…और जेब कट गई!

कल आंखें खुलीं तो सदमे की खबर से दिन की शुरुआत हुई। श्रीलंका के गिरिजाघरों और होटलों पर नराधम आतंकवादियों ने विस्फोटों की झड़ी लगा दी थी। १६० से अधिक लोगों की मौत हो गई और ३०० से ज्यादा लोग घायल हो गए। श्रीलंका के इतिहास में इससे भयानक आतंकी हमला शायद ही कभी हुआ होगा। इंटेलिजेंस इनपुट पुलिस को पहले ही मिल चुका था। जेहादी चर्चों को निशाना बनाना चाहते थे। इंटेलिजेंस रिपोर्ट विदेशों से भी मिली थी। कहा गया था ‘नेशनल तौहीत जमात’ (एनटीजे) गिरिजाघरों को निशाना बनाने की फिराक में है। निशाने पर कोलंबो का भारतीय उच्चायोग भी था। आतंकियों के इस मास्टर प्लान से ही पता चलता है कि कट्टरपंथी मुस्लिम आतंकी संगठन के मंसूबे कितने खतरनाक थे। गत वर्ष बौद्ध धर्मस्थलों पर हमला करके उसने अपनी क्रूरता का पहले ही परिचय दे दिया था। क्रूरता का परिचय आतंकियों ने ईस्टर का दिन चुनकर भी दिया। इस हमले की खबर मिलते ही हिंदुस्थान में भी लोग मायूस हो गए। लोकसभा प्रचार के तीसरे चरण का प्रचार खत्म होने को था। और मायूसी कांग्रेस और अध्यक्ष राहुल गांधी के बयानों से भी सियासत को हो रही थी। उस मायूसी का असर कल दिन भर कांग्रेसी खेमे में भी नजर आया। मध्य प्रदेश के ताजातरीन मुख्यमंत्री ‘कमल’नाथ मुरझाए हुए से नजर आए। उनकी बातों में मायूसी की झलक साफ नजर आ रही थी। राहुल गांधी लोकसभा चुनावों के सिलसिले में पूरे देश का सघन दौरा कर रहे हैं। सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं पर कमलनाथ को लगता है कि कांग्रेस सत्ता से बहुत दूर ही रहेगी। हां, कमलनाथ मानते हैं कि कांग्रेस का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर होगा इसलिए यदि सरकार बनने की संभावना बनी भी तो गठबंधन से ही बनेगी। उन्हें लग यह भी रहा है कि संख्या पर्याप्त होने की सूरत में राहुल गांधी ही पीएम बनेंगे। इसे आशावाद की पराकाष्ठा भी कहा जा सकता है। आशावाद से लबरेज खुद पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी भी हैं। तभी तो वे कहते हैं कि देश के युवाओं को कांग्रेस में भविष्य दिख रहा है। भाजपा इस पर चुटकी लेने से पीछे नहीं हट रही। जहां तक भाजपा का सवाल है तो भाजपा राहुल को इस देश के लिए केवल और केवल निराशा ही बता रही है। भाजपा नेता पीयूष गोयल ने राहुल गांधी को निशाना बनाते हुए कटाक्ष किया है कि राहुल को तो पड़ोसी देश से चुनाव लड़ना चाहिए। कटाक्ष सुब्रह्मण्यम स्वामी ने भी किया है राहुल गांधी पर। यह कहकर कि वे दोनों तरह से अमेठी का चुनाव हारेंगे, या तो नामांकन निरस्त हो जाएगा या नागरिकता के मसले पर जनता को जवाब देना होगा। ऐसा हुआ तो यह कांग्रेस की सियासी जेब कटने के समान होगा। राहुल गांधी पर भाजपा के तीखे हमलों का सिलसिला यहां भी नहीं ठहरता। गुजरात के एक मंत्री और भाजपा नेता ने तो राहुल गांधी की तुलना कुत्ते से कर दी है। इन चुनावों में अभद्र टिप्पणियों के मामले में शायद वसावा ने इतिहास रच दिया हो। इतिहास चुनावों में पैसों के इस्तेमाल को लेकर भी रचा जा रहा है। खासतौर पर दक्षिण हिंदुस्थान में। कल कर्नाटक के शिमोगा जिले में चुनावी प्रक्रिया के बीच भारी मात्रा में वैâश बरामद हुआ। आयकर के छापों में कर्नाटक से लेकर गोवा तक करोड़ों का नकद जब्त हुआ। हैरत तो तब हुआ जब एक कार में रखे गए टायर के भीतर से भी २.४ करोड़ रुपए की नकद राशि निकल आई। अधिकारियों की हवा गुल हो गई। इतिहास इस बार देश की महिलाएं भी रचने जा रही हैं। ७० वर्षों में ऐसा पहली बार हुआ है जब लोकसभा चुनावों में पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं ने अधिक मतदान किया। चुनाव आयोग अब तक दो चरणों के मतदान का आंकड़ा जारी कर चुका है, जिसका ट्रेंड बता रहा है कि महिलाओं ने पुरुषों की तुलना में आधा फीसदी ज्यादा मतदान किया है। बात तीसरे चरण के मतदान की करते हैं। कल देश की ११५ सीटों पर मतदान होना है। उत्तर प्रदेश, बिहार, केरल, महाराष्ट्र, गुजरात और पश्चिम बंगाल की सीटों पर लोगों की खास नजर होगी। गुजरात की सभी २६ सीटों के भाग्य का पैâसला कल एक ही दिन में हो जाएगा। जहां तक यूपी का सवाल है तो तीसरे चरण में १० सीटों पर मतदान होना है। मुरादाबाद, रामपुर, संभल, फिरोजाबाद, मैनपुरी, एटा, बदायूं, आंवला, बरेली और पीलीभीत से चुनावी मैदान में उतरे मुलायम सिंह यादव, आजम खान, जयाप्रदा, वरुण गांधी और शिवपाल यादव जैसे कद्दावर नेताओं की किस्मत का पैâसला बंद हो चुका होगा। कुछ प्रâंटफुट पर हैं तो बहुत सारे बैकफुट पर। वैसे कांग्रेस दिल्ली में ‘आप’ के साथ गठबंधन का गणित प्रâंटफुट पर रहकर बिठाना चाहती है। फॉर्मूला क्या होगा, यह अब तक सार्वजनिक नहीं हुआ है। पर इस फॉर्मूले से भाजपा का वोट बैंक कटना तय है। कुछ-कुछ फिरोजाबाद की महागठबंधन रैली में कटी सपा नेता की जेब की तरह। समर्थकों ने भीड़ में नेताजी की जेब पर ही हाथ साफ कर दिया। सियासत में ऐसे वाकये होते ही रहते हैं। कभी कार्यकर्ता तो कभी नेताओं की जेब कटती ही रहती है।