" /> उथप्पा की आत्मघाती सोच

उथप्पा की आत्मघाती सोच

जरूरी नहीं कि किसी खिलाड़ी को देखकर ये अंदाज़ा लगाओ के वो बेहतरीन जीवन जीता होगा बल्कि हो सकता है वो किसी भयंकर तनाव के दौर से गुजर रहा हो। और यहां तक कि आत्महत्या करना चाहता हो। जी हां, ऐसा हुआ भी है और होता भी है। टी-२० वर्ल्ड कप जीतने वाली क्रिकेट टीम के हिस्सा रहे विकेटकीपर-बल्लेबाज रॉबिन उथप्पाने खुलासा किया है कि साल २००९ से २०११ के बीच वो तनाव से जूझ रहे थे और एक वक्त तो ऐसा भी आया था जब वो आत्महत्या तक करने की सोच चुके थे। उथप्पा ने २००६ में इंग्लैंड के खिलाफ मैच से टीम इंडिया के लिए डेब्यू किया था। उन्होंने अब तक देश के लिए ४६ वनडे और १३ टी-२० मैच खेले हैं। उथप्पा ने राजस्थान रॉयल्स फाउंडेशन द्वारा एनएस वाहिया फाउंडेशन एंड मैक्लीन अस्पताल (हॉवर्ड मेडिकल स्कूल से संबद्ध) के सहयोग से मानसिक स्वास्थ्य को लेकर आयोजित वेबीनार ‘माइंड, बॉडी और सोल’ के पहले सत्र में कहा, ‘जब मैंने साल २००६ में अपना डेब्यू किया तो अपने बारे में इतना नहीं जानता था, तब काफी चीजों को सीख रहा था और सुधार करता जा रहा था।उन्होंने कहा, ‘मुझे ऐसा लगता है कि मैं आज इस जगह पहुंचा हूं क्योंकि काफी मुश्किलों के पलों का सामना किया है। मैं बहुत ही ज्यादा तनाव में था और खुदकुशी तक करने के विचार आते थे। मुझे याद है साल २००९ और २०११ यह नियमित तौर पर होता था और हर दिन मेरे अंदर ऐसे विचार आते थे।’विकेटकपर बल्लेबाज ने कहा, ‘क्रिकेट खेलते वक्त तो ऐसे ख्याल दिमाग से दूर रहते थे लेकिन जब मैच नहीं होता था ऑफ सीजन में तो बहुत ही ज्यादा मुश्किल हो जाता था। उन दिनों मैं बैठे बैठे सोचता था कि मैं ३ तक गिनती करूंगा और दौड़कर बालकॉनी से छलांग लगा दूंगा, लेकिन फिर कुछ था जो मुझे ऐसा करने से रोक लेता था।