" /> ऊपरवाले ने मेरी ख्वाहिश पूरी कर दी!-परिधि शर्मा

ऊपरवाले ने मेरी ख्वाहिश पूरी कर दी!-परिधि शर्मा

२०१३ में `जी’ टीवी पर आई सीरियल `जोधा अकबर’ में परिधि शर्मा ने जोधा का किरदार निभाया था। इंदौर में रहनेवाली परिधि शर्मा की शादी तन्मय सक्सेना के साथ हुई है। शादी के बाद अपने करियर की शुरुआत करनेवाली परिधि `स्टार भारत’ पर आनेवाले शो `जगत जननी माता वैष्णोदेवी’ के कारण चर्चा में हैं। पेश है परिधि शर्मा से हुई
पूजा सामंत की बातचीत के प्रमुख अंश-

लॉकडाउन का समय आपने कैसे व्यतीत किया?
जब लॉकडाउन शुरू हुआ तो इत्तफाक से मैं छुट्टियों पर थी। मेरा परिवार इंदौर में रहता है। हम सब जब भी अपने परिवार के साथ होते हैं समय पंख लगाकर उड़ जाता है। खैर, लॉकडाउन में मैंने अपना यूट्यूब चैनल शुरू किया।

लॉकडाउन से आपने क्या कुछ सीखा?
किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि एक अनसुनी बीमारी पूरी दुनिया को खामोश कर सकती है। हजारों जानें जा सकती हैं। अब हम सबको ये समझ आ गया कि हम कम-से-कम चीजों में भी जिंदगी बसर की जा सकती है। जिंदगी जीने का सही तरीका लॉकडाउन ने हम लोगों को सिखाया।

लड़कियां शादी से पहले इंडस्ट्री ज्वॉइन करती हैं और आपने शादी के बाद ज्वॉइन किया?
मेरे परिवार में कोई भी इंडस्ट्री से ताल्लुक नहीं रखता है। विवाह के बाद अभिनय के प्रति मेरी रुचि को देखकर मेरे पति ने मुझे प्रोत्साहित किया और मैं इंडस्ट्री में आ गई। ऊपरवाले ने मेरी ख्वाहिश पूरी कर दी।

`जगत जननी माता वैष्णो देवी’ ये शो आपको  कैसे मिला?
मुझे पता चला कि इस शो का ऑडिशन होने जा रहा है लिहाजा, मैंने भी ऑडिशन दे दिया। कुछ दिनों बाद चैनल और प्रोडक्शन हाउस का मुझे फोन आया कि आपकी डिवाइन मुस्कान के चलते आपका सिलेक्शन शो के अहम किरदार के लिए कर लिया गया है।

किस तरह की तैयारियां करनी पड़ी आपको इस शो के लिए?
माता रानी भी पहले एक स्त्री ही हैं। स्त्री में अगर कोई अलौकिक गुण नजर आता है तो लोग कहते हैं वो स्त्री देवी समान है। मेरी स्माइल ईश्वरीय संकेत है, यह एक क्वालिटी अगर मुझमें है तो देवी समान शांति, आतंरिक शक्ति, ऊर्जा की आभा महसूस होने के लिए मैंने दिन में एक से दो घंटे मेडिटेशन शुरू किया, ताकि मुझमें ठहराव और शांति नजर आए।

माता वैष्णो देवी और आपमें कितनी समानता है?
वैसे तो हम सामान्य इंसानों की ईश्वर से कोई समानता हो ही नहीं सकती। बस, एक-दो चीजें हैं जिसे लेकर लगता है कि इस गुण का मुझमें वास है। मुझे भी एकता, अखंडता और समानता पर विश्वास है। मुझे लगता है थोड़ी देर के लिए ही सही जब मैं माता वैष्णोदेवी बनती हूं, तो उनकी सभी अच्छाइयां मुझमें समा जाती हैं।