" />  एटा में सुनाई देगी घुंघरू और घंटी की खनक, मजदूरों की उम्मीद जगी- चिकोरी सहित अन्य इकाइयां शुरू

 एटा में सुनाई देगी घुंघरू और घंटी की खनक, मजदूरों की उम्मीद जगी- चिकोरी सहित अन्य इकाइयां शुरू

आखिरकार एटा जनपद में भी उद्योगों की घंटी बज ही गई। शुक्रवार से एक जिला-एक उत्पाद में चयनित और जिले का प्रमुख उत्पाद घुंघरू और घंटी उद्योग को भी हरी झंडी मिल गई। शनिवार से यहां भट्टियां धधकते ही इनकी खनक सुनाई देने लगेगी। इससे पूर्व जिले में चिकोरी, फर्नीचर, आटा चक्की जैसे उद्योग भी शुरू हो चुके हैं।

तीसरे लॉकडाउन के बाद से ही शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन ने उद्योगों को संचालित करने की हरी झंडी दे दी थी। यहां 35 प्रतिशत मजदूरों के साथ काम कराया जा रहा है। लघु और मझोले उद्योगों में तो मालिक सहित उसके परिवार के लोग शामिल होकर कारोबार के शुरूआती चरण में हैं, जबकि बड़ी इकाइयों को मजदूरों की दरकार है। यही कारण है कि उद्योग गति नहीं पकड़ पा रहे हैं।

घुंघरू-घंटी कारोबार को मिली अनुमति
उपायुक्त उद्योग अनुराग यादव ने बताया कि शुक्रवार को शासन से घुंघरू और घंटी के कारोबार को संचालित करने की अनुमति मिल गई है। इस कारोबार में जुटे उद्यमियों को अवगत करा दिया गया है कि वह अपना कारोबार सरकार की गाइड लाइन के अनुरूप शुरू कर सकते हैं।

जिले में हैं तीन हजार उद्योग पंजीकृत
कृषि प्रधान जिले का जलेसर कस्बा जहां घुंघरू और घंटी उद्योग के लिए देशभर में विख्यात है, वहीं यहां करीब पांच सौ के आसपास चिकोरी की फैक्ट्रियां हैं और आटा चक्की, फर्नीचर सहित अन्य लघु और मझोले उद्योग हैं।

उम्मीद जागी
घुंघरू-घंटी उद्योग से करीब दस हजार मजदूर जुड़े हुए हैं, जो उद्योग बंद होने के चलते बेरोजगार हो चुके हैं। रोजगार न मिलने के कारण अब तक की जमा पूंजी भी खर्च हो गई है। मजदूरों को अब उम्मीद बंधी है कि भट्ठियां शुरू होने से उनके परिवार के भरण-पोषण की व्यवस्था पटरी पर लौटेगी।

दिया गया था प्रशिक्षण
जलेसर के घुंघरू उद्योग को शासन ने एक जनपद- एक उत्पाद में शामिल कर 300 कारीगरों को प्रशिक्षण दिया था। एमजीएम इंटर कॉलेज के मैदान में दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया था।

खाने के लाले पड़ रहे हैं
घुंघरू घंटी बनाने का काम करते हैं। पिछले 50 दिन से खाली बैठे हैं। अब तो खाने के लाले पड़ रहे हैं। कारखानों में काम ही नहीं है तो मालिक हमें मजदूरी कहां से दें। – जितेंद्र सिंह, मजदूर।

जेब पूरी तरह हुई खाली
पचास दिन में जो कुछ जोड़ा था, सब खर्च हो गया। अब उद्योग चल नहीं रहे और लोग बेरोजगार बैठै हैं। एक-एक भट्ठी पर दर्जनभर मजदूर काम करते हैं। सभी का यही हाल है, कैसे गुजारा हो। – अमित कुशवाह, मजदूर।

सौ करोड़ से अधिक का व्यापार प्रभावित
लॉकडाउन से करीब 100 करोड़ से अधिक का व्यापार प्रभावित हुआ है। गोदाम घुंघरू और घंटी में भरे हुए हैं लेकिन ट्रांसपोर्टेशन एवं अन्य व्यवस्थाएं चालू न होने के कारण माल बाहर नहीं जा पा रहा। – कपिल गुप्ता रानू, उद्यमी।

मजदूर नहीं मिल रहे
प्रशासन के कहने पर चिकोरी की फैक्टरी शुरू तो करा दी गई है लेकिन मजदूर नहीं मिल पा रहे हैं। शासन की गाइडलाइन के अनुसार मात्र 20 मजदूरों से काम कराया जा रहा है। – दिनेश वार्ष्णेय, चिकोरी उद्यमी।

काम शुरू कर सकते हैं
शुक्रवार को शासन से गाइडलाइन आ गई है। अब घुंघरू और घंटी का कारोबार आरंभ किया जा सकेगा। इस संबंध में कारोबार से जुड़े उद्यमियों को बता दिया गया है। वह 35 प्रतिशत मजदूरों के साथ गाइडलाइन का पालन करते हुए काम शुरू कर सकते हैं। इसके लिए वाहन और मजदूरों के आने-जाने के लिए पास की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। – अनुराग यादव, उपायुक्त उद्योग।