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उनकी सलाह मुझे बहुत काम आई!-तृप्ति डिमरी

उत्तराखंड गढ़वाल की रहनेवाली अभिनेत्री तृप्ति डिमरी पहले दिल्ली और फिर मायानगरी मुंबई पहुंची। हालिया रिलीज फिल्म `बुलबुल’ में केंद्रीय भूमिका निभाकर वे सुर्खियां बटोर रही हैं। फिल्म `बुलबुल’ नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई, जिसका निर्माण अभिनेत्री अनुष्का शर्मा ने किया है। तृप्ति की डेब्यू फिल्म थी `पोस्टर बॉयज’। दूसरी फिल्म `लैला मजनू’ और अब `बुलबुल’ उनके करियर की तीसरी फिल्म है। पेश है तृप्ति डिमरी से हुई पूजा सामंत की बातचीत के प्रमुख अंश-

लॉकडाउन का समय आपने वैâसे व्यतीत किया?
लॉकडाउन के शुरुआती दिनों में खाना बनाना सीखने के साथ ही मैंने कई किताबें पढ़ीं। टीवी, वेब सीरीज और वेब फिल्म्स देखी। आखिरकार, टीवी देख-देखकर मैं बोर हो गई। मैं घर बैठनेवालों में से नहीं हूं। लेकिन एक दिन टीवी के न्यूज चैनल पर देखा कि हजारों लोग पैदल अपना सामान ढोते हुए हजारों किलोमीटर दूर अपने घरों की ओर निकल पड़े हैं। तब मुझे उनकी यातनाओं का एहसास हुआ और मैंने सोचा कि अपने घर में सुकून से बैठने की बजाए मैं बाहर जाने के लिए क्यों छटपटा रही हूं। तब मुझे अपनी सोच और गलती का अहसास हुआ।

आपने लॉकडाउन के दौरान क्या सीखा?
लॉकडाउन का ये दौर हम सभी के लिए बेहद कठिनाइयों भरा रहा। जिंदगी के ये कठिन दिन भुलाए नहीं भूलेंगे। नौकरी और करियर के चक्कर में हम सभी परिवार को भुला बैठे। लेकिन इस महामारी के संकट ने हम सभी को अपने घरों में रहने के लिए मजबूर किया और घर-परिवार के साथ जीना सीखा दिया। अपनों की कद्र करने का पाठ हम सभी ने सीखा।

फिल्म `बुलबुल’ आपको कैसे मिली?
मुझे `कास्टिंग एजेंसी वालों ने ऑडिशन के लिए बुलाया। मैंने ऑडिशन दिया। जब मुझे कहानी और किरदार के बारे में पता चला तो मेरे मन में खयाल आया कि अगर ये नयिका प्रधान रोल मुझे मिल जाए तो कितना अच्छा होगा। कुछ दिनों बाद मेरा दूसरा टेस्ट हुआ, तब मेरी मुलाकातत डायरेक्टर अन्विता से हुई। मुझे उम्मीद थी कि मुझे `बुलबुल’ के लिए कास्ट किया जाएगा। लेकिन दो-तीन हफ्ते बीत जाने के बाद जब कोई फोन नहीं आया तो मैं उत्तराखंड चली गई। एक दिन अचानक जब निर्देशिका अन्विता का फोन आया तो मेरी खुशी का ठिकाना न रहा।

`फिल्म की निर्मात्री अनुष्का शर्मा ने आपको कोई टिप्स दी?
अनुष्का शर्मा कोलकाता स्थित बवाली में एक मर्तबा आई थीं। उनमें कोई स्टारी तेवर नहीं थे। बहुत ही मिलनसार लगी वो। उन्होंने मुझसे कहा, `हर कोई अपना काम एक निश्चित समय में पूरा करना चाहता है। तुम नई हो इसलिए सभी तुमसे उम्मीद करेंगे कि तुम जल्दी शॉट ओके करो। बुलबुल एक कॉम्प्लिकेटेड किरदार है। अत: सेट पर कोई चाहे कितनी ही जल्दबाजी करे तुम अपना वक्त लेकर परफॉर्म करना। तुम्हें डरने की कोई जरुरत नहीं।’ अनुष्का ने मुझे बहुत मॉरल सपोर्ट दिया। उनकी सलाह मुझे बहुत काम आई।

राहुल बोस के साथ इंटिमेट सीन करते हुए कितनी असुविधा हुई?
बुलबुल का मंदबुद्धि देवर उस पर बलात्कार करता है। ये सीन कहानी के अनुसार बहुत अहम है, जो मुझे पहले ही बताया गया था। इस इंटिमेट सीन को फिल्म में यूं ही नहीं ठूसा गया है। इस दृश्य को फिल्माने से पहले मैं टेंशन में थी। राहुल बोस सेट पर अन्य टॉपिक्स पर मुझसे बात करते रहे, ताकि मैं उनके साथ कम्फर्टेबल हो जाऊं। अन्विता खुद महिला हैं और उन्होंने जितना हो सका, इसे सही तरीके से फिल्माया है।

इन दिनों नेपोटिज्म की चर्चा जोरों पर है। आपके लिए वैâसा रहा अब तक का सफर?
नेपोटिज्म तो हर फिल्ड में है। अगर पिता राजनीति में है, तो उनके बच्चे राजनीति में जाते हैं। अगर पिता लेखक हैं, तो लिखने की कला उनके बच्चों में आना स्वाभाविक है। वकीलों के बच्चे वकालत पढ़ते हैं। फिर एक्टरों के बच्चे एक्टिंग में आएं तो हंगामा क्यों बरपा है? मुझे एक ही बात अजीब लगती है कि एक्टरों के बच्चे फिल्मों में डेब्यू करने से पहले दो-चार फिल्में अपने आप ही पा लेते हैं क्योंकि वे एक्टर के बेटे है। हम जैसे नॉन फिल्मी लोगों को हर फिल्म में खुद को प्रूव करना पड़ता है तब जाकर हमें आगे काम मिलता है। हमारा स्ट्रगल और मुश्किल है। लेकिन दर्शक तय करते हैं कि उनकी पसंद क्या है। मेरा सफर धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है।