एकला चलो रे…

इस लोकसभा चुनाव में सबसे ज्यादा किसी राज्य ने ध्यान खींचा तो वह है पश्चिम बंगाल। वहां कोई ऐसा चरण नहीं था जिसमें बम-गोलियां न चलीं। लोग मारे न गए। मगर इन सब से वहां की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को कोई फर्क नहीं पड़ता दिखा। वे अकेले ही पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ सबसे ज्यादा आग उगलनेवाली नेता बनी रहीं। जहां राहुल गांधी अपनी हर सभा में ‘चौकीदार चोर है’ कहना नहीं भूले, वहां ममता ने तो पीएम को थप्पड़ मारने की बात कहकर सनसनी पैâला दी। वे शायद सोच रही थीं कि कोलकाता में जो १८ दल के नेताओं को उन्होंने मंच पर जमा करने का कारनामा किया था, उसका शायद सब पर असर पड़े और विपक्ष या तीसरा मोर्चा प्रधानमंत्री के रूप में उनके नाम पर गौर करे। मगर एग्जिट पोल्स के आते ही दीदी भी दुबक ली हैं। उनका दिल टूट गया है। उन्होंने ईवीएम में गड़बड़ी का राग अलाप दिया है। हालांकि चंद्राबाबू ने कोलकाता में मिलकर उनसे चर्चा की है कि अगली सरकार किस तरह बन सकती है। दोनों ने एक-दूसरे को समर्थन देने का वादा किया है। मगर देखें आनेवाले दिनों में ऊंट किस करवट बैठता है? देश में इस वक्त जितने भी नेता हैं, उनमें मोदी के खिलाफ नफरत करने के मामले में दीदी टॉप पर हैं। उन्होंने भाजपा की कई रोड शो और सभाओं की परमिशन में रोड़े अटकाए। दीदी को डर था कि भाजपा उनकी जमीन छीन रही है इसलिए वहां हिंसा का नंगा नाच कुछ ज्यादा ही हुआ। जानकारों की मानें तो दीदी की तानाशाही ने बंगाल में उनका ज्यादा ही नुकसान किया है और वहां के आम लोग भी इससे तंग आ चुके हैं और अब वे खून-खराबे की बजाय विकास को तरजीह दे रहे हैं। ऐसे में दीदी की मायूसी समझी जा सकती है।