एकवचनी पुस्तक पर संजय राऊत का साक्षात्कार, लेखनी और वाणी से ही शिवसेनाप्रमुख लड़े

हिंदूहृदयसम्राट शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे महान योद्धा थे। योद्धा के रूप में ही वो लड़े और अपना जीवनयापन किया। धारदार लेखनी और तेजस्वी वाणी ही उनका शस्त्र था। इस शस्त्र के माध्यम से ही उन्होंने अंत तक लड़ाई लड़ी। हार से कभी नहीं डरे। शिवसेनाप्रमुख की लड़ाई के तरीके से आनेवाली पीढ़ियों को दिशा मिलेगी ऐसा शिवसेना नेता व सांसद संजय राऊत ने अपने भाषण में कहा।
बता दें कि फ्रैंड्स लायब्रेरी द्वारा आयोजित ‘ज्ञानगंगा आली आंगणी’ इस कार्यक्रम में सांसद संजय राऊत का साक्षात्कार पत्रकार राजेंद्र हुंजे ने लिए। एकवचनी पुस्तक पर आधारित इस साक्षात्कार में डोंबिवलीकरों की भारी भीड़ उमड़ी हुई थी। मजबूत राजनीति, संवेदनशील इंसान, प्रखर प्रवक्ता, पत्रकार और शिवसेनाप्रमुख के सानिध्य में बीते अनेक क्षणों का खुलासा सांसद राऊत ने अपनी खास शैली में किया। वे बोले बालासाहेब संवेदनशील राजनेता थे। वे पहाड़ जैसे होते हुए भी मन से बहुत कोमल थे। किसी भी प्रकार के संकट से कभी निराश नहीं हुए, न डरे। हमेशा बाघ की तरह जिए, लड़ते रहे इस प्रकार से केवल एक योद्धा ही जी सकता है।
कभी इनकार नहीं किया
शिवसेनाप्रमुख जिस भूमिका को अपनाते थे उस भूमिका पर कठोर बनकर खड़े रहते थे। उन्होंने कभी इनकार नहीं किया कि मैंने ऐसा कहा ही नहीं। इस प्रकार राऊत ने शिवसेनाप्रमुख के गुणों को अपने भाषण के माध्यम से सबके समक्ष पेश किया। राऊत ने कहा कि बालासाहेब का अनेक लोगों के साथ मतभेद था लेकिन समस्याओं के वक्त उन्होंने सबकी मदद की। ठोस भूमिका, स्पष्टता और गुणों के सहारे आज भी शिवसेना पहाड़ की तरह खड़ी है।