम’ टेलीकास्ट हो रहा है। इसमें ‘कहत हनुमान’ शो नया है और इसमें स्नेहा ने हनुमान जी की मां अंजना का किरदार निभाया है। ये सभी शोज काफी पसंद किए जा रहे हैं। पेश है विभिन्न किरदारों को बखूबी निभानेवाली स्नेहा वाघ से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

 करियर के शुरुआत में ही नायिका प्रधान शो ‘ज्योति’ आपको कैसे मिला?
इस समय ‘ज्योति’ का पुनर्प्रसारण हो रहा है ‘एन्ड’ और ‘दंगल’ टीवी पर। ये शो मैंने २००९ में किया और इसी शो से मेरा डेब्यू हुआ। इस शो को किए हुए ११ वर्ष हो चुके हैं, लेकिन इस शो की बहुत अच्छी और कई सारी यादें हैं, जिसकी वजह से मेरा करियर आगे बढ़ा। मेरी पहचान बनी। जब इसकी शूटिंग शुरू की तब कभी अहसास ही नहीं हुआ कि ये शो दर्शकों के दिल में जगह बना लेगा। सच कहूं तो मुझे हिंदी बोलना भी नहीं आता था।

 जब आपको हिंदी का ज्ञान ही नहीं था तो ये शो कैसे मिला?
यह तो संजोग की बात है। मैं मूलतः क्लासिकल डांसर हूं। उन दिनों दसवीं की परीक्षा भी दी नहीं थी मैंने और क्लासिकल डांस की मेरी एक परफॉर्मेंस को देखकर राजन बने नामक एक मेकर ने मुझे संपर्क कर एक मराठी नाटक का ऑफर दिया। मैंने उसे ये कहकर ठुकरा दिया कि मुझे एक्टिंग नहीं आती। मैं सिर्फ डांस करना जानती हूं। ‘प्रेमाचा रंग गुपचुप’ सहित मराठी में कुछ टीवी शोज किए और इन्हीं के जरिए मुझे ‘ज्योति’ का ऑफर मिला।

 अच्छी तरह से हिंदी बोलने की तैयारी आपने कैसे की?
‘ज्योति’ का ऑफर आया तो मेरी उम्र १७-१८ वर्ष थी। मुझे खुद पर बिलकुल यकीन नहीं था कि मैं कैसे हिंदी में लंबे-लंबे
डायलॉग बोल सकूंगी? मैंने संवाद, कहानी और किरदार का गहराई से अध्ययन किया। मेकर इतने स्ट्रिक्ट थे कि जब तक मैं अल्फाज सही तरीके से नहीं बोलती वो शॉट को ओके नहीं करते थे। कई मर्तबा दर्जनों रिटेक्स हुए। धीरे-धीरे अपनी गलतियों से मैं सीखती गई। इस शो के जरिए मैंने बहुत कुछ सीखा।

 ‘कहत हनुमान जय श्रीराम’ शो में मां अंजना का रोल निभाने के लिए आपको कैसी तैयारी करनी पड़ी?
‘कहत हनुमान जय श्रीराम’ ये मेरा पहला धार्मिक शो है। हनुमान जी की माँ अंजना का रोल मैं कैसे निभाऊंगी ये बड़ा सवाल था मेरे लिए। मैं व्यक्तिगत जीवन में बहुत हाइपर हूं। मुझमें शांति और धैर्य नहीं। मां अंजना का किरदार मेरे लिए बेहद चैलेंजिंग था। अतः ईश्वरीय इम्पैक्ट लाने के लिए दिमाग को शांत रखने की सलाह मुझे मेरे निर्देशक ने दी।

 मां अंजना के किरदार के लिए आपको वेशभूषा और केशभूषा भी अलग से करनी होती होगी?
महिलाओं को सजना-संवरना बेहद अच्छा लगता है। माता अंजना के लिए आभूषण पहनना और हेयर स्टाइल करना मुझे हमेशा पसंद है। ‘चन्द्रगुप्त मौर्य’ में भी मैंने ‘मुरा’ का किरदार निभाया था। ‘मेरे साई’ ये शो भी ‘चन्द्रगुप्त मौर्य’ की तरह ‘सोनी’ पर ही है। ‘मेरे साई’ में मैंने तुलसी किरदार निभाया था। इन सभी किरदारों को निभाने के लिए मुझे पोशाक और मेकअप का लुक अलग रखना पड़ा। ये भी इस पेशे के अलग चैलेंजेस हैं, जिसने मेरे अभिनय के सफर को रोमांचक बनाया।