एक और बेटी को निगल गई व्हेल

खेल-खेल में जिंदगी निगलनेवाली ब्लू व्हेल ने एक और बेटी की जिंदगी निगल ली। ब्लू व्हेल गेम को नागपुर की छात्रा ने मन बहलाने के लिए खेलना शुरू किया था लेकिन तीन महीने में ही इस गेम ने उसकी जिंदगी के साथ ही खेल कर दिया। ‘ब्लू व्हेल’ के जाल में फंसकर जान गंवानेवाली छात्रा का नाम मानसी जोनवाल है। मानसी ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली है। एक सर्वे के मुताबिक दुनियाभर में अब तक १३० से ज्यादा लोगों ने इस गेम के कारण मौत को गले लगाया है। इसी के चलते केंद्र सरकार ने इस गेम पर प्रतिबंध भी लगाया है लेकिन मानसी की आत्महत्या ने अभिभावकों में एक बार फिर खौफ का माहौल पैदा कर दिया है।
नागपुर के साईकृपा नगर में रोते-बिलखते मानसी के पिता अशोक जोनवाल और मां नलिनी सदमे में हैं। उन्होंने जब मानसी की कलाई पर लिखा देखा कि ‘कट हिटर टू एक्जिट’ तो अपने आपको कोसने लगे क्योंकि कलाई पर ब्लेड से घाव करने के निशान भी थे, जिससे अंदेशा लगाया जा रहा है कि मानसी ने पहले भी आत्महत्या की कोशिश की होगी। पिता अशोक ने दूसरे अभिभावकों से अपील की है कि अपने बच्चों पर नजर रखें ताकि वे कभी ऐसे जानलेवा गेम के चक्कर में फंसकर जान न गंवा दें। मानसी के पिता ने बताया कि उनकी बेटी ब्लू व्हेल जैसे खतरनाक खेल के जाल में वैâसे फंस गई? उन्हें पता ही नहीं चला।
उन्होंने बताया कि आशंका है कि पिछले तीन महीने से मानसी ब्लू व्हेल गेम के चक्कर में फंसी थी। शायद वो चोरी-छुपे गेम खेल रही थी। अशोक की लेक्चरर पत्नी नलिनी की तबीयत ठीक नहीं रहती थी। इस कारण मानसी ने घर की पूरी जिम्मेदारी संभाल ली थी। वो स्वभाव से मिलनसार थी लेकिन कभी वह अपने मोबाइल फोन को हाथ लगाने नहीं देती थी। एक-दो बार पिता अशोक ने मोबाइल लेने की कोशिश की लेकिन मानसी ने उन्हें रोक दिया। पिता को आशंका है कि मानसी नहीं चाहती थी कि ऑनलाइन गेम के बारे में किसी को कुछ पता चल सके।
इंटरनेट और ऐप्स के जरिए मोबाइल तक पहुंच रहे इस खतरनाक खेल ने सबसे पहले मुंबई के १४ वर्षीय छात्र को अपना शिकार बनाया था, जो बड़ा होकर पाइलट बनना चाहता था। ३० जुलाई को उसने इमारत से कूदकर जाने दे दी थी। इसके बाद पुलिस ने इस गेम को लेकर एडवाइजरी जारी की थी। मुंबई के बाद इंदौर और महाराष्ट्र के सोलापुर में भी इस गेम के जाल में बच्चों के फंसने की खबरें आई थीं। १४ साल का बच्चा ब्लू व्हेल गेम की स्टेज पूरी करने के लिए घर छोड़कर पुणे जा रहा था। हालांकि समय रहते पुलिस ने उसे ढूंढ़ लिया, जिसके कारण उसकी जान बचा ली गई थी। माता-पिता के लिए छोड़े नोट में बच्चे ने लिखा था ‘मैं पुणे जा रहा हूं। मेरी लौटने की कोई योजना नहीं है।’