उत्त्रनामा! राष्ट्रवाद, मुस्लिम राजनीति और भगवा

आए दिन अपनी ही पार्टी के मंत्रियों व विधायकों सहित नेताओं के बिगड़े बोल मुख्यमंत्री के लिए मुसीबत खड़ी करते रहे हैं। योगी सरकार के कुछ मंत्रियों और चुनिंदा विधायकों का तो यह शगल बन चुका है। आए दिन अपने बयानों से सरकार और पार्टी की फजीहत करवानेवाले इन नेताओं पर मानों किसी का जोर नहीं चलता है। कभी मुस्लिम महिलाओं से हनुमान चालीसा का पाठ करवाने, कभी मंदिर पर घंटा चढ़ाने तो कभी गौ पूजा करवा सुर्खियां बटोरने वाले योगी सरकार के इकलौते मुस्लिम मंत्री मोहसिन रजा ने एक बार फिर अपने बयान से मीडिया का ध्यान खींचा है।
इस बार अपने बयान में योगी सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, आईटी और मुस्लिम वक्फ व हज मामलों के राज्य मंत्री मोहसिन रजा ने मुस्लिमों को भगवा रंग से परहेज न करने की सलाह दी है। भगवा रंग को योगी से जोड़ने पर उनका कहना है कि ये रंग तो अल्लाह की देन है। इसका मुख्यमंत्री योगी से कोई मतलब नहीं है। इससे पहले भी अपने कई बयानों को लेकर और हनुमान मंदिर में घंटा वगैरह चढ़ाने को लेकर भी मोहसिन रजा सुर्खियों में रह चुके हैं। योगी सरकार में राज्यमंत्री मोहसिन रजा मुसलमानों में शिया समुदाय से आते हैं और सरकार बनने से पहले वो प्रदेश भाजपा में प्रवक्ता भी रह चुके हैं। रणजी तक क्रिकेट खेल चुके मोहसिन रजा प्रदेश पॉवर कॉरपोरेशन लिमिटेड में खेल कोटे के कर्मचारी रहे हैं। हालांकि मोहसिन रजा कहते हैं कि मुझे गलत समझा गया, भगवा किसी एक का नहीं है। मुसलमानों को भगवा पहनने की सलाह संबंधी बयान पर अपनी सफाई देते हुए योगी सरकार के मंत्री मोहसिन रजा ने कहा कि उनकी बातों का गलत मतलब निकाला गया है। उन्होंने मुसलमानों को भगवा पहनने के लिए नहीं कहा बल्कि यह कहा कि भगवा रंग अल्लाह ने बनाया है और ये किसी मजहब का प्रतीक नहीं है। उनका कहना है कि भगवा को अकेले योगी से जोड़ना गलत है बल्कि यह रंग तो प्रकाश का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि अनेक धर्मगुरु भी भगवा पहनते हैं। मोहसिन के मुताबिक मुस्लिमों में एक संप्रदाय है चिश्तियां जहां लोग भगवा पहनते हैं लिहाजा इसे किसी एक मजहब से जोड़ना ठीक नहीं है। उनके मुताबिक मुसलमानों को भगवा पहनना चाहिए, ऐसा उन्होंने कहीं नहीं कहा है। मोहसिन रजा का कहना है कि उनसे एक टीवी चैनल ने स्वतंत्रता दिवस मनाने को लेकर बात की थी और भगवा रंग को लेकर उन्होंने विवादास्पद बातें नहीं कही थी।
भाजपा की मुस्लिम राजनीति में मोहसिन रजा की होड़ रही है वसीम रिजवी और बुक्कल नवाब के साथ। योगी सरकार में सपा से इस्तीफा देकर शामिल हुए बुक्कल नवाब, शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी से राज्यमंत्री मोहसिन रजा के बयानों को लेकर होड़ चलती रही है। बुक्कल नवाब विवादास्पद होर्डिंगें लगवाने, कार्यक्रम करवाने को लेकर सुर्खियां बटोरते रहे हैं और उनसे होड़ में अक्सर मोहसिन रज़ा भी इसी तरह के बयान देते रहे हैं। बुक्कल नवाब ने भाजपा में शामिल होने के लिए विधान परिषद से भी इस्तीफा दिया था। हालांकि बाद में भाजपा ने उन्हें फिर से परिषद भेज दिया था। कभी शिया धर्मगुरु कल्बे जव्वाद की खुली मुखालफत कर भी पूर्व मंत्री आजम खान व सपा सरकार के प्यारे बने रहे शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी भी अपने बयानों के जरिए सुर्खियां बटोरते रहे हैं। वसीम रिजवी बाबरी मस्जिद-रामजन्म भूमि को लेकर विवादास्पद फिल्म भी बना चुके हैं और अयोध्या की विवादित जमीन को हिंदुओं को देने की वकालत भी कर चुके हैं।
