" /> ऐसा पुरुषोत्तम बस एक है!

ऐसा पुरुषोत्तम बस एक है!

दुनिया में अनेक जीवनशैलियां हैं। अनेक सभ्यताएं व संस्कृतियां हैं। इनमें सुखी समाज के स्वप्न हैं। लेकिन भारत की विश्ववारा संस्कृति में मनुष्य और प्रकृति, मनुष्य और राष्ट्र, मनुष्य और मनुष्य तथा मनुष्य और ब्रह्माण्ड के सम्बंधों का गहन आचार शास्त्र है। इस संस्कृति व अनुभूति में प्रत्येक प्राणी की गरिमा व महिमा का सम्मान व स्वीकृति है। सबको स्वतंत्रता है। इस स्वतंत्रता की विस्तीर्णता दूसरे की स्वतंत्रता की सीमा परिधि तक है। भारत के पूर्वजों ने इसे मर्यादा कहा है। यहां विराट जलों वाले समुद्र भी मर्यादा में हैं। सूर्य चंद्र सब मर्यादा में हैं। वैदिक पूर्वजों ने संपूर्ण ब्रह्माण्ड को ऋत नियमों के अधीन बताया है और मर्यादा में भी। लेकिन गूढ़ दर्शन को समझना आसान नहीं होता। इसे समझाना और भी कठिन होता है। ऐसी कठिनाई में सभी उदात्त तत्वों वाले नायक ही अनुकरणीय होते हैं। वे अपने आचरण से सत्य, ऋत, मर्यादा के तत्वों को प्रकट करते हैं और मर्यादा व शील का आचारशास्त्र रखते हैं। आदिकवि वाल्मीकि ने भारतीय इतिहास के मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का चरित्र चित्रण किया। रामकथा की धूम मच गई। सारी दुनिया श्रीराम के सम्मोहन में है। ऐसा पुरुषोत्तम बस एक है। द्वितीयो नास्ति।
विश्व इतिहास में श्रीराम जैसा दूसरा महानायक नहीं है। वह इतिहास में हैं, इतिहास से परे भी है। वे प्राचीन भारतीय दर्शन, संस्कृति और शीलाचार के प्रतीक हैं। श्रीराम मनुष्य होने के कारण ससीम पुरूष हैं, लेकिन पुरुषोत्तम होने के कारण असीम हैं। राम यत्र तत्र सर्वत्र रचे बसे हैं। भारतवासियों के अधिकांश नाम श्रीराम या उनकी कथा से जुड़े नायकों के नाम पर हैं। श्रीराम के जीवन, आदर्श राष्ट्र जीवन के आदर्श हैं। वह प्राचीन सामाजिक नियम से बधे हुए अनुशासित राजकुमार और नियमबद्ध राजा व तपस्वी हैं। उनके संबंध में भूतकाल में सोचना अच्छा नहीं लगता। श्रीराम का नाम यश तीनों कालों में व्यापक है। श्रीराम वर्तमान हैं, भूत हैं और भविष्य भी हैं। वह विश्व के अवनि अम्बर उपस्थित है। प्रत्येक समाज में परंपरा के प्रस्थान बिंदु प्रायः आदर्श नायक ही होते हैं।
लोक परंपरा में रमता है। इससे जीवनरस पाता है। नियम पालन करने वाले महानायक को प्यार करने लगता है। ऐसे महानायक का इतिहास लिखा जाता है। उसपर कविताएं लिखी जाती हैं। उसकी स्तुतियां होती हैं। स्तुति वाचन के लिए मंत्र रचे जाते हैं। उसकी गाथाएं गाई जाती हैं। कथा चलती है। इनसे आदर्श आचार व्यवहार की प्रेरणा मिलती है। संप्रति सारी दुनिया में राम लहर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते ०५ अगस्त को अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का भूमि पूजन किया है। कोरोना महामारी के कारण अयोध्या में सीमित लोगों का आना-जाना ही संभव हो पाया है, लेकिन पूरे दिन लोग इलेक्ट्रानिक समाचार माध्यमों से चिपके रहे। आकाश में विराजमान सूर्य भी अपने वंश के तेज और यश की इस ऐतिहासिक घटना को मुदित मन देख रहे थे। श्रीराम सूर्यवंशी हैं। सरयू उनकी स्मृति में पुलकित थी। अयोध्या नृत्य मगन।
