एलिवेटेड कॉरिडोर की कटिंग

मेट्रो का साइड इफेक्ट
सीएसएमटी के बजाय वडाला से पनवेल तक बनेगा
ठंडे बस्ते में गई सीएसटी-पनवेल एलिवेटेड फास्ट कॉरिडोर परियोजना में एक बार फिर मुंबई रेल विकास निगम ने जान फूंकने की कोशिश की है। हालांकि जान फूंकने के साथ ही ४७ किलोमीटर के इस एलिवेटेड कॉरिडोर की कटिंग भी कर दी गई है। एमआरवीसी की नई योजना के तहत अब ये कॉरिडोर सीएसटी के बजाए वडाला से पनवेल तक बनेगा। इसकी वजह मेट्रो का साइड इफेक्ट बताया जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक वर्तमान में हार्बर लाइन पर केवल स्लो लोकल ट्रेन ही चलाई जा सकती है। भूमि के अभाव में एमआरवीसी ने सीएसटी-पनवेल फास्ट एलिवेटेड कॉरिडोर की योजना बनाई थी लेकिन अधिकारियों की मानें तो मुंबई में मेट्रो रेल कॉरिडोर के निर्माण के कारण इस परियोजना पर दोबारा विचार करने का विकल्प एमआरवीसी के पास रेलवे ने रखा था।
एमआरवीसी के अधिकारियों की मानें तो सीएसटी के पास अंडर ग्राउंड मेट्रो का निर्माण होना है, ऐसे में सीएसटी-पनवेल एलिवेटेड फास्ट कॉरिडोर को सीएसटी के बजाए वडाला से पनवेल तक बनाने की योजना पर काम किया जा रहा है। इस नई योजना से एलिवेटेड रेल कॉरिडोर के ११ स्टेशन के बजाए ९ स्टेशन होंगे। इस संबंध में एक रेल अधिकारी का कहना है कि योजना के अनुसार सब कुछ ठीक रहा तो इस कॉरिडोर के बनाने से हार्बर के लाखों यात्रियों का सफर आरामदायक होगा। बता दें कि ४७ किलोमीटर के इस कॉरिडोर पर चलनेवाली ट्रेन वातानुकूलित होगी। सीएसटी-पनवेल एलिवेटेड कॉरिडोर की अनुमानित लागत १४,५६१ करोड़ रुपए थी। इस परियोजना की लागत का ५० प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार और ५० प्रतिशत हिस्सा एमआरवीसी वहन करेगी। यह योजना एमयूटीपी-३ए के तहत अमल में लाई जाएगी। इस कॉरिडोर के बन जाने से डेढ़ घंटे का सफर लगभग ३५ से ४० मिनट में तय हो पाएगा। इस रूट पर कुल ९ स्टेशन होंगे जिनमें वडाला, कुर्ला, चेंबूर, मानखुर्द, वाशी, नेरुल, सीबीडी बेलापुर, खारघर और पनवेल स्टेशन का समावेश है।