" /> इस सप्ताह मिलेगा 10 हजार बेड्स का तोहफा : कोरोना का सामना करने के लिए तैयार है मुंबई

इस सप्ताह मिलेगा 10 हजार बेड्स का तोहफा : कोरोना का सामना करने के लिए तैयार है मुंबई

मुंबई में अब तक 30 हजार से अधिक कोरोना मरीज सामने आ चुके हैं। इनमें से करीब 14 हजार मामले केवल 10 दिन में रिपोर्ट हुए हैं। तेजी से बढ़ते मरीजों की संख्या को देखते हुए मरीजों के इलाज के लिए जंबो व्यवस्था की जा रही है। इस सप्ताह तक और 10 हजार बेड उपलब्ध होंगे।
बता दें कि मुंबई में जिस तेजी से कोरोना के मरीज मिल रहे है उस तेजी से अस्पतालों में बेड बढ़ाए जा रहे है और साथ ही सेमी और क्रिटिकल मरीजों के लिए कोविड केयर केंद्र बनाए जा रहे है। बीकेसी में 1026 बेड जंबो सुविधा वाले कोरोना केयर केंद्र के बाद महालक्ष्मी रेस कोर्स, गोरेगांव में नेस्को, दहिसर चुंगी नाका, कांदिवली के कांधार पाड़ा, बांद्रा में एक और कोरोना केयर केंद्र बनाया जा रहा है। आगामी सप्ताह में करीब 10 हजार बेड जंबो सुविधा वाले उपलब्ध होंगे। जांच से लेकर ऑक्सीजन की सुविधा उपलब्ध होंगी। प्रत्येक वार्ड में कम से कम 100 बेड और 20 आईसीयू बेड वाले निजी अस्पतालों को अधिग्रहित किया गया है।

‘ज्यादा टेस्टिंग से बढ़े केस’
ऐक्टिव कॉन्टैक्ट को ढूंढना, घर-घर जाकर सर्वे करने और फीवर ओपीडी चलाने जैसे फैसले से फोकस्ड टेस्टिंग अधिक हो रही है, जिससे अधिक से अधिक लोग सामने आ रहे हैं।

4 हजार से अधिक टेस्टिंग
इन 10 दिन में भले ही मरीजों की संख्या बढ़ी हो, लेकिन इस दौरान टेस्टिंग पर भी जोर दिया गया है। आंकड़ों पर नजर डालें, तो रोजाना 4 हजार से अधिक कोरोना टेस्टिंग मुंबई में की जा रही है। मुंबई में 23 मई तक 1.7 लाख कोरोना टेस्टिंग की गई थी, इनमें से 43,025 टेस्टिंग केवल 10 दिन में की गई हैं यानी करीब 25 फीसदी टेस्टिंग केवल 13 मई से 23 मई के बीच में की गई हैं।

इस उम्र के लोग सबसे अधिक शिकार
यूं तो कोरोना वायरस बच्चों से लेकर बूढ़ों तक हर किसी को परेशान किया है, लेकिन एक खास उम्र वर्ग इससे अधिक प्रभावित है। राज्य सरकार के हेल्थ विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार, 31-40 आयु के लोगों में सबसे अधिक कोरोना वायरस की पुष्टि हो रही है। रविवार तक राज्य में कोरोना वायरस के 4,7021 मरीजों के अनलीसिस के अनुसार, 9991 मरीज 31-50 उम्र के, 9798 मरीज 21-30 उम्र के बीच के हैं। सबसे कम मरीजों की संख्या 90 साल से अधिक के लोगों में देखने को मिली है। विशेषज्ञों के अनुसार, भले ही 31-40 साल के लोगों में बीमारी की पुष्टि अधिक देखने को मिल रही है, लेकिन अच्छी बात यह है कि इनमे रिकवरी रेट भी अधिक है।