" /> एक भी मिल मजदूर बेघर नहीं होगा! -मुख्यमंत्री

एक भी मिल मजदूर बेघर नहीं होगा! -मुख्यमंत्री

संयुक्त महाराष्ट्र की लड़ाई में मिल मजदूरों ने अपना खून-पसीना बहाकर इस लड़ाई को जीता है। मुंबई के साथ महाराष्ट्र को पल्लवित करने में शिवसेना के साथ हमेशा मिल मजदूर खड़ा रहा। शिवसेना के दिल में मिल मजदूर बसता है इसलिए मैं एक भी मिल मजदूर को बेघर नहीं होने दूंगा। उक्त विचार राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने म्हाडा में आयोजित मिल मजदूरों के घरों की लॉटरी निकालने के लिए आयोजित कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किया। मिल मजदूरों को संबोधित करते हुए उन्होंने आगे कहा कि अपने पूर्वजों के बलिदान को व्यर्थ मत जाने देना। किसी भी हालत में मकान को बेचना नहीं, ऐसी प्रतिज्ञा भी मुख्यमंत्री ने मिल मजदूरों से करवाई।
म्हाडा के अंतर्गत मिल मजदूरों के मकानों की चौथी लॉटरी कल म्हाडा के प्रांगण में निकाली गई। इसमें मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। मिल मजदूरों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मैं कोई भाषण नहीं दूंगा क्योंकि ये मेरा पारिवारिक कार्यक्रम है। मुझे मिल मजदूरों को मकान देते हुए बहुत खुशी हो रही है। मिल मजदूर शिवसेना का अंग रहा है। मराठी अस्मिता व संयुक्त महाराष्ट्र की लड़ाई में मिल मजदूरों की अहम भूमिका रही। आज मैं कितने भी घर दे दूं वो कम है क्योंकि मिल मजदूरों ने शिवसेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर महाराष्ट्र व मुंबई के विकास में अपना योगदान दिया है। शिवसेना मिल मजदूरों की कर्जदार है। विपक्ष पर प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि बड़बड़ाना उनका काम है। मेरा कार्य काम करना है। दो दिन पहले ही उन्होंने किसानों की कर्जमाफी की प्रक्रिया जोरों से जारी होने की बात कही।
कार्यक्रम में उपस्थित पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे ने मिल मजदूरों के नए आशियाने के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मिल मजदूरों और शिवसेना का पुराना रिश्ता रहा है। इस कार्यक्रम में गृहनिर्माण मंत्री जितेंद्र आव्हाड व शिवसेना के पदाधिकारी सचिन भाऊ अहिर तथा विनोद घोसालकर भी उपस्थित थे।

साढ़े ९ लाख रुपए में मिला घर
मिल मजदूरों के लिए मुंबई में बने मकानों की लागत को देखते हुए शुरुआत में इन मकानों की कीमत १८ लाख रुपए रखी गई थी। किंतु विरोध व पुनर्विचार के बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मिल मजदूरों को बड़ी दिलासा देते हुए साढ़े ९ लाख रुपए में मकान देने का निर्णय लिया। लॉटरी में शामिल मकान म्हाडा मुंबई मंडल की ओर से बनाए गए हैं, जिसमें बॉम्बे डाइंग मिल गृह प्रकल्प के अंतर्गत ७२० घर व बॉम्बे डाइंग के लोअर परेल स्थित स्प्रिंग मिल में २,६३० घर बनाए गए। साथ ही श्रीनिवास मिल के स्थान पर ५४४ घर बनाए गए हैं।

मिल मजदूरों के दु:ख खत्म हुए -महापौर
महापौर श्रीमती पेडणेकर ने कहा कि अब दुख के दिन खत्म हो गए हैं और सुख के दिन आए है। अंतिम मिल मजदूर को न्याय भी दिया जाएगा। इस अवसर पर बताया गया ये मकान मुंबई के सबसे अच्छी जगह पर हैंै और २२५ चौ. फीट के वन बीएचके मकान अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त हैं और आधुनिक समय की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए वडाला स्थित बॉम्बे डार्इंग मिल गृह प्रकल्प की जगह पर १५ मंजिली वाहनतल इमारत (पार्किंग टॉवर) का निर्माण किया गया है। इसके लिए कुल १ लाख ७४ हजार ३६ आवेदन मिल मजदूर एवं उनके वारिसों की ओर से प्राप्त हुए हैं।

अधिक से अधिक किफायती दरों में घर दिए जाएंगे! -गृहनिर्माण मंत्रा
कल लॉटरी के जरिए मिल मजदूरों को घर दिए गए। इस अवसर पर गृहनिर्माण मंत्री जितेंद्र आव्हाड ने कहा कि मुंबई पालिका क्षेत्र की बंद पड़ी हुई मिल के मिल मजदूरों को मकान देना सरकार का नीतिगत निर्णय है। भविष्य में अधिक से अधिक किफायती दरों में सस्ते मकान मुंबई में उपलब्ध कराए जाएंगे। कोई भी घर से वंचित नहीं रहेगा। झोपड़पट्टीवासी, मिल मजदूरों का सपना पूरा करने के लिए यह सरकार कटिबद्ध है। भविष्य में पुलिस, सरकारी चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के लिए भी १० फीसदी मकानों का समावेश होगा, यह भी श्री आव्हाड ने कहा।