एचआईवी पीड़ित विधवाओं को मनपा का सहारा

 हर महीने `१,००० की मदद
 मुंबई में ४,००० विधवाएं

एचआईवी एक ऐसी बीमारी है, जो जिंदगीभर साथ नहीं छोड़ती। मुंबई में ऐसे कई दंपति हैं, जो एचआईवी के साथ जी रहे हैं।
बीमारी के चलते यदि पति की मौत हो जाती है तो फिर खुद का और परिवार की जीविका चलाने का बोझ विधवा पर आ जाता है। ऐसे में इन एचआईवी ग्रसित विधवाओं का सहारा मनपा बनने जा रही है। प्रस्ताव के अनुसार मनपा द्वारा एचआईवी ग्रसित विधवाओं को हर महीने १,००० रुपए की आर्थिक मदद की जाएगी। मनपा की कार्यकारी स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पद्मजा केसकर ने कहा कि एचआईवी के साथ जी रहे जोड़े में से यदि परिवार का भरण-पोषण करनेवाले की ही मौत हो जाए तो उसके परिवार के अन्य सदस्यों पर क्या बीतेगी? इस बात का अंदाजा कोई नहीं लगा सकता है। पति की मौत के बाद पत्नी को बीमारी और आर्थिक कमी की दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ता है। मनपा द्वारा मरीजों को दवाइयां तो नि:शुल्क दी जाती हैं लेकिन आर्थिक मदद नहीं मिल पाती है। इसलिए हमने एक योजना बनाई, जिससे विधवाओं को हर महीने थोड़ी आर्थिक मदद की जा सके। हमने प्रस्ताव बनाकर मनपा के पास भेजा, जिसे मंजूर कर बुधवार को स्थायी समिति की बैठक में पेश किया जाएगा। मुझे आशा है कि विधवाओं का सहारा मनपा जरूर बनेगी और यह प्रस्ताव पारित हो जाएगा। एचआईवी मरीजों के लिए काम करनेवाली कई एनजीओ ने मनपा के इस पहल का स्वागत भी किया हैं।
इलाज कराओ, पैसे पाओ!
मुंबई एड्स नियंत्रण सोसाइटी की प्रमुख डॉ. श्रीकला आचार्य ने बताया कि हमने बजट में ही २.४ करोड़ रुपए की मांग उक्त योजना के लिए की थी। रिकॉर्ड के अनुसार हमारे पास में ४,००० विधवाएं हैं। सभी का वेरिफिकेशन किया जाएगा और उनके दस्तावेज देखे जाएंगे। इसके बाद उन्हें पैसे दिए जाएंगे लेकिन यह आर्थिक मदद उन्हीं को मिलेगी, जो नियमित जांच और इलाज के लिए हमारे पास आते हैं।