एक साल में ४ भाजपा सांसदों ने किया भाजपा को राम-राम

भारतीय जनता पार्टी इन दिनों अपने ही सांसदों के भागने से परेशान है। पिछले एक साल में चार भाजपा सांसदों ने राम-राम बोलकर पार्टी को अलविदा कह दिया है। पिछले साल दिसंबर से लेकर इस दिसंबर तक चार भाजपा सांसदों ने न केवल सांसद पद से बल्कि भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है। कल बहराइच की भाजपा सांसद सावित्रीबाई फुले ने अपने सांसद पद के साथ ही भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है।
२०१९ में होनेवाले आम चुनाव से पहले ही भारतीय जनता पार्टी में भगदड़ मची हुई है। एक के बाद एक भाजपा सांसद पार्टी छोड़ रहे हैं। इसकी शुरुवात ८ दिसंबर २०१७ को हुई थी जब महाराष्ट्र के भंडारा-गोंदिया संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से सांसद रहे नाना पाटोले ने सबसे पहले इस्तीफा दे दिया था। राज्य में कर्ज की समस्या से परेशान किसानों की व्यथा देखकर पाटोले ने सांसद पद से इस्तीफा दे दिया था। भाजपा से इस्तीफा देकर पाटोले ने कांग्रेस में प्रवेश कर लिया था। पाटोले के साथ भाजपा में शुरू हुआ इस्तीफा देने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। २०१४ में लद्दाख से सिर्फ ३६ वोटों से जीत हासिल कर भाजपा के लिए इतिहास रचनेवाले सांसद धूपस्तान छिवांग ने भी इसी साल नवबंर में सांसद पद से इस्तीफा दिया था।
राजस्थान विधानसभा चुनाव से पहले राजस्थान में भाजपा सांसद हरीश मीणा ने भाजपा को झटका दिया था। राज्य के पूर्व पुलिस प्रमुख रहे पूर्व आईपीएस अधिकारी हरीश मीणा २०१४ का लोकसभा चुनाव भाजपा प्रत्याशी के रूप में जीते थे। दौसा से भाजपा सांसद बने मीणा ने भी कुछ दिन पहले ही सांसद पद के साथ ही भाजपा से इस्तीफा देकर कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए थे। अब चौथी बार भाजपा सांसद सावित्रीबाई फुले ने भाजपा को करारा झटका देते हुए पद से इस्तीफा दे दिया दिया है। वह कई मुद्दों को लेकर भाजपा से नाराज चल रही थीं। सावित्रीबाई फुले ने इस्तीफा देने के साथ ही भाजपा पर आरोप लगाया कि भाजपा समाज में बंटवारे की साजिश कर रही है।