एयरपोर्ट से उड़ जाएंगे पंछियों के आशियाने,  २.५ लाख पंछियों की जान को खतरा

नई मुंबई शहर में बन रहे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से पंछियों पर भी खतरा मंडरा रहा है। पांच बड़े खाड़ी किनारों पर मिट्टी भरनी से करीब २.५ लाख पंछियों का आशियाना उजड़ता दिखाई दे रहा है। सिडको ने एयरपोर्ट बनने की शुरुआत में पंछियों को अन्य जगह बसाने की बात कही थी। बांबे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी (बीएनएचयस) नामक संस्था ने कोस्टल वेटलैंड एंड वॉटर बर्ड्स ऑफ नई मुंबई के तहत एक रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें साफ तौर पर खाड़ी तथा झील को मिट्टी से भरनी करने का उल्लेख करते हुए पंछियों की जान को खतरा बताया है। एयरपोर्ट के निर्माण कार्य में खाड़ी तथा झील को मिट्टी से भरनी कर जगह को समतल किया जा रहा है। पंजे, भेंड़खल, बेलपाड़ा (उरन), ट्रेनी सिप चाणक्य इलाके के खाड़ी किनारे की कई हेक्टेयर जमीन को मिट्टी डालकर समतल करने से पंछियों का बसेरा उजड़ रहा है। वैसे भी नई मुंबई शहर में डेवलपमेंट के नाम पर कई डेब्रिज माफियाओं ने खाड़ी किनारे पर अवैध डेब्रिज डालकर मैंग्रोव्स को हमेशा के लिए नष्ट कर दिया है। पंछियों को बचाने में आगे आए वन शक्ति संस्था के प्रमुख पर्यावरण प्रेमी दयानंद स्टेलिन ने बताया कि पंछियों को बचाने में सिडको लापरवाही बरत रही है। गिरगिटमार, अंध बगुला, कठ सारंग, कचाटोर, छोटा बोग, हंस, गुगरल, काला बगुला, फ्लेमिंगो आदि पंछियों की प्रजातियां तथा विदेशी पंछियों की भरमार से खाड़ी किनारा सुशोभित रहता था। खाड़ी गायब होने से पंछियों की प्रजातियां लुप्त होती जा रही हैं।