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और कहीं दूर जब दिन ढल गया…

नहीं रहे कई कालजयी गीतों के लेखक योगेश

फिल्म आनंद का कालजयी गीत ‘कहीं दूर जब दिन ढल जाए, शाम की दुल्हन बदन चुराए…’ सुनकर आज भी मन आनंदित हो उठता है। मुकेश की दिल छू लेनेवाली आवाज में गाए इस  गीत के रचयिता योगेश नहीं रहे। कल उनका निधन हो गया। स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर ने उनके निधन पर श्रद्धांजलि दी है।
योगेश का पूरा नाम योगेश गौर था।  उनके निधन पर हिंदी सिनेमा जगत के जाने-माने कलाकारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। गायिका लता मंगेशकर ने सोशल मीडिया पर ट्वीट कर शोक जताया।
लता मंगेशकर ने लिखा- ‘मुझे अभी पता चला कि दिल को छूनेवाले गीत लिखने वाले कवि योगेश जी का आज स्वर्गवास हो गया है। ये सुनकर मुझे बहुत दुख हुआ। योगेश जी के लिखे गीत मैंने गाए। योगेश जी बहुत शांत और मधुर स्वभाव के इंसान थे। मैं उनको विनम्र श्रद्धांजलि अर्पण करती हूं।’ योगेश के कई गीत लता मंगेशकर ने गाए। योगेश का लिखा गीत ‘जिंदगी कैसी है पहेली ये हाय…’ भी काफी लोकप्रिय हुआ था। गीतकार योगेश ने 60-70 के दौर में कई बेहतरीन गीत हिंदी सिनेमा को दिए। इनमें ‘आनंद’ फिल्म के गीत ‘कहीं दूर जब दिन ढल जाए’ और ‘जिंदगी कैसी है पहेली’ जैसे गीत शामिल हैं। लखनऊ में 19 मार्च 1943 को जन्मे गीतकार योगेश ने कई बेहतरीन गीत हिंदी सिनेमा को दिए। योगेश ने अपने करियर की शुरुआत 1962 में आई फिल्म ‘सखी रॉबिन’ की थी। इस फिल्म के लिए उन्होंने 6 गाने लिखे थे। योगेश की आखिरी बड़ी रिलीज फिल्म ‘बेवफा सनम’ थी।
योगेश की मुख्य फिल्मों में ‘मिली’, ‘आजा मेरी जान’, ‘मंजिलें और भी हैं’, ‘बातों-बातों में’, ‘रजनीगंधा’, ‘मंजिल’ सहित अन्य कई फिल्में शामिल हैं। योगेश के लिखे कई गीत काफी लोकप्रिय हुए जिनमें ‘रिमझिम गिरे सावन, सुलग सुलग जाए मन (मंज़िल), रजनीगंधा फूल तुम्हारे, महके मन के आंगन में (रजनीगंधा), आए तुम याद मुझे, गाने लगी हर धड़कन (मिली), कई बार यूं भी देखा है, ये जो मन की सीमारेखा है (रजनीगंधा), कहां तक ये मन को अंधेरे छलेंगे (बातों बातों में), बड़ी सूनी सूनी है ज़िंदगी, ये ज़िंदगी (मिली), न बोले तुम न मैंने कुछ कहा (बातों बातों में), कोई रोको न दीवाने को, मन मचल रहा कुछ गाने को (प्रियतमा), मैंने कहा फूलों से, हंसो तो वो खिलखिला के हंस दिये (मिली), न जाने क्यूं होता है ये ज़िंदगी के साथ (छोटी सी बात) आदि प्रमुख हैं।