" /> उमा भारती ने अपना बलिदान देने के लिए कारसेवकों को रामलला मंदिर के निर्माण का श्रेय दिया

उमा भारती ने अपना बलिदान देने के लिए कारसेवकों को रामलला मंदिर के निर्माण का श्रेय दिया

– भाजपा नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती पहुंची अयोध्या

– हनुमानगढी और रामलला का दर्शन पूजन किया

अयोध्या विवाद पर फैसले के बाद पहली बार भाजपा नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती आज अयोध्या पहुंची।उन्होंने हनुमानगढी और रामलला का दर्शन पूजन किया।दर्शन के करने के बाद पत्रकारो से मुखातिब होते हुए उमा भारती ने कहा कि राम मंदिर आंदोलन को लेकर सवाल खड़ा करना करोड़ों राम भक्तों की आस्था पर संदेह करने जैसा है।उन्होंने कहा है कि मंदिर आंदोलन में उनका सहयोग सफल हुआ है। उमा भारती ने अपना बलिदान देने के लिए कारसेवकों को रामलला मंदिर के निर्माण का श्रेय दिया है।उन्होंने कि हमारा सौभाग्य है कि इतने बड़े महान कार्य में मुझे राम मंदिर आंदोलन से जुड़ने का अवसर मिला और मेरा इस महान कार्य में किंचित प्रयास सफल हुआ। उन्होंने राम मंदिर निर्माण होने का अपना बलिदान देने वाले कार सेवकों को दिया है।

वही उमा भारती ने कहा कि 2 दिसंबर 1992 की कारसेवा में शामिल थी।उन्होंने मंदिर आंदोलन को साजिश बताने पर बयान दिया है उन्होंने भारतीय ने कहा है कि यह कार्य लाखों लोगों के बीच हुआ है ऐसे में साजिश की कोई गुंजाइश नहीं है मंदिर आंदोलन पर सवाल खड़ा करना लाखों-करोड़ों राम भक्तों की आस्था पर प्रश्नचिन्ह लगाने जैसा है।उमा भारती ने कहा है कि मौजूदा केंद्र सरकार पर सीबीआई पर दबाव डालने का आरोप लगाया जाता है. लेकिन यह सच नहीं है. क्योंकि बाबरी विध्वंस मामले में जब उन्हें और उनके साथ वरिष्ठ नेताओं को आरोपी बनाया गया था तो मौजूदा समय में केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी. आपको बता दें कि उमा भारती बाबरी विध्वंस मामले में आरोपी हैं ऐसे में उन्होंने कहा है कि जब अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया है तो अगर उन्हें कोर्ट फांसी की सजा भी देता है तो भी उन्हें कोई शिकायत नहीं होगी. उमा भारती ने कहा है कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का उद्देश्य सफल हुआ है. ऐसे में कोर्ट जो भी निर्णय देगा वह स्वीकार्य होगा।उमा भारती ने कहा कि अयोध्या में बाबरी विध्वंस के बाद बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी बनाई गई जिसके बाद अयोध्या विवाद का राजनीतिकरण हुआ हजारों कारसेवकों के बलिदान पर सवाल खड़े किए गए और राम मंदिर आंदोलन को षड्यंत्र बताया जाने लगा. लेकिन अब हम अपने सामने रामलला का भव्य मंदिर बनता हुआ देखेंगे।