दूसरी ओर राष्ट्रवाद के एजेंडे पर मजबूती से चलते हुए योगी सरकार ने बीते सालों की तरह इस बार भी मदरसों में स्वतंत्रता दिवस मनाने और राष्ट्रगान गाने को कहा है। योगी सरकार ने बीते साल की तरह इस बार भी एडवाइजरी जारी कर मदरसों में तिरंगा फहराने और स्वतंत्रता दिवस धूमधाम से मनाने को कहा है। राज्यमंत्री ने अपने एक अन्य बयान में मदरसा बोर्ड की इस एडवाइजरी का समर्थन किया है कि मदरसों में भी तिरंगा फहराकर स्वतंत्रता दिवस मनाया जाए और राष्ट्रगान हो। इस दिन वहां के बच्चों को स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में बताया जाए। उन्होंने कहा कि मदरसे के बच्चों को भी आज़ादी मिलने की खुशी मनाने का हक़ है और प्रदेश सरकार को सभी राष्ट्रीय पर्वों पर इस तरह की एडवाइजरी जारी करनी चाहिए। प्रदेश सरकार की एडवाइजरी में मदरसे में शिक्षकों को आना व पर्व को मनाना अनिवार्य किया गया है। योगी सरकार बीते दो सालों से इस तरह की एडवाइजरी जारी कर रही है। हालांकि इससे पहले शिया धर्मगुरुओं ने मदरसे में राष्ट्रगान गाने की शुरुआत की थी। शिया धर्मगुरु मौलाना यासूब अब्बास का कहना है कि उन्होंने १७ साल पहले ही अपने राजधानी के स्कूलों व मदरसों में इसकी शुरुआत कर दी थी और खुद भी इसमें हिस्सा लिया था। योगी सरकार ने जहां एक ओर संस्कृत स्कूलों में निजी क्षेत्र से निवेश करने को कहा है वहीं मदरसों के आधुनिकीकरण के लिए भी कई योजनाएं शुरु की हैं।
योगी लाए विकास की राह
राष्ट्रवाद के अपने एजेंडे के समानांतर ही मुख्यमंत्री विकास की डगर पर भी अपनी गाड़ी तेजी से दौड़ाते हुए दीखते हैं। प्रदेश में सफल निवेशक सम्मेलन के बाद साल भर में ही दो ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी आयोजित कर १.२५ लाख करोड़ रुपए की औद्योगिक परियोजनाएं शुरू करने के बाद अब उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने उत्तर भारत का पहला और देश का सबसे बड़ा तैरता सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने का जिम्मा मुंबई की जानी मानी फर्म शापुरजी पालान जी को सौंपा है। शापुर जी १५० मेगावाट का यह संयंत्र सोनभद्र के रिहंद में ७५० करोड़ रुपए की लगात से लगाएगी।  इस सौर ऊर्जा संयंत्र से बनने वाली बिजली की कीमत महज ३.३६ रुपए प्रति यूनिट होगी जो कि प्रदेश में स्थापित किसी भी सौर ऊर्जा संयंत्र के मुकाबले सबसे कम होगी। बीते सप्ताह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई वैâबिनेट की बैठक में इस आशय का प्रस्ताव पारित किया गया है। इसके तहत योगी वैâबिनेट ने उत्तर प्रदेश जल विद्युत निगम की रिहंद जल विद्युत परियोजना क्षेत्र में रिहंद जलाशय की वाटर सरफेस पर १५०मेगावाट क्षमता की फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट विकसित किए जाने के संबंध में प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
मंत्रिपरिषद के इस पैâसले की जानकारी देते हुए प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा व स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि इस सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना से प्रदेश में ७५० करोड़ रुपए का निवेश आएगा जबकि इसमें प्रदेश की तरफ से कोई इन्वेस्टमेंट नहीं है। वैâबिनेट ने उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहन मैन्यूफैक्चरिंग नीति को मंजूरी दे दी है। इस नीति के तहत वाहन निर्माताओं से लेकर संचालकों को खासी रियायतों का एलान किया गया है। नीति के तहत इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाली कंपनियों को जमीन खरीद पर २५ फीसदी की छूट दी जाएगी। तकनीकी स्थानांतरण पर होने वाले कुल खर्च का अधिकतम ५० लाख रुपए की सब्सिडी दी जाएगी। तकनीकी स्थानांतरण पर होने वाले कुल खर्च में ५० लाख की प्रतिपूर्ति सब्सिडी के तौर पर की जाएगी। इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन लगाने वालों को कुल पूंजीगत व्यय पर २५ लाख रुपए की अधिकतम सब्सिडी दी जाएगी जिसमें जमीन पर आने वाली लागत शामिल नहीं है। प्रदेश सरकार ने इस नीति के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण नि:शुल्क कर दिया जबकि रोड टैक्स में २५ फीसदी की छूट दी गयी है। इस नीति को लागू करने के बाद  ४० हजार करोड़ रुपए के निवेश की संभावना है जबकि ५० हजार लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद जताई गई है।