एक हार अनेक दोष

एक जीत जहां ढेर सारे दोषों को ढंक देती है, वहीं एक पराजय उस ढक्कन को उघाड़ देती है। फिर उसमें से न केवल दोष निकलते हैं बल्कि छींटाकशी भी होती है और लोग अपनी-अपनी भड़ास भी निकालते हैं, जिसका मुंह बंद होता है वो भी खुल जाता है। ये सब मानवीय आदत है। अब देखिए न, टीम इंडिया की हार से सबसे ज्यादा खुश हुआ पाकिस्तान। मजा ये कि खुश वो होते हैं जो सबसे बड़े लूजर होते हैं। अपनी जमीन दिखती नहीं जो उजाड़ हो चुकी है, उन्हें तो वो हार दिखती है जो हिंदुस्थानी टीम की हो। पाकिस्तान लीग मैचों में ही बाहर हो गया था। उसे टीम इंडिया ने लगातार सातवीं बार विश्वकप में हराया था। अब वो सेमीफाइनल में टीम इंडिया की हार पर खुश है। उसका एक भूतपूर्व खिलाड़ी वकार युनूस कहता है कि इस हार के बाद खेल को गाली नहीं देनी चाहिए, ये सबक मिला। उसने तंज कसा था। खैर, एक परास्त व्यक्ति महाबली की छोटी-सी भी हार से बहुत खुश होता है इसलिए क्योंकि उसकी अपनी शक्ति क्षीण नजर आती है। पाकिस्तान के अलावा ऑस्ट्रेलिया के भी एक पूर्व क्रिकेटर हैं मार्क वॉ, वे भी खुश हुए इसलिए कि इसी टीम इंडिया ने उनकी टीम ऑस्ट्रेलिया को लीग मैचों में ही धोया था। उन्होंने ट्वीट कर टीम इंडिया के बल्लेबाजों पर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा, ‘ऐसा लगता है कि हिंदुस्थान के बल्लेबाजों ने स्विंग गेंदबाजी कभी खेली ही नहीं है।
बहरहाल, टीम इंडिया की हार में कई सारे पेच हैं मगर ये पेच खुलनेवाले नहीं अब सिवा इस पर चर्चा कर आईसीसी के दोषों को उजागर करने के। दरअसल ४८वें ओवर में जब धोनी बल्लेबाजी कर रहे थे तो उस वक्त न्यूजीलैंड के ४ खिलाड़ी ३० गज के घेरे के अंदर थे लेकिन धोनी जिस गेंद पर रन आउट हुए, उससे एक गेंद पहले न्यूजीलैंड ने फील्डिंग में बदलाव किया और ३० गज के सर्कल के अंदर सिर्फ ३ खिलाड़ी ही रह गए। हालांकि इस दावे की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है लेकिन जो फील्डिंग का ग्राफिक्स सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है उसके मुताबिक ३० गज के अंदर ३ ही कीवी खिलाड़ी थे जबकि पॉवर प्ले के वक्त ऐसा नहीं होना था। मान लीजिए, यदि अंपायर ये चालाकी देख लेता तो क्या होता? नो बॉल मिलती यानी एक प्रâी हिट। समझा जा सकता था, ऐसे में धोनी क्या करते? कीवी टीम की हार लगभग तय हो जाती किंतु ऐसा कुछ नहीं हुआ। परिणाम टीम इंडिया की पराजय हाथ आया।
धोनी को लेकर भी भड़ास निकाली गई। ये उन लोगों के लिए एक अच्छा अवसर था जो कभी धोनी के चलते कम चर्चा में आ पाए और अपनी टीम से रवानगी में धोनी को एक बड़ा कारण भी मानते रहे। इसमें गौतम गंभीर भी हैं। सौरव गांगुली भी और वीवीएस लक्ष्मण भी। वैसे तो इन लोगों ने विराट कोहली की उस एक बड़ी गलती पर उंगली उठाई जिसमें दिनेश कार्तिक की जगह धोनी को बल्लेबाजी के लिए भेजने की बात थी मगर इसके साथ ही उन्होंने धोनी को भी लपेटा। बार-बार ये कहते हुए कि वे एक धीमे बल्लेबाज हैं। हालांकि विराट और कोच रवि शास्त्री से वाकई ये बड़ी गलती हो गई थी मगर धोनी को खुद भी इस बात को सोचना चाहिए था। गौतम गंभीर का तो यही मानना है कि यदि आप खुद को बड़ा खिलाड़ी मानते हैं तो जिम्मेदारी उठाते हुए पहले बल्लेबाजी करने उतरते, पर ऐसा नहीं हुआ।
दूसरी ओर इस पराजय ने मैदान से बाहर भी कई दिल तोड़े। क्रिकेट हिंदुस्थान के लिए उनकी रगों में बहता है। इसके प्रति दीवानगी ऐसी है कि एक जीत उन्माद में बदल जाती है और एक हार उदासी के घने बादलों में। ये किसी भी खेल के लिए हालांकि सुखद स्थिति नहीं होती न ही उसके प्रेमियों के लिए। जब ऐसी खबर आती है तो बेहद दु:ख होता है। उस पराजय से बड़ा दु:ख। अब देखिए न, हार की खबर सुनते ही बिहार प्रदेश के किशनगंज में अशोक पासवान की हृदय गति रुकने से उसकी मौत हो गई। मृतक की उम्र लगभग ४९ वर्ष बताई जा रही है। मौत के बाद पूरे परिवार में मातम छा गया है। मामला किशनगंज के डुमरिया भट्ठा मोहल्ले का है। मृतक सदर अस्पताल में ड्रेसर के पद पर कार्यरत था। ऐसी खबरें ज्यादा चिंतित करती हैं। बनिस्बत उन खबरों से जो सट्टाबाजार से आती हैं। जी हां, हिंदुस्थान को जीत का दावेदार भी माना जा रहा था लेकिन कीवी टीम ने पासा पलट दिया। हिंदुस्थान पर सट्टा बाजार में ४.३५ रुपए का भाव था जबकि न्यूजीलैंड पर ४९ रुपए का भाव था। इसका मतलब था कि कीवी टीम हारी हुई थी मगर हुआ उल्टा और सट्टाबाजार में इस हार ने उन्हें लगभग कंगाल कर दिया। जिन लोगों ने न्यूजीलैंड पर दांव लगाया था, वे खुशी से झूम उठे मगर सट्टाबाजार बुरी तरह प्रभावित हुआ। ये खबरें एकबारगी निराश नहीं करती किंतु एक खेल को लेकर जीवन तक की बाजी लगा दी जाए ये अनुचित है।