श्रीराम साधारण मनुष्य जैसे पृथ्वी ग्रह पर प्रकट हुए। वे साधारण राजकुमार से अपने तप बल के कारण मर्यादा पुरुषोत्तम बने। नियति ने उन्हें वनवास दिया। वह वनवासी होकर १४ वर्ष तपस्वी रहे। पत्नी सीता का अपहरण हुआ। उन्होंने सभी वर्गों को जोड़ते हुए किष्किंधा के राजा बालि को पराजित किया और उसके भाई सुग्रीव को राज सिंहासन सौंपा। सत्ता के इस हस्तान्तरण में राम ने नये राजा सुग्रीव से आदर्श राज्य संचालित करने की अपेक्षा की। लंका के राजा रावण से आमने-सामने युद्ध हुआ। श्रीराम की सेना में सभी वर्गों का सहअस्तित्व और आदर था। रावण मारा गया। श्रीराम ने लंका में भी अपना राज्य स्थापित नहीं किया। रावण के सगे भाई विभीषण को ही राज सिंहासन सौंपा। धर्म व मर्यादा इस नए राज्य का आदर्श था। श्रीराम लोकआनंद के कर्ता विधाता हैं। वे अंतर्यामी हैं। श्रीराम सबके प्रिय और सब श्रीराम के प्रिय।
श्रीराम के जीवन में अनेकशः चुनौतियां आर्इं। पिता ने वनगमन का आदेश दिया। वन में सीता हरण हो गया। लंका युद्ध में भाई लक्ष्मण पर प्राणघातक हमला हुआ राम आहत थे। पूरी राम कथा आसुओं से डूबी विश्रांत महासागर है। इतिहास में राजा अनेक हुए हैं। लेकिन किसी भी राजा को पूरा देश नहीं जानता। राजा राम को देश का हर एक जन जानता है। उपासना करता है। मैं छोटा था। गांव में अखंड रामायण का पाठ था। इसी पाठ में ही पहली बार रामचरित मानस के कुछ प्रसंगों से मेरा परिचय हुआ। पूरी रामायण को एक साथ पढ़ना अखंड पाठ कहा जाता है। आस्था है कि एक साथ रामायण पढ़ने से दुख दूर होते हैं। श्रीराम अखिल लोकदायक विश्राम हैं। उनका स्मरण मंगल भवन अमंगलहारी है।
श्रीराम राष्ट्रजीवन के आदर्शो का पालन करते हुए नायक बने। फिर तपते हुए नायक से महानायक। फिर संस्कृति की आंच में दग्ध होते मर्यादा पुरूषोत्तम हुए और फिर अकल्पनीय पौराणिक पात्र हो गए। श्रीराम सारी दुनिया के लिए अविश्वसनीय मिथक के रूप में भी प्रतिष्ठित हैं। राम कथा के प्रति लोगों में विश्वास है यह संसार को आनंदित करने वाली कथा है। इस कथा के पात्र सुंदर हैं। हनुमान भक्ति का चरम परम आकाश। वे आकाश मार्ग से उड़ते हैं। उड़कर समुद्र पार करते हैं। लंका दहन करते हैं, राम की भक्ति का प्रभाव ऐसा ही है। श्रीराम स्वयं समुद्र पार करने के लिए सहयोगियों से सेतु बनवाते हैं। वही उनके भक्त हनुमान सीधे उड़कर लंका पहुंच जाते हैं। रूखी बुद्धि के अनुसार आकाश मार्ग से उड़ने वाली घटना पर विश्वास नहीं होगा। इसी प्रकार लंका विजय के बाद कुबेर के विमान से अयोध्या लौटने वाली घटना पर भी जल्दी से विश्वास नहीं होता। लेकिन भारत का मन वैदिक काल के पहले से ही आकाशचारी रहा है। ऋग्वेद के ऋषियों ने ऋचा मंत्रों को भी परमव्योम निवासी कहा है। नारद धरती से आकाश तक घूमते ही थे। आस्तिक काव्य से बने वातावरण और शुद्ध हृदय से ही ऐसी घटनाओं का तत्व समझा जा सकता है।
वह नियम अनुशासन में बधी होती है। इसीलिए अग्नि देवता हैं। लेकिन इसके लिए उन्हें अपने हृदय र्का इंधन जलाना पड़ता है। नियमबद्धता और अनुशासन पालन तप मांगते हैं। तप की अग्नि में जलकर ही नायक महानायक बनते हैं। सत्य के साथ जीना दुष्कर मार्ग है। वह भी मर्यादा के साथ जीना और भी कठिन है। कठिन तपस्या है मर्यादा पुरुषोत्तम होना। श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। ५ अगस्त को अयोध्या में ऐतिहासिक उत्सव हुआ। करोड़ों लोगों ने इस उत्सव को ध्यान से देखा। कार्यक्रम में उपस्थित होने का निमंत्रण मुझे भी मिला था। लेकिन स्वास्थ्य गड़बड़ी के कारण उपस्थित नहीं हो सका। तन लखनऊ में था। मन अयोध्या में। यह अच्छी बात है तन कहीं रहे, मन अयोध्या में ही रहे तो सौभाग्य!