एयरपोर्ट की तर्ज पर बनेंगे ड्रोन पोर्ट

मुंबई सहित देशभर में ड्रोन से सामानों की डिलिवरी का सपना हकीकत में तब्दील होगा और डिलिवरी बॉय की बजाय ड्रोन आपके घर दस्तक देगा। मंगलवार को इसका मसौदा जारी करते हुए नागर विमानन मंत्रालय ने ड्रोन के लिए डेडिकेटेड कॉरिडोर (विशेष मार्ग) और एयरपोर्ट की तर्ज पर ड्रोन पोर्ट बनाने का प्रस्ताव पेश किया है। ड्रोन पोर्ट से ही ड्रोन उड़ान भरेगा और अपना कार्य पूरा कर वापस लौटेगा, बिल्कुल हवाई जहाज की तरह।
ड्रोन की उड़ान से पहले पुलिस की अनुमति, प्रतिबंधित क्षेत्र से दूरी, ४०० मीटर के ऊपर उड़ान पर अंकुश जैसे कई समस्यों से जल्द ही छुटकारा मिलेगा। सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट’ (सीएआर) १.० के तहत ड्रोन के पंजीकरण के लिए ‘डिजिटल स्काय प्लेटफॉर्म’ पहले से परिचालन में है। अब मंत्रालय ने सीएआर २.० पर मसौदा नीति नोट जारी किया है। इस मसौदे में सरकार ने ड्रोन परिचालन के लिए अनुकूल माहौल बनाने पर विशेष ध्यान दिया है। ड्रोन के लिए अलग मार्ग स्थापित करने, ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम तैयार करने, ड्रोन पायलट को विशेष ट्रेनिंग व इंश्योरेंस देने की बात कही गई है। सुरक्षा के लहजे से ड्रोन के लिए लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन व अन्य सुरक्षा पहलुओं को अनिवार्य किया जाएगा। ब्लूडस्ट्रीम के संस्थापक व एमआईटी मणिपाल से एयरोस्पेस की पढ़ाई कर निकले अंशुल शर्मा ने बताया कि सरकार द्वारा बनाए गए इस मसौदे से ड्रोन के जरिए सामानों के लेन-देन का रास्ता साफ हो जाएगा। इस मसौदे ड्राफ्ट होने में अभी मार्च तक का समय लग जाएगा। यदि यह अमल में आता है तो रक्त की किल्लत से जूझ रहे ग्रामीण इलाकों में ड्रोन के जरिए जल्द रक्त की आपूर्ति भी की जा सकेगी। इसी के साथ व्यापार को भी काफी गति मिलेगी।

क्या काम आएगा ड्रोन?
एमेजॉन, फ्लिपकार्ट जैसी ई-कॉमर्स कंपनियां अपना सामान ड्रोन के जरिए घरों तक पहुंचा सकती हैं। अति आवश्यक दवाएं, रक्त, अंग व अन्य महत्वपूर्ण चीजें कम समय में एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजी जा सकती हैं। इसी के साथ फास्ट फूड जैसे पिज्जा, बर्गर, पॉपकॉर्न आदि भी भेजे जा सकते हैं।

ड्रोन के प्रकार व इस्तेमाल
ड्रोन कई प्रकार के होते हैं, जैसे नैनो, माइक्रो और मेगा ड्रोन। नैनो ड्रोन मात्र २०० से २५० ग्राम का होता है। दिसंबर २०१८ में ड्रोन को लेकर जारी किए गए विनियम के मुताबिक २५० ग्राम तक के ड्रोन के लिए किसी भी परमिशन की जरूरत नहीं है। यह ड्रोन फिल्म व शादियों की वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता है। २५० ग्राम से लेकर २ किलो तक के ड्रोन माइक्रो श्रेणी में आता है जबकि २ से २५ किलो स्माल (छोटा), २५ से १५० किलो का मध्यम और उससे अधिक लार्ज (बड़े) ड्रोन के श्रेणी में आते हैं।