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एक दीया ननिहाल में

एक दीया ननिहाल में
आज अयोध्या में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में राममंदिर का भूमिपूजन हो रहा है। ऐसे में रामलला के ननिहाल में जश्न न हो यह कैसे हो सकता है। इसलिए छत्तीसगढ़ में कांग्रेस विधायक व शासन में संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने आज राज्य की राजधानी रायपुर में विशेष आयोजन का इंतजाम किया है। उल्लेखनीय है कि रायपुर के पास चंदखुरी में भगवान राम की मां कौशल्या का मंदिर है। राजधानी में इस संबंध में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी द्वारा किए गए प्रयासों को जोड़ते हुए उत्सव की तैयारी हो गई है। विकास उपाध्याय का तर्क है कि चूंकि अयोध्या में राम मंदिर बनाए जाने के लिए पहली बार राजीव गांधी के हाथों आधारशिला रखी गई थी तो हम सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का पालन किए जाने का जश्न मना रहे हैं। विकास उपाध्याय ने बताया कि राजीव गांधी का राम मंदिर का निर्माण का सपना अब जाकर पूर्ण हुआ है। अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण यदि आज होने जा रहा है तो कांग्रेस पार्टी इसकी पहली हकदार है, यह बात और है कि कांग्रेस ने अपने राजनीतिक फायदे के लिए राम मंदिर को कभी मुद्दा नहीं बनाया। उपाध्याय के क्षेत्र में आज १५ हजार दीये जलाए जाएंगे। जबकि एनएसयूआई के प्रदेशाध्यक्ष नरेश शर्मा ने ‘एक दिया ननिहाल में’ के तहत पूरे राज्य में दिए जलाने की घोषणा की है। इधर मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के निर्देश पर कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने भूमिपूजन की पूर्व संध्या पर अपने-अपने घरों में हनुमान चालीसा पाठ किया। इस संदर्भ में शनिवार को ही कमलनाथ ने एक बैठक की थी, जिसमें यह फैसला किया गया कि सभी कांग्रेसी कार्यकर्ता दो दिन तक इस अवसर को उत्सव के रूप में मनाएंगे। दूसरी तरफ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने सभी सरकारी मंदिरों में सुंदरकांड पाठ की व्यवस्था के आदेश दिए हैं।
भूल सुधारेंगे पासवान
मतलब ‘अब लौं नसानी अब न नसैहों’ की अनुभूति से गुजर रहे लोक जनशक्ति पार्टी के नेता रामविलास पासवान अब २००५ की गलती नहीं दोहराना चाहते। पासवान के मुताबिक उनसे २००५ में सियासी भूल हुई। २००५ के पहले विधानसभा चुनाव में त्रिशंकु विधानसभा थी और उनके पास २९ विधायक थे। तब नीतीश कुमार उनके पास प्रस्ताव लेकर आए थे कि साथ मिलकर सरकार बनाई जाए लेकिन उन्होंने उसे ठुकरा दिया था। २००५ में वे अपनी विचारधारा पर अड़े थे। वे चाहते थे कि बिहार का मुख्यमंत्री किसी मुसलमान को बनाया जाए लेकिन न नीतीश कुमार ने उनकी बात मानी और न ही लालू प्रसाद यादव ने। नतीजा यह हुआ कि उनकी पार्टी को तोड़ दिया गया और बाद में बिहार के विधानसभा को ही भंग कर दिया गया। एक निजी चैनल से उनकी बातचीत का लब्बो-लुआब यह है कि अब उनकी पार्टी सत्ता में सक्रिय भागीदारी चाहती है और भागीदारी भी ऐसी जिसमें प्रियपुत्र व पार्टी अध्यक्ष चिराग पासवान सूबे के मुख्यमंत्री बन सकें। इसलिए वे बोले- चिराग एक दिन बिहार के मुख्यमंत्री बनेंगे, देश का भी नेतृत्व करेंगे, मैंने २००५ में भूल की थी। हां, मैं चाहता हूं कि चिराग पासवान बिहार के मुख्यमंत्री बनें। ये कब होगा और कैसे होगा ये फिलहाल नहीं कह सकता हूं। लेकिन दो साल में, पांच साल में या फिर उसके बाद के समय में ये जरूर होने जा रहा है। साथ ही उन्होंने एक और भविष्यवाणी की कि चिराग पासवान देश का भी नेतृत्व करेंगे। हालांकि यह अभी नहीं होगा। पासवान यह बताना भी नहीं भूले कि अपने राजनीतिक जीवन में उन्हें कई मौके मिले जब वे बिहार का मुख्यमंत्री बन सकते थे लेकिन उन्होंने इन मौकों को नकार दिया। वीपी सिंह जब देश के प्रधानमंत्री थे तब भी उन्हें बिहार का मुख्यमंत्री बनने का प्रस्ताव मिला लेकिन उन्होंने इसे नहीं स्वीकारा।
ट्रैक पर स्टंट!
यह बिहार सरकार ने कोई नया ट्रैक नहीं बनाया है जिस पर मोटरसाइकिल चलाई जाए। न ही रेलवे ने ही ऐसी कोई व्यवस्था की है, जिसमें रेलवे ट्रैक पर मोटरसाइकिल से स्टंट करने की छूट हो। नेता और नियम, एक दम विरोधाभासी कल्पना है। वह नेता ही क्या जो नियम न तोड़े और जब साथ में समर्थको की भीड़ हो तब तो कहने ही क्या। मौका कोई भी हो नियम टूटना लाजिम है। इसलिए बाढ़ पीड़ितों से मिलने दरभंगा के हायाघाट पहुंचे जन अधिकार पार्टी के संरक्षक पप्पू यादव बुलेट पर सवार होकर आए। रास्ते में रेलवे का पुल आने के बाद भी पप्पू यादव ने अपना रास्ता नहीं बदला और रेलवे लाइन से होकर ही गुजरे। सबसे खास बात यह रही कि पप्‍पू यादव ने जान जोखिम में डालकर रेलवे लाइन के बीचो-बीच तेज गति से बुलेट से रेल पुल पार किया। इस दौरान उनके आगे और पीछे भारी संख्या में समर्थक भी दौड़ते दिखे। गनीमत यह रही कि रास्ते में कोई हादसा नहीं हुआ। जिस रास्ते पर पैदल चलना कठिन है, वहां एक पूर्व सांसद द्वारा नियमों की धज्जियां उड़ा कर इस तरह बुलेट चलाना कई सवाल खड़े कर रहा है। यही रेलवे ट्रैक थे जिन पर प्रवासी मजदूर कूटे भी गए और कटे भी। इसी तरह के ट्रैक पर चलने के अपराध में रेलवे पुलिस हवालात की सैर करा देती है। मगर जब पप्पू यादव जैसा नेता ट्रैक पर हो तब सारे नियम, कानून, व्यवस्था शिथिल पड़ जाते हैं। सरकार चाहे तो रेलवे ट्रैक मोटरसाइकिलों के लिए भी खोलकर अतिरिक्त राजस्व जुटा सकती है।
मौत और मजाक!
गुजरात के सूरत में अमरोली की रहनेवाली रुकमाबेन सूर्यवंशी कोरोना के चलते गुजर गईं। ११ दिन बाद जिंदा हुईं और जब पता चला कि उनकी मौत हो चुकी है तो एक बार फिर मर गईं। इसके लिए आप चाहें तो सिविल अस्पताल की व्यवस्था को जी भर कर खरी-खोटी सुना सकते हैं। गीता नगर सोसाइटी की रहनेवाली ६५ साल की रुकमाबेन सूर्यवंशी को १८ जुलाई को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। दूसरे दिन उनकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई। २० जुलाई को बेटे को जानकारी मिली कि मां की हालत स्थिर है। उन्हें जी-४ वार्ड में भर्ती किया गया है। शाम ४ बजे पता चला कि तबीयत अचानक बिगड़ गई। उसके बाद उनकी मौत हो गई। बेटे पवन की उपस्थिति में कोरोना प्रोटोकॉल के तहत उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। ३१ जुलाई को सिविल अस्पताल के कंट्रोल रूम से पवन को फोन आया कि उनका इलाज चल रहा है, तबीयत ठीक हो रही है। पवन ने फोन करनेवाले को जवाब दिया कि मेरी मां की मौत तो ११ दिन पहले ही हो चुकी है, आपको यह जानकारी किसने दी ? पहले पता कर लीजिए। उसके बाद कंट्रोल रूम से बात करनेवाले ने कहा- ठीक है, पता करके वापस फोन करता हूं। इसके बाद कंट्रोल रूम से सॉरी कहा गया और तब से यह स्तंभ लिखे जाने तक पवन के पास फोन नहीं आया। सवाल अब भी है कि जो महिला जिंदा है वह कौन है? न अस्पताल को चिंता है और न सरकार